स्वास्थ्य केंद्र में नहीं हैं दवाइयां
Updated at : 04 May 2017 6:45 AM (IST)
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सांसद ग्राम योजना. नानंद गांव की नहीं बदली तसवीर तीन साल से बन कर तैयार है पशु अस्पताल, नहीं हुआ हैंड ओवर बिहारशरीफ : सिलाव प्रखंड के नानंद गांव के लोग अपने गांव को सांसद ग्राम योजना में चयन होने पर जितने उत्साहित थे, आज करीब तीन साल बीत जाने के बाद उनका उत्साह ठंडा […]
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सांसद ग्राम योजना. नानंद गांव की नहीं बदली तसवीर
तीन साल से बन कर तैयार है पशु अस्पताल, नहीं हुआ हैंड ओवर
बिहारशरीफ : सिलाव प्रखंड के नानंद गांव के लोग अपने गांव को सांसद ग्राम योजना में चयन होने पर जितने उत्साहित थे, आज करीब तीन साल बीत जाने के बाद उनका उत्साह ठंडा हो गया है. करीब 6700 वोटरों व 18 हजार की आबादी वाले इस गांव में विकास के कार्य तो हुए हैं, मगर यह विकास अन्य गांवों की तरह ही है. सांसद ग्राम योजना के तहत जितनी लंबी-चौड़ी विकास की बातें की गयी थी, वह कहीं दिखाई नहीं पड़ती है. सांसद ग्राम योजना क लाभ के बारे में पूछने पर ग्रामीण बताते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है. जैसा विकास दूसरे गांवों का हुआ है, उसी प्रकार का विकास नानंद गांव का भी हुआ है.
जलापूर्ति केंद्र हमेशा रहता है बंद :
गांव में करीब 10 वर्ष पूर्व 25 हजार गैलन क्षमता का पानी टंकी है. वह हमेशा बंद रहता है. इस जलापूर्ति केंद्र का लाभ नानंद के लोगों को नहीं मिल पा रहा है. गांव के लोग जलापूर्ति केंद्र होने के बाद भी निजी चापाकल या सरकारी चापाकल पर पेयजल के लिए आश्रित है. जलापूर्ति केंद्र का ऑपरेटर यदा-कदा आता है, मशीन खराब होने का बहाना बना कर फरार हो जाता है.
स्वास्थ्य केंद्र में नहीं हैं दवाएं :
गांव वालों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्र हैं. वहां दो नर्सों की पदस्थापना भी है, मगर दवाएं नहीं रहने के कारण गांव वालों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. गांव के लोग इलाज के लिए पावापुरी स्थित वर्धमान मेडिकल कॉलेज व बिहारशरीफ जाने को मजबूर है.
तीन वर्षों से तैयार है पशु अस्पताल :
गांव में पशु अस्पताल का नया भवन तीन वर्षों से बन कर तैयार हैं, मगर उसे आज तक विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है, जिसके कारण बिना उद्घाटन के ही बिल्डिंग जर्जर होती जा रही है. पशु अस्पताल के शेड में ग्रामीण कट्टू-भूसे का बोरे भरे हुए हैं.
तालाब का नहीं हुआ जीर्णोद्धार :
गांव में 2.5 एकड़ का तालाब है जो गंदगी से भरा पड़ा है. इस तालाब का जीर्णोद्धार नहीं हुआ. तालाब के सौंदर्यीकरण कराने के ग्रामीणों के आग्रह पर भी कोई काम नहीं हुआ है. इतने बड़े गांव में छठ घाट नहीं है, जिसके कारण छठव्रतियों को काफी परेशानी होती है.
सरकारी ट्यूबवेल बना पर मोटर नहीं लगी
किसानों को सिंचाई का साधन उपलब्ध कराने के लिए सरकारी ट्यूबवेल का निर्माण किये हुए कई वर्ष बीत गये हैं. वहां कनेक्शन की बिजली भी पहुंच गयी है, मगर मोटर नहीं लगाया गया है, जिसके कारण किसानों को सरकारी ट्यूबवेल का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
क्या कहते हैं ग्रामीण :
” सांसद ग्राम होने का कोई विशेष फायदा नहीं दिख रहा है. गांव में स्वास्थ्य केंद्र हैं पर दवाएं नहीं है. आज भी इलाज कराने के लिए पावापुरी व बिहारशरीफ जाना पड़ता है.”
वीरेश प्रसाद, ग्रामीण, नानंद
”गांव में दस वर्ष पूर्व पानी टंकी बना है, मगर इसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है. जलापूर्ति केंद्र हमेशा बंद रहता है. गांव के लोग निजी व सरकारी चापाकलों पर आश्रित है.”
रामशरण प्रसाद, ग्रामीण
”गांव में प्रखंड व थाना बनने की बात कही गयी थी, मगर आज तक इसका निर्माण नहीं हुआ. सांसद ग्राम योजना के तहत अलग से कोई कार्य नहीं हुआ है, जो काम दूसरे गांवों में हुआ है, वही नानंद में हुआ है.”
डॉ. विंदेश्वर प्रसाद, ग्रामीण
”सांसद ग्राम योजना में शामिल होने का कोई फायदा नहीं मिला है. गांव का सरकारी ट्यूबवेल कई सालों से बन कर तैयार है, उसमें मोटर नहीं लगाया गया है, जिसके कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.”
सुनील कुमार, ग्रामीण
”गांव में तीन वर्ष पहले पशु अस्पताल बनाया गया है, जिसे आज तक विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है. भवन का उद्घाटन नहीं हुआ है और भवन जर्जर स्थिति में होता जा रहा है.”
जितेंद्र कुमार, ग्रामीण
”गांव में तालाब है, मगर उसमें गंदगी भरी पड़ी है. छठ व्रत के मौके पर अर्घ्य देने वालों को नदी में जाना पड़ता है. तालाब में छठ घाट बनाने की बात थी, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी.”
सरिता देवी, ग्रामीण
नहीं बना खेल का मैदान
गांव में जमीन रहने के बावजूद खेल का मैदान नहीं बन पाया है. पांच एकड़ 49 डिसमिल जमीन खेल के मैदान के लिए उपलब्ध है. ग्रामीणों ने खेल का मैदान निर्माण करने के लिए सांसद, जिलाधिकारी को पत्र भी लिखा पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
क्या कहते हैं सांसद :
” हमने नानंद को सांसद ग्राम योजना के लिए चयन किया. अपने सांसद मद से गांव में कई कार्य कराये. ढलाई, शौचालय, पानी की व्यवस्था की. जिलाधिकारी से लेकर कई विभागों के अधिकारियों को गांव में ले जाकर चौपाल लगाया. इसके लिए अलग से कोई राशि नहीं मिली जिसके कारण परेशानी हुई. केंद्र से इस संबंध में कोई विशेष निर्देश व सहयोग नहीं मिला है.”
कौशलेंद्र कुमार, सांसद, नालंदा
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