गौरवशाली इतिहास, वर्तमान पहुंचा रहा नुकसान

नवादा : नवादा शहर के बीच में स्थित गांधी इंटर विद्यालय इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. अंगरेजों के जमाने में सन् 1913 में स्थापित यह विद्यालय आजादी के पहले जॉर्ज कोरेनेशन इंगलिश हाइ स्कूल के नाम से जाना जाता था. विद्यालय भवन में लिखे अभिलेख के अनुसार 1895-96 में यह स्कूल बोर्ड एडेड मिडिल इंगलिश […]
नवादा : नवादा शहर के बीच में स्थित गांधी इंटर विद्यालय इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. अंगरेजों के जमाने में सन् 1913 में स्थापित यह विद्यालय आजादी के पहले जॉर्ज कोरेनेशन इंगलिश हाइ स्कूल के नाम से जाना जाता था. विद्यालय भवन में लिखे अभिलेख के अनुसार 1895-96 में यह स्कूल बोर्ड एडेड मिडिल इंगलिश स्कूल था, जो 1913 में हाई स्कूल में उत्क्रमित हुआ.
आजादी के बाद गांधी उच्च विद्यालय के नाम से प्रसिद्ध हुआ और बाद में बहुद्धेशीय विद्यालय इंटर स्तरीय विद्यालय के रूप में बदलता चला गया. स्कूल में प्राचार्यो शिक्षकों की एक लंबी फेहरिस्त है, जो अपने निष्ठा व कर्तव्य परायणता से छात्रों के भविष्य निर्माण में पूर्ण योगदान देते रहे हैं. गांधी इंटर स्कूल कुछ वर्ष पहले तक अपने शैक्षणिक वातावरण के लिए जिले भर में अनुकरणीय था.
परंतु, समय के साथ इसमें कमी आयी है. आजादी के पहले 1913 से 1915 तक मौलवी अब्दुल जलील इसके पहले प्रधानाध्यापक थे. जबकि, आजादी के बाद मधुसूदन चौधरी ने प्राचार्य के रूप में कमान संभाली. गांधी स्कूल का स्वर्णिम काल 1 अप्रैल 1967 से 1980 तक प्राचार्य रहे झारखंडी पांडेय के कार्य काल को माना जा सकता है. जब उन्होंने प्राचार्य के रूप अपने अनुपम कार्यो से शिक्षा क्षेत्र में नयी इबारत लिखने में सफल हुए.
गांधी स्कूल के छात्र देश के कोने-कोने में न्यायिक सेवा, प्रशासनिक सेवा, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधि व अन्य सेवाओं में एक से एक बढ़ कर कीर्तिमान स्थापित किये हैं.
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