जिले में 50, 8500 पशुओं को दिया जायेगा एफएमडी का डोज

Published by : Vikash Kumar Updated At : 01 Feb 2026 10:42 PM

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NAWADA NEWS.पशुओं को घातक बीमारियों से बचाने के लिए जिले में सोमवार से एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण की शुरुआत की जायेगी. विभागीय जानकारी के अनुसार, जिले के कुल 5,08,500 पशुओं को यह टीका लगाया जायेगा. यह टीकाकरण अभियान जिले के सभी प्रखंडों में आयोजित होगा, जो दो से 22 फरवरी तक चलेगा.

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आज से 22 फ़रवरी तक जिले में चलेगा एफएमडी टीकाकरण अभियान

टीकाकरण के लिए 14 प्रखंडो में 190 टीका कर्मियों को लगाया गया

नवादा कार्यालय.

पशुओं को घातक बीमारियों से बचाने के लिए जिले में सोमवार से एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण की शुरुआत की जायेगी. विभागीय जानकारी के अनुसार, जिले के कुल 5,08,500 पशुओं को यह टीका लगाया जायेगा. यह टीकाकरण अभियान जिले के सभी प्रखंडों में आयोजित होगा, जो दो से 22 फरवरी तक चलेगा. विभाग ने जानकारी दी है कि गाय, भैंस, भेड़ और बकरी में मुख्य रूप से खुरपका-मुंहपका रोग पाया जाता है. यह एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है. एफएमडी का टीका लगवाने से इस संक्रामक रोग पर प्रभावी रोक लगती है. खुरपका-मुंहपका रोग होने के कारण दूध उत्पादन में भारी गिरावट आती है. इस बीमारी में पशुओं के मुंह और खुरों में घाव हो जाते हैं और समय पर इलाज न मिलने से कभी-कभी पशुओं की मृत्यु भी हो जाती है. अतः सभी पशुपालकों के लिए अपने पशुओं का टीकाकरण कराना अनिवार्य है.

टीकाकरण से होने वाले प्रमुख फायदे

पशुओं (गाय, भैंस, भेड़, बकरी) में खुरपका-मुंहपका टीकाकरण कराने के अनेक फायदे हैं. यह संक्रामक रोग को रोकता है, दूध उत्पादन में भारी गिरावट को बचाता है, खुरों और मुंह के घावों से सुरक्षा प्रदान करता है और पशुओं की अकाल मृत्यु दर को कम करता है. इसके अलावा, यह रोग के प्रसार को नियंत्रित कर पशुपालकों की आजीविका सुरक्षित करता है.

एफएमडी टीकाकरण के मुख्य लाभ

बीमारी से बचाव :

एफएमडी वायरस के खिलाफ पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाता है, जिससे खुर और मुंह में छाले नहीं पड़ते.

उत्पादन में वृद्धि : बीमारी के कारण दूध उत्पादन में होने वाली भारी गिरावट को रोकता है. स्वस्थ पशु से निरंतर दूध मिलता रहता है, जिससे आर्थिक नुकसान नहीं होता.

मृत्यु दर में कमी :

यह रोग पशुओं के लिए जानलेवा हो सकता है, विशेषकर बछड़ों के लिए. टीकाकरण से समय पर बचाव होकर पशु की जान बचती है.

आर्थिक स्थिरता :

यह एक सस्ता उपाय है, जबकि इलाज बहुत महंगा होता है. यह पशुपालकों को पशु चिकित्सा के भारी खर्च से बचाता है.

पशु स्वास्थ्य :

खुरों में घाव न होने के कारण पशु आसानी से चल फिर सकते हैं और चरागाह में चारा चर सकते हैं, जिससे वे तंदुरुस्त और सक्रिय रहते हैं.

व्यापक सुरक्षा :

जब अधिकांश पशुओं को टीका लगाया जाता है, तो पूरे झुंड में बीमारी के फैलने का जोखिम कम हो जाता है.

प्रजनन क्षमता में सहायक

: स्वस्थ पशु की प्रजनन क्षमता बनी रहती है, जिससे बछड़े और आगे का उत्पादन सुरक्षित रहता है.

190 कर्मी करेंगे टीकाकरण

खुरपका-मुंहपका रोग को सफल बनाने के लिए जिले के 14 प्रखंडों में 190 टिका कर्मियों को लगाया गया है. सभी प्रखंडों के लिए अलग- अलग नोडल पदाधिकारी भी नियुक्त किये गये हैं. वहीं सभी टीकाकर्मी घर-घर जाकर पशुओं में टीकाकरण करेंगे. यह टीकाकरण बिल्कुल नि:शुल्क है.

-डॉ श्रीनिवास शर्मा, जिला नोडल पदाधिकारी, पशुपालन विभाग, नवादा

प्रखंड का नाम एफएमडी डोज

नवादा नगर- 3400नवादा सदर- 30400वारिसलीगंज- 30250मेसकौर- 34650सिरदला- 55700रजौली- 54350नरहट- 22000कौआकोल- 43600काशीचक- 11700रोह – 38950हिसुआ- 37850गोविंदपुर- 30800पकरीबरावां – 35550अकबरपुर- 52200नारदीगंज – 27100

कुल – 508500

क्या कहते हैं अधिकारी

केंद्र सरकार की ओर से प्रायोजित योजना एनएडीसीपी के तहत पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए एफएमडी राउंड छह दो फरवरी से कराया जा रहा है. यह टीकाकरण बिल्कुल निशुल्क है. सभी पशुपालक अपने-अपने पशुओं में टीकाकरण कराये. टीकाकर्मी आपके घर पर जाकर टीकाकरण करेंगे. सभी पशुपालक टीकाकरण का फायदा अवश्य लें.

डॉ दीपक कुमार कुशवाहा, जिला पशुपालन पदाधिकारी, नवादा.

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