रजौली में धान के लिए गोदाम नहीं

Updated at : 05 Dec 2015 8:05 PM (IST)
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रजौली में धान के लिए गोदाम नहीं

रजौली में धान के लिए गोदाम नहीं अगले वर्ष लक्ष्य के आधे की भी नहीं हुई थी खरीदारीव्यापार मंडल अध्यक्ष को होती है परेशानीकिसानों को नहीं मिलता है जूट का बोराप्रतिनिधि, रजौलीप्रखंड में पैक्स अध्यक्ष द्वारा धान खरीद कर प्रखंड मुख्यालय कृषि भवन में भंडारण किया जाता है. इसकी क्षमता मात्र सौ टन की है. […]

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रजौली में धान के लिए गोदाम नहीं अगले वर्ष लक्ष्य के आधे की भी नहीं हुई थी खरीदारीव्यापार मंडल अध्यक्ष को होती है परेशानीकिसानों को नहीं मिलता है जूट का बोराप्रतिनिधि, रजौलीप्रखंड में पैक्स अध्यक्ष द्वारा धान खरीद कर प्रखंड मुख्यालय कृषि भवन में भंडारण किया जाता है. इसकी क्षमता मात्र सौ टन की है. इसमें कुछ ही किसानों का धान रखा जा सकता है. प्रखंड में 16 पंचायत है. रजौली प्रखंड में जिले के सबसे कम धान की खरीदारी की जाती है. रजौली किसान भवन में भंडारण की समस्या बनी रहती है. क्रय पदाधिकारी भी गोदाम छोटा होने से लाचार दिखते हैं. अगले वर्ष रजौली प्रखंड में धान खरीद का लक्ष्य 30 हजार क्विंटल था. लेकिन, क्रय पदाधिकारी मात्र 10 हजार क्विंटल ही खरीदी कर पाये थे. समय पर भंडारण की गयी धान एसएफसी या मिलर नहीं उठा पाते हैं. एसएफसी अगर प्रति दिन उठाव धान का किया करे तब ही धान रजौली प्रखंड में किसानों का जा सकता है. गोदाम भर जाने के बाद खरीदारी एक सप्ताह तक बंद कर दिया जाता है. ऐसे में किसान अध्यक्ष पर सवाल खड़ा करने में लगे रहते हैं. सरकार पैक्स के माध्यम से धान की खरीदारी करता है. अध्यक्ष मेरा धान नहीं ले रहा है. यह गोदाम छोटा होने से अध्यक्षों को परेशानी होती है. दूसरी तरफ प्रदेश सरकार की ओर से जूट का बोरा मिलता है. वह भी सभी किसान को नहीं मिल पाता है. किसान अपने बाजार से जूट का बोरा लेकर धान भर कर देते हैं. क्रय पदाधिकारी कहते है की बोरा का पैसा अलग से मिलेगा, लेकिन किसान को आज तक बोरा का पैसा नहीं मिल पाता है.

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