अस्थावां में ऊनी कंबल का निर्माण
Updated at : 30 Oct 2016 12:43 AM (IST)
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मांग अधिक इतनी की कंबल पड़ जा रहा कम चादर व सूत्री वस्त्रों का भी निर्माण 60 सूतकारों को मिल रहा रोजगार बिहारशरीफ : अब जिलेवासियों को जिले में निर्मित ऊनी वस्त्रों पहनने को मिल जाएगा. उन्हें बाहरी ऊनी वस्त्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एक से बढ़कर एक क्वालिटी के ऊनी वस्त्र अब आसानी […]
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मांग अधिक इतनी की कंबल पड़ जा रहा कम
चादर व सूत्री वस्त्रों का भी निर्माण
60 सूतकारों को मिल रहा रोजगार
बिहारशरीफ : अब जिलेवासियों को जिले में निर्मित ऊनी वस्त्रों पहनने को मिल जाएगा. उन्हें बाहरी ऊनी वस्त्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एक से बढ़कर एक क्वालिटी के ऊनी वस्त्र अब आसानी तरीके से उपलब्ध हो जाएंगे. यह वस्त्र जिले के अस्थावां प्रखंड के सर्वोदय आश्रम,बलवापुर पर निर्माण किया जा रहा है. इसकी मांग इतनी है कि मांग के अनुरूप इसकी पूर्ति नहीं हो पा रही है.
ट्रेंड बुनकर कर रहे वस्त्रों की बुनाई
इस आश्रम के द्वारा ऊनी वस्त्रों के साथ-साथ सूती चादर व सूती थान की बुनाई बुनकर कर रहे हैं. एक सितंबर से 20 सितंबर तक दलित व महादलित परिवारों की महिलाओं को सूत कटाई की ट्रेनिंग दी गयी है. ट्रेंड सूतकार आश्रम में ही दलित व महादलित परिवार की ट्रेंड महिलाएं त्रिपुरारि मॉडल चरखे से सूत की कटाई कर रही है. वहीं सात बुनकरों द्वारा रोजाना कपड़े की बुनाई की जा रही है. प्रतिदिन दस किलो रूई की कटाई सूतकार कर रहे हैं. आश्रम की ओर से उत्पादित सामानों की मांग नालंदा जिले के सरकारी कार्यालयों में कंबल,भागलपुर सूती ,कतरपुर में इन वस्त्रों की काफी मांग है.
पूर्वी चंपारण में वस्त्रों की मांग
राज्य के पूर्वी चंपारण से भी इसकी मांग है. पर मांग के अनुरूप उत्पादन नहीं होने के कारण बाहर नहीं भेजा जा रहा है.
बिहारशरीफ के विलासपुर में मिक्स सूत,ऊन,अस्थावां के नेजमपुरा कंबल का निर्माण किया जाता है.वहीं अस्थावां के श्रीचंदपुर में सूती थान व चादर बनायी जाती है. इन वस्त्रों की बिक्री बलवापुर,बिहारशरीफ व पटना के भूतनाथ रोड में सर्वोदय आश्रम की दुकानें संचालित हो रही हैं. सर्वोदय आश्रम के सचिव अरुण प्रसाद ने बताया कि खादी कमीशन,पटना द्वारा सर्वोदय आश्रम को मिलने वाली राशि समय पर नहीं मिलने से कार्य धीमी गति से चल रहा है.
14 चरखों से हो रही सूत की कताई
इस संस्था में पटना खादी ग्रामोद्योग की ओर से15 त्रिपुरारि शरण मॉडल चरखे उपलब्ध कराये गये थे जिसमें से 14 चरखों से सूत की कटाई हो रही है जबकि एक चरखे में खराबी आ गयी है. इस कार्य में 60 सूतकार लगे हैं. जिन्हें आसानी से रोजाना रोजगार मिल रहा है. लिहाजा उन्हें रोजगार के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ रहा है.
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