ग्रामीणों ने दो डॉक्टरों को घंटों बनाये रखा बंधक

Updated at : 11 Jan 2018 6:07 AM (IST)
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ग्रामीणों ने दो डॉक्टरों को घंटों बनाये रखा बंधक

अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र लिखने पर किया हंगामा पुलिस के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला नवादा : सदर अस्पताल की घटना अभी पूरी तरह से शांत भी नहीं हो पायी थी कि दूसरे ही दिन सदर प्रखंड के ओढ़नपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना दिये की सूचना से नाराज ग्रामीणों ने स्वास्थ्य […]

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अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र लिखने पर किया हंगामा

पुलिस के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला
नवादा : सदर अस्पताल की घटना अभी पूरी तरह से शांत भी नहीं हो पायी थी कि दूसरे ही दिन सदर प्रखंड के ओढ़नपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना दिये की सूचना से नाराज ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र के पास जम कर हंगामा किया़ लोगों ने एपीएचसी व सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को घंटों बंधक बनाये रखा़ पुलिस के हस्तक्षेप के बाद पदाधिकारियों को मुक्त किया गया़ गांववालों ने सदर पीएचसी प्रभारी डॉ अशोक प्रसाद व एपीएचसी प्रभारी डॉ योगेंद्र प्र्रसाद को कब्जे में ले लिया था़ मुक्त होने के बाद दोनों डॉक्टर सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ प्रसाद से मिलने सदर अस्पताल पहुंचे़ उन्होंने बताया कि अस्पताल में लगे बोर्ड पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ अतिरिक्त नहीं लिखा हुआ था,
इस पर अतिरिक्त लिखाया गया़ इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया़ सीएस ने बताया कि ओढ़नपुर को पीएचसी बनाने का आदेश नहीं दिया गया है, तो इस तरह से हंगामा करना गलत है़ उन्होंने कहा कि इस संबंध में डीएम और राज्य स्वास्थ्य समिति को भी लिखित जानकारी दी गयी है़ किसी के कहने से कोई एपीएचसी को बदल कर पीएचसी नहीं बनाया जा सकता है़ बताया जाता है कि समिति से पत्रांक संख्या 58/डीएचसी दिनांक सात मई 2009 को एक पत्र जारी किया गया था, जो तत्कालीन जिलाधिकारी सह जिला स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष के नाम से जारी हुआ था़ सदर प्रखंड प्रखंड पीएचसी के प्रथम चिकित्सा पदाधिकारी के पत्रांक 213/नवादा दिनांक 11 मई 2005 के माध्यम से जारी पत्र को लेकर ग्रामीणों ने मुद्दा बना लिया है़ हालांकि पत्र में यह लिखा हुआ है कि अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ओढ़नपुर को सदर प्रखंड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को नवादा से स्थानांतरित कर ओढ़नपुर करने का आदेश प्राप्त है़ लेकिन, भवन के अभाव में स्थानांतरित नहीं किया जा सका है़ इधर, सिविल सर्जन ने बताया कि तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के द्वारा 16 अप्रैल 2013 को इस पीएचसी का उद्घाटन किया गया था़ उसी तख्ती में अतिरिक्त नहीं लिखा था, जिस पर अतिरिक्त लिखा गया है़ इसी से ग्रामीणों ने विवाद खड़ा किया है़ जबकि ऐसा कोई भी पत्र स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्राप्त नहीं है़ सीएस ने बताया कि ओढ़नपुर एपीएचसी है, तो वही रहेगा़ लोग अपने मन से जो चाहे वह लिख दे़ फिलवक्त पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत करा दिया गया है़
बाहरी लोगों की मानसिकता में बदलाव आना बहुत जरूरी है. डॉक्टर भगवान नहीं होता है, जो किसी मृत व्यक्ति को जिंदा कर दे़ लेकिन, उसके अंदर लोगों को मरते दम तक बचाने का प्रयास करने की जो क्षमता है, वह पूरी तरह से लगा दी जाती है़ बावजूद लोग इस बात को समझने को तैयार नहीं है़ं इसके लिए सामाजिक जागरूकता जरूरी है़ जब तक चिकित्सक खुद सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक समुचित इलाज संभव नहीं है़
डॉ अशोक कुमार,जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी
प्रशासनिक स्तर पर सभी चिकित्सकों को सुरक्षा मिलना जरूरी हो गया है़ आये दिन लोग बात-बात पर उग्र होकर चिकित्सकों को ही निशाना बना ले रहे हैं. इससे चिकित्सक खुले मन से काम नहीं कर पा रहे हैं.मंगलवार की घटना में जो दृश्य सामने आया है, उससे चिकित्सकों में दहशत है़ प्रशासन जब तक चिकित्सकों को समुचित व्यवस्था नहीं देगा, तब तक मरीजों का इलाज भयमुक्त वातावरण में नहीं हो सकेगी.
डॉ उमेश चंद्रा,सीएस कार्यालय के पदाधिकारी
कोई भी चिकित्सक समाज का एक अभिन्न अंग होता है़ वर्तमान परिवेश में लोग डॉक्टर और शिक्षक सभी का सम्मान करना भूल चुके हैं. इसके लिए सामाजिक चेतना की जरूरत है़ सुरक्षा का बेहतर उपाय जब तक नहीं होगा तब तक कोई भी चिकित्सक खुले मन से काम नहीं कर पायेगा़ प्राईवेट से बेहतर इलाज सदर अस्पताल में किया जाता है. बावजूद लोग चिकित्सकों को ही निशाना बना रहे हैं. इसे हर हाल में रोकना होगा.
डॉ प्रभाकर सिंह,फिजिशियन
सिक्यूरिटी के लिए सीएस ने डीएम को लिखा पत्र
सीसीटीवी को दुरुस्त कराने की होगी पहल
उपद्रवियों के खिलाफ की जायेगी कार्रवाई
निजी से बेहतर इलाज होता है सदर अस्पताल में
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