आस्था . विश्व शांति स्तूप की 47वीं वर्षगांठ पर कई देशों के बौद्ध भिक्षुओं ने लिया भाग

Updated at : 26 Oct 2016 4:02 AM (IST)
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आस्था .  विश्व शांति स्तूप की 47वीं वर्षगांठ पर कई देशों के बौद्ध भिक्षुओं ने लिया भाग

राजगीर के कण-कण में भगवान बुद्ध की प्रतिध्वनि सुनाई देती है : राज्यपाल राजगीर (नालंदा) : बुद्धम शरणम गच्छामी, संघम शरणम गच्छामी, धम्मं शरणम गच्छामी से मंगलवार को राजगीर की पंच पहाड़ियां गुंजायमान होती रही. मौका था. रत्नागिरि पर्वत की ऊंची चोटी पर अवस्थित विश्व शांति स्तूप की 47 वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह का. […]

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राजगीर के कण-कण में भगवान बुद्ध की प्रतिध्वनि सुनाई देती है : राज्यपाल

राजगीर (नालंदा) : बुद्धम शरणम गच्छामी, संघम शरणम गच्छामी, धम्मं शरणम गच्छामी से मंगलवार को राजगीर की पंच पहाड़ियां गुंजायमान होती रही. मौका था. रत्नागिरि पर्वत की ऊंची चोटी पर अवस्थित विश्व शांति स्तूप की 47 वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह का. इस समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोबिंद ने कहा कि नालंदा और गया जिले खास कर राजगीर के कण-कण में भगवान बुद्ध की प्रतिध्वनि सुनाई देती है.
उन्होंने कहा कि शांति के मार्ग पर चल कर ही देश दुनिया में दिनों-दिन बढ़ रहे अपराध को रोका जा सकता है. आज से 46 वर्ष पूर्व शांति के संदेश को जन-जन तक प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व शांति स्तूप की स्थापना जापान के निप्पोजन म्योहोजी के अध्यक्ष महास्थवीर भिक्षु निचिदात्सु फजिई गुरुजी ने इस स्थल पर करायी थी. इसके निर्माण में तत्कालीन राष्ट्रपति महोदय से लेकर महात्मा गांधी, मोरारजी देसाई, पंडित जवाहर लाल नेहरू आदि ने इनकी मदद की थी.
राजगीर की पावन स्थली ने पहली बार धर्म अध्यात्म और ज्ञान की ज्योति से सारे संसार को अवलोकित किया था. ईसा के करीब छह सौ साल पूर्व यहीं से भगवान बुद्ध ने सत्य, अहिंसा, करुणा, मैत्री, विश्व बंधुत्व और सहिष्णुता का संदेश दिया था. श्री कोविंद ने कहा कि राजगृह के प्रतापी सम्राट राजा बिंबिसार भी भगवान बुद्ध के शिष्य थे.
यहीं के गृद्धकूट पर्वत पर उन्होंने भगवान बुद्ध से बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी. बिंबिसार का पुत्र राजा अजातशत्रु भी बौद्ध धर्म को स्वीकार कर भगवान बुद्ध के शिष्य बने एवं बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया. उन्होंने कहा कि कलिंग युद्ध की त्रासदी को देख महान सम्राट अशोक का हृदय भाव-विह्वल हो गया और उन्होंने युद्ध विराम की घोषणा की.
तत्पश्चात उन्होंने भगवान बुद्ध के बताये रास्तों का अनुसरण करते हुए जन कल्याण एवं दीन-दुखियों की मदद के साथ बौद्ध धर्म को स्वीकार कर पूरे दुनिया में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया एवं प्रथम बौद्ध स्तूप का निर्माण भी सम्राट अशोक ने करवाया. सीजीसी ग्रुप ऑफ जापान के अध्यक्ष सुहिरो होरिउची ने कहा कि हमारा परिवार दो पीढ़ियों से राजगीर के विश्व शांति स्तूप से जुड़ा रहा है. उन्होंने जापान और भारत के सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि जापान और भारत का संबंध काफी गहरा है.
भारत से हमारा संबंध राजनीतिक तो है ही इनसे हमारा धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध भी है और इस संबंध में कई संभावनाओं की ओर इशारा करता है. इसके पूर्व मुख्य पुजारी एस सुगाई और देश दुनिया में से आये बौद्ध धर्मावलंबियों ने नाम म्यों हो रे गे क्यों के मूल मंत्र के साथ पूजा- अर्चना की. बौद्धिक रीति- रिवाज और मंत्रोच्चारण से राजगीर की पंच पहाड़ियां गुंजायमान होती रही. इस अवसर पर बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य मंत्री श्रवण कुमार, जिलाधिकारी डॉ त्याग राजन एसएम,
एसपी कुमार आशीष, एसडीओ लाल ज्योति नाश साहदेव, डीएसपी संजय कुमार, डीसीएलआर प्रभात कुमार, नगर प्रबंधक विनय रंजन सहित अन्य उपस्थित थे. मंच का संचालन करते हुए बौद्ध विहार सोसाइटी के सचिव महाश्वेता महारथी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, श्रीलंका के उच्च आयुक्त चित्रांगनी राजेश्वरी के संदेश को पढ़ कर सुनाया. बाजार समिति के गल्ला व्यवसायी के साथ मारपीट व लूटपाट, दो राउंड गोलीबारी
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