बदलती रही आयोजन की तिथि

Updated at : 22 Nov 2016 6:08 AM (IST)
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बदलती रही आयोजन की तिथि

राजगीर (नालंदा) : राजगीर महोत्सव की 31 वर्ष के इतिहास में सातवीं बार महोत्सव के तिथि में परिवर्तन किया गया है. पहली दफा 1989 में इसके तिथि में परिवर्तन किया गया था. उस समय यह महोत्सव मार्च में 10 से 12 मार्च तक आयोजित किया जाता था. बताया जाता है कि देशी विदेशी पर्यटन एवं […]

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राजगीर (नालंदा) : राजगीर महोत्सव की 31 वर्ष के इतिहास में सातवीं बार महोत्सव के तिथि में परिवर्तन किया गया है. पहली दफा 1989 में इसके तिथि में परिवर्तन किया गया था. उस समय यह महोत्सव मार्च में 10 से 12 मार्च तक आयोजित किया जाता था.

बताया जाता है कि देशी विदेशी पर्यटन एवं कला सांस्कृतिक को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खजुराहो नृत्व महोत्सव के तर्ज पर पर्यटन विभाग की ओर से सर्वप्रथम चार अप्रैल 1986 को राजगीर नृत्स महोत्सव की शुरुआत की गई थी. तब यह महोत्सव राजगीर के जंगल के बीच स्थित प्राचीन और ऐतिहासिक स्वर्ण भंडार परिसर में दो दिनों के लिए आयोजन किया गया था. तब से लगातार इसी तिथि पर पर्यटन विभाग की ओर से राजगीर महोत्सव का आयोजन होता रहा. परंतु 1989 में इसके तिथि को परिवर्तन कर उसे 10 से 12 मार्च किया गया. 1989 में ही इस महोत्सव का आयोजन पुन: एक बार तीन से पांच नवंबर को हुआ.

इसी वर्ष नृत्य महोत्सव का नाम बदलकर राजगीर महोत्सव किया गया. परंतु इसके बाद लगातार चार वर्षों 1990 से 1994 तक किसी कारण वश महोत्सव का आयोजन नहीं हो सका. पुन: 1995 में राजगीर महोत्सव का आयोजन फिर से हुआ. इस वर्ष फिर से इसके तिथि और स्थान में बदलाव किया गया. 1995 में यह महोत्सव नये स्थान में नये कलेवर के साथ नये स्थान पर शुरू हुआ. स्वर्ण भंडार के पास से शुरू हुए इस महोत्सव का स्थान परिवर्तन कर यूथ होस्टल का मैदान किया गया. विश्वशांति स्तूप के वर्षगांठ से जोड़ते हुए इसके तिथि को 24 अक्तूबर किया गया और आगे के वर्षों के लिए भी इस वर्ष राजगीर महोत्सव को यूथ होस्टल के मुक्ताकाश मंच पर लगातार तीन दिनों तक मनाया गया.

महोत्सव
को ऐतिहासिक पुट देने के उद्देश्यों से महोत्सव के मुख्य प्रवेश द्वार को नाम मगध द्वार कर दिया गया. मौर्य कालिन स्थापत्य कि छाप लिये इसके चाहरदीवारियों में अशोक स्तंभ का चित्र उकेर कर प्राचीन मगध की याद ताजा की गयी. वर्ष 2007 तक लगातार इसी तिथि पर आयोजित की जाती रही. इसी वर्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके तिथि को परिवर्तित कर इसे दिसंबर माह के प्रथम शनिवार और रविवार कर इसे दो दिनों का कर दिया. वर्ष 2009 में महोत्सव का स्थान परिवर्तित कर किला मैदान किया गया. वहीं वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे दो दिनों के बजाय 15 दिनों का कर दिया.
फिर बीच में इसे बढ़ा कर 17 दिनों का किया गया. पिछले वर्ष यह महोत्सव 17 दिनों का आयोजित हुआ था. फिर अगले वर्ष इसे 15 दिनों का कर दिया गया. तब से यह महोत्सव 15 दिनों का होता रहा. बताया जाता है कि इस महोत्सव में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री हेमामालिनी, नलिनी कमलिनी, सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सपन सुंदरी प्रख्यात कथक नृत्य मधुकर आनंद, सुश्री किरण चौहान, बांसुरी वादक पंडित हरि चौरसिया, भजन सम्राट अनूप जलोटा, फिल्म अभिनेत्री अर्चना जोगलेकर,
वीणा वादक पंडित विश्वमोहन भट्ट, सिने तारिका मीनाक्षी शेषाद्रि, कैलाश खेर, सुखबिंदर सिंह, अल्का याज्ञनी, पंकज उदास, प्रीतम चक्रवर्ती, स्मीता बेलोर, शान जैसे नामचीन कलाकारों ने महोत्सव के मंच पर अपनी प्रस्तुती देकर राजगीर को चार चांद लगाने तथा इसे अंतरराष्ट्रीय पूट देने का काम किया है. इस बार भी महोत्सव हिंदी फिल्मों में किंग ऑफ वायस के नाम से सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक उदित नारायण, बॉलिवुड कि लेडी सिंगर कविता कृष्णामृर्ति तथा भोजपुरी गीतों के पार्श्व गायिका व भक्ति गीतों के स्वर मलिका कल्पना पटवारी व लोग गीतों के प्रसिद्ध गायक आलोक चौबे की सुर मधुर गीतों से राजगीर की वादियां झंकृत होगी.
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