खरीदीबिगहा में बिन मांगे मिल रहीं सौगातें

नवादा नगर : भदौनी पंचायत के खरीदीबिगहा व रसूलनगर टोले में रहनेवाले लोगों पर इन दिनों सरकारी अमला मेहरबान है. बिना आवेदन दिये ही किसी को मुर्गी पालन के लिए शेड बना कर मिल रहा है, तो किसी के लिए बकरी पालन का शेड तैयार कराया जा रहा है. कच्ची सड़कों की जगह पीसीसी पथ, […]
नवादा नगर : भदौनी पंचायत के खरीदीबिगहा व रसूलनगर टोले में रहनेवाले लोगों पर इन दिनों सरकारी अमला मेहरबान है. बिना आवेदन दिये ही किसी को मुर्गी पालन के लिए शेड बना कर मिल रहा है, तो किसी के लिए बकरी पालन का शेड तैयार कराया जा रहा है. कच्ची सड़कों की जगह पीसीसी पथ, तो कहीं किसी अन्य योजना पर ताबड़तोड़ काम हो रहा है.
तेजी के साथ हो रहे विकास की यह कहानी खरीदीबिगहा सड़क के दूसरी ओर नहीं दिखती है. मुख्यमंत्री के संभावित कार्यक्रम को देखते हुए जिला प्रशासन जिस प्रकार रेवड़ियों की तरह योजनएं बांट रहा है, यह पहल की गयी होती, तो गांववाले खुशहाल रहते़ जरूरतमंदों को वरीयता के अनुसार योजनाओं का लाभ हमेशा मिले,
तो इस प्रकार का दिखावा करने की जरूरत प्रशासनिक अमला को नहीं पड़ती़ भदौनी पंचायत के वार्ड एक का यह हिस्सा इस प्रकार से बसा हुआ है कि आधे से अधिक क्षेत्र पर महादलित परिवार के लोग गैरमजरूआ जमीन पर अपने कच्चे पक्के मकान बना कर रहते हैं. उन्हीं लोगों के बीच में रैयती जमीन पर समाज के अन्य वर्गों के भी पक्के मकान भी बने हुए हैं. सीएम की विकास समीक्षा यात्रा के संभावित स्थल को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है.
15 से 18 जनवरी के आसपास सीएम का यह दौरा नवादा में होना है. इसके लिए 15 दिनों के अंदर दिखावा के हर काम को पूरा करने पर अधिकारी जोर दे रहे हैं. सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद भी जहां योजनाओं का लाभ लेने के लिए कई उपाय करने पड़ते हैं वहीं खरीदीबिगहा में मनरेगा के तहत मुर्गी, बकरी, सूअर व गो पालन के लिए शेड बनाने आदि के लिए लाभुकों को चयन किया जा रहा है. सीएम की नजरों में प्रशासन की छवि बेहतर दिखलाने के लिए साको चौधरी को मुर्गी फार्म बना कर मिल रहा है,
तो चंदू डोम और चमारी चौधरी के चेहरे भी मुर्गी फार्म बना कर खिलनेवाले हैं. कल्लू यादव को पशु बांधने के लिए पशु शेड बना कर मिलेगा. मनोज मांझी के घर के पास कचरा जमा कर खाद बनाने के लिए नैडेप बनाया जा रहा है. 19 हजार 4 सौ रूपये में 5 गुणे 5 का मुर्गी शेड तो 10 हजार 7 सौ की लागत से 10 गुणे 6 का नैडेप बनना है. इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में आवेदन कार्यालय में पड़े हैं लेकिन खरीदीबिगहा व रसूलनगर गांव के लोगों को बुलाकर इसका लाभ दिया जा रहा है.
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