गढ़पुरा में बढ़ा डायरिया का प्रकोप

Updated at : 04 Oct 2016 5:05 AM (IST)
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गढ़पुरा में बढ़ा डायरिया का प्रकोप

गढ़पुरा पीएचसी में नहीं है समुचित व्यवस्था लोगों में दहशत गढ़पुरा : प्रखंड क्षेत्र में पीएचसी गढ़पुरा के अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में डायरिया अपना रौद्र रूप धारण कर रहा है. हर रोज दर्जनों मरीज परिजनों के साथ पीएचसी इलाज को पहुंच रहे हैं, लेकिन हॉस्पिटल पहुंचने पर उन्हें देखने वाला कोई नहीं मिल रहा है. […]

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गढ़पुरा पीएचसी में नहीं है समुचित व्यवस्था

लोगों में दहशत
गढ़पुरा : प्रखंड क्षेत्र में पीएचसी गढ़पुरा के अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में डायरिया अपना रौद्र रूप धारण कर रहा है. हर रोज दर्जनों मरीज परिजनों के साथ पीएचसी इलाज को पहुंच रहे हैं, लेकिन हॉस्पिटल पहुंचने पर उन्हें देखने वाला कोई नहीं मिल रहा है. आलम यह है कि लोग परेशान हो इधर-उधर प्राइवेट चिकित्सकों के यहां भटकने को मजबूर हो रहे हैं. जानकारी के अनुसार क्षेत्र की सोनमा पंचायत वार्ड 12 प्राणपुर गांव में पिछले एक माह से डायरिया अपना रौद्र रूप धारण किये हुए है.
दर्जन से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है . इसके बावजूद मरीजों के समुचित इलाज की व्यवस्था पीएचसी में नहीं हो पा रही है, न क्षेत्रों में जाकर की जा रही है .इसके अलावा भी कोरैय पंचायत आदि गांव में दर्जनों लोग डायरिया से परेशान हैं. बताते चलें कि शनिवार की रात प्राणपुर निवासी मो फूल हसन अपनी बहन के यहां मालीपुर पहुंचा था, जहां उन्हें उलटी-दस्त होते देख लोग पीएचसी ले गये, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
बताते चलें कि सोमवार सुबह पीएचसी निरीक्षण के दौरान भी उक्त गांव के आधा दर्जन मरीज इलाज को पहुंचे थे. मरीजों में नौ वर्षीया लगीना खातून , आठ वर्षीया खुर्शीदा खातून, 14 वर्षीय मो दानिश , आठ वर्षीया सीफत परवीन , तीन वर्षीया जीनत परवीन को उनके परिजन इलाज के लिए लेकर आये थे, जिनका बरामदे पर ही लेटा कर नर्स के द्वारा इलाज किया जा रहा था. इसके अलावा भी पीएचसी में जब निरीक्षण किया गया, तो पाया गया कि प्रसूता वार्ड में भी वही ढाक के तीन पात बाली बात नजर आयी.
सरकार के तमाम दावों के मुताबिक सूबे के समस्त प्राथमिक उपचार केंद्रों में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध कराये जाने के दावे की पोल खोल रहा है गढ़पुरा पीएचसी. प्रसव वार्ड में प्रसूता को जिस बेड पर सुलाया जाता है, उस बेड पर चादर तक नहीं होती. प्रसूता को जमीन पर भी लिटाया जाता है. इसका उदाहरण सोमवार की सुबह देखने को मिला, जब प्रसूता और बच्चा दोनों को बगैर बेड जमीन पर ही लेटा पाया गया. इतना ही नहीं पीएचसी में कई महीनों से एंबुलेंस सुविधा भी बंद है.
डॉक्टर की भी कमी है. इस संबंध में प्रभारी डॉ पवन कुमार ने बताया कि हमसे जो बनता है, वह सुविधा लोगों को दी जा रही है.
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