माल ढुलाई के लिए अब ई-वे बिल हो जायेगा जरूरी

Updated at : 04 Jan 2018 6:23 AM (IST)
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माल ढुलाई के लिए अब ई-वे बिल हो जायेगा जरूरी

व्यवसायियों के माल की सुरक्षा व कर चोरी से छुटकारे को लेकर लागू किया जा रहा नियम नवादा : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत अब समेकित रूप से वैट की वसूली होगी. सरकार के विशेष नियम के आधार पर राज्यों को अलग से करों का भुगतान नहीं करना होगा. विभाजन प्रक्रिया में कर […]

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व्यवसायियों के माल की सुरक्षा व कर चोरी से छुटकारे को लेकर लागू किया जा रहा नियम

नवादा : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत अब समेकित रूप से वैट की वसूली होगी. सरकार के विशेष नियम के आधार पर राज्यों को अलग से करों का भुगतान नहीं करना होगा. विभाजन प्रक्रिया में कर की उगाही वैट समय अंतराल पर ही होगी. इसके लिये एक फरवरी 2018 से माल वाहनों व परिवहनकर्ताओं को माल ढ़ुलाई के लिये ई-वे बिल लेना अनिवार्य किया गया है. इसे लागू करने को लेकर जिला वाणिज्यकर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिये विभाग प्रशिक्षण करवायेगी. जनवरी के इसी सप्ताह से इसे शुरू कर दिया जायेगा. यह प्रशिक्षण ट्रासपोर्टरों और कारोबारियों को दिया जाना है
. इस ई-वे बिल में माल ढुलाई के लिये समय सीमा और दूरी के हिसाब से करों की इंट्री होगी. किलोमीटर की दूरी तक के लिये लिये ई-वे बिल में समय सीमा एक दिन ही रहेगी. दो सौ किलोमीटर की दूरी तय करने पर तो ई-वे बिल का निर्धारित समय सीमा दो दिनों का होगा. ऐसा नहीं होने पर अथवा मालवाहक गाड़ी में किसी प्रकार का तकनीकी खराबी आने पर उचित कारण एवं साक्ष्य के साथ संबंधित पदाधिकारियों को जानकारी देना अनिवार्य है.पदाधिकारी ऐसे माल से लदे वाहनों को जांच के क्रम में रोकते हैं, तो उसे आधे घंटे के अंदर स्पष्ट कारण के साथ मुक्त कर देना होगा.अन्यथा उसे जब्त कर उचित कार्रवाई करते हुए तीन दिनों के अंदर निष्पादित कर देना है.
क्या है ई-वे बिल प्रावधान: ई-वे बिल नहीं होने पर वाहनों पर दंड का भी प्रावधान है. यह काफी गंभीर है. ई-वे बिल का जेनरेशन ईबीएन जीएसटी के काॅमन पोर्टल पर सप्लायर, माल पाने वाला तथा ट्रांस्पोर्टर को अधिकृत किया गया है. यदि किसी ट्रांस्पोर्टर द्वारा ई-वे बिल जेनरेट किया जाता है, तो वैसी परिस्थिति में उक्त वाहनकर्ता द्वारा ई-वे बिल के पार्ट फर्स्ट को सप्लायर के द्वारा भर कर लेना होगा. ई-वे बिल के लिये इनव्यास या बिल आॅफ सप्लाय अथवा डिलीवरी चालान ई-वे बिल के साथ रहना अनिवार्य है. सरकार द्वारा कर दाताओं को यह लाभ दिया गया है कि प्रावधानिक समय के अधिन अपने ई-वे बिल या कन्साईन्मेट को कैंसिल भी कर सकते हैं. इस तरह की व्यवस्था से पूरे देश में मालों का परिवहन ई-वे बिल के आधार पर सुगमता से परिचालित होने लगेगा. इससे करों की चोरी में कमी आयेगी. पूरे देश में बिना व्यवधान का परिचालन होगा. माल भी सुरक्षित रहेगा. ई-वे बिल के आधार पर परिचालन का ट्रैकिंग भी हो सकेगा. 50 हजार से अधिक के माल मंगाने व भेजने पर ई-वे बिल अनिवार्य हो जायेगा.
क्या होगा ई-वे बिल का लाभ
ई-वे बिल के ढेर सारे लाभ भी लोगों को मिलेगा. वैसे कर दाताओं को विभाग के चक्कर लगाने के झंझट से मुक्ति मिल जायेगी. लोग आॅनलाइन ई-वे बिल के आधार पर मोबाइल स्क्वाॅयड को अविलंब जानकारी हासिल होगी. बगैर अवरोध के परिचालन संपन्न होगा. इससे खरीदारों की स्वतः पहचान होगी. इससे ट्रेडर्स द्वारा स्वयं पाॅलिसी का निर्माण होगा. इस व्यवस्था से पहले की तरह लोगों को ढेर सारे कागजातों को रखने की झंझटों से मुक्ति मिल जायेगी. जीएसटी आर रिटर्न, जो सप्लायर के द्वारा किया जाना है, उसे दोबारा अपलोड करने की झंझट से मुक्ति मिल जायेगी.
क्या कहते हैं अधिकारी
ई-वे बिल के जेनरेट होने पर इससे जुड़ी कठिनाइयों को दूर करने के लिये विभाग के पदाधिकारियों द्वारा अलग से प्रशिक्षण दिया जायेगा. इसकी तिथि बाद में तय की जायेगी. वैसे जनवरी के इसी सप्ताह से यह
प्रशिक्षण शुरू किये जाने की संभावना है. इस ई-वे बिल को सरकार ने माल मंगाने व भेजने के लिये नयी व्यवस्था को जेनरेट किया है. इससे कर चोरी की घटनाओं पर विराम लगेगा.
विजय कुमार आजाद, जिला वाणिज्य कर पदाधिकारी,नवादा
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