मामलों को बगल में दबाये बैठे हैं पुलिस अधिकारी

Updated at : 23 Nov 2017 8:07 AM (IST)
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मामलों को बगल में दबाये बैठे हैं पुलिस अधिकारी

कार्रवाई के बाद पुलिस महकमें में मचा हड़कंप 30 एसआई और 23 एएसआई पर नकेल नवादा : पुलिस पदाधिकारियों के शिथिल रवैये ने विभाग पर बोझ बढ़ा दिया है. इससे मगध रेंज के डीआईजी जितेंद्र श्रीवास्तव ने कड़ी कार्रवाई करते हुए नवादा के एसपी विकास बर्मन को उन शिथिल पुलिस पदाधिकारियों के वेतन बंद करने […]

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कार्रवाई के बाद पुलिस महकमें में मचा हड़कंप

30 एसआई और 23 एएसआई पर नकेल

नवादा : पुलिस पदाधिकारियों के शिथिल रवैये ने विभाग पर बोझ बढ़ा दिया है. इससे मगध रेंज के डीआईजी जितेंद्र श्रीवास्तव ने कड़ी कार्रवाई करते हुए नवादा के एसपी विकास बर्मन को उन शिथिल पुलिस पदाधिकारियों के वेतन बंद करने का आदेश जारी किया है. इस सख्त कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमें में हड़कंप है.

आदेश जारी होने के साथ ही पुलिस पदाधिकारियों ने अपने कार्यों में तेजी ला दी है. लेकिन, अपने कार्यों की जवाबदेही में तत्परता दिखायी जाती, तो आज उन पुलिस पदाधिकारियों पर गाज नहीं गिरती. पिछले कई माह से कांडों के निष्पादन को लेकर एसपी विकास बर्मन द्वारा हर बार मासिक बैठक में निर्देश दिया जाता रहा है, परंतु उन पुलिस पदाधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही थी. अब जब उन लोगों पर डीआईजी साहब की गाज गिरी, तब सभी को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हुआ है. इस बड़ी कार्रवाई में कुल 30 एसआइ के वेतन बंद किये गये हैं, जिसमें छह थानाध्यक्ष भी शामिल हैं. इसके अतिरिक्त 23 एएसआई भी शामिल हैं, जिनका वेतन रोक दिया गया है.

क्यों आयी कठोर कदम उठाने की नौबत

जिले के कुछ ऐसे पुलिस पदाधिकारी हैं, जिनके यहां दर्जनों मामले पड़े हैं, लेकिन उन मामलों का निष्पादन करने के बजाय उसे फाइलों में बंद कर रखे हुए हैं. इन शिथिल पुलिस पदाधिकारियों में नगर थाने के एसआई शेर आलम खां के पास कुल 40 मामले अनुसंधान के लिए पड़े हैं. हिसुआ थाने के एसआई रंजन कुमार के पास 59 मामलों की फाइल पड़ी है.

रजौली के श्याम सुंदर पासवान ने 51 मामलों का अनुसंधान नहीं किया गया है. इसी प्रकार रजौली के एसआई राजेश चौधरी के पास 28 मामले, पकरीबरावां के एसआई सुदामा पासवान के पास 13 मामले, सीतामढ़ी के एसआई श्रीकांत कुमार के पास वारिसलीगंज थाना के 14 मामले, नगर थाने के एसआई जयशंकर प्रसाद के पास 43 मामले तथा नेयाज अहमद खां के पास 10 मामले तथा रजौली के एएसआई मंटुन कुमार के पास 13 मामले बंद फाइलों में अनुसंधान के लिए पड़े हुए हैं. इसके अलावा अन्य पुलिस पदाधिकारियों के पास 10 के आसपास मामले लंबित हैं़ इनमें वेतन बंद का शिकार होनेवालों में कुछ ऐसे पुलिस पदाधिकारी भी शामिल हैं जिनके पास एक या दो मामले पड़े हैं.

इनका हाल जौ के साथ घुन पिसाने वाली कहावत चरितार्थ हो गयी है. वेतन बंद की कार्रवाई के बाद नगर थाना इंस्पेक्टर अंजनी कुमार लिपिक कक्ष में मामलों की समीक्षा में जुटे हुए हैं. उन्होंने बताया कि पुलिस पदाधिकारियों को यथाशीघ्र मामलों का निष्पादन करने के लिए कहा गया है.डीआइजी जितेंद्र श्रीवास्तव की सख्त कार्रवाई का शिकार जिले के छह थानाध्यक्ष भी हुए हैं. इनमें कौआकोल के थानाध्यक्ष मनोज कुमार, हिसुआ थानाध्यक्ष राजदेव साव, गोविंदपुर थानाध्यक्ष रवि पासवान, सीतामढ़ी ओपी प्रभारी श्रीकांत कुमार, नारदीगंज थानाध्यक्ष मनोज कुमार शामिल हैं.

चेतावनी के बाद भी नही सुधरे अफसर

जिन लोगों के वेतन बंद हुए हैं उन लोगों द्वारा केस अनुसंधान नहीं किया जा रहा है, केस में लापरवाही तथा केस की डायरी में कुछ लिख भी नहीं रहे हैं. चार्जशीट नहीं काट रहे हैं, केस के निष्पादन में शिथिलता बरत रहे हैं़ इन सभी बिंदुओं पर डीआइजी ने गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया है.

कई बार यहां के पुलिस पदाधिकारियों को केस अनुसंधान में तेजी लाने को बाेला जा रहा था, बावजूद लोगों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही था. इसके बाद डीआईजी के द्वारा समीक्षा के उपरांत उन शिथिल पुलिस पदाधिकारियों का वेतन बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है.

विकास बर्मन, एसपी नवादा

जिन एसआई-एएसआई का रोका गया वेतन

एसआई रामनाथ सिंह, एसआई पवन कुमार, एसआई बबिता कुमारी, एसआई शेरआलम खां, एसआई रंजीत शार्मा, एसआई कृष्णा यादव, एसआई संतोष कुमार, एसआई राजकुमार शार्मा, एसआई रंजन कुमार, एसआई जयशंकर प्रसाद, एसआई नेयाज अहमद खां, एसआई श्याम सुंदर पासवान, एसआई बसंत यादव, एसआई राजकुमार, एसआई राजेश चौधरी, एसआई रणविजय कुमार, एसआई धर्मेंद्र कुमार, एसआई सुदामा पासवान, एसआई विजय कुमार, एसआई प्रेमनाथ झा, एसआई उमाशंकर, एसआई चंद्रशेखर कुमार आजाद, एसआई जयशंकर प्रसाद, एसआई नवरत्न प्रसाद, एसआई राजेंद्र राम तथा एसआई राजेंद्र सहनी के अलावा एएसआई की सूची में हरिवंश सिंह, विश्वनाथ ओझा, प्रमीला कुमारी, अशर्फी यादव, अजीत राम, सुधीर कुमार, महेश कुमार सिंह, रंजीत पासवान, देवेंद्र कुमार, अफजाजुल हक, वीरेंद्र पासवान, चंद्रभूषण सिंह, महेंद्र प्रसाद साह, कौशल कुमार मिश्रा, चंद्रचूड़ ठाकुर, शंकर ठाकुर, रामानंद यादवेन्दु, राम विशाल यादव, गोपाल शरण सुधांशु, मंटुन कुमार, प्रभुनाथ सहनी तथा शोभनाथ झा शामिल हैं.

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