भागलपुर पुलिस की जांच में खुलासा
Updated at : 07 Sep 2016 4:41 AM (IST)
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जांच . झारखंड के जामताड़ा से जुड़ा नालंदा के साइबर अपराधियों का लिंक बिहारशरीफ : कतरीसराय थाना क्षेत्र को साइबर अपराधियों का गढ़ माना जाता है. अब इसमें नूरसराय थाना क्षेत्र का भी नाम जुड़ गया है. भागलपुर पुलिस की जांच में इसका खुलासा हुआ है. साइबर क्राइम का सबसे बड़ा अड्डा झारखंड के जामताड़ा […]
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जांच . झारखंड के जामताड़ा से जुड़ा नालंदा के साइबर अपराधियों का लिंक
बिहारशरीफ : कतरीसराय थाना क्षेत्र को साइबर अपराधियों का गढ़ माना जाता है. अब इसमें नूरसराय थाना क्षेत्र का भी नाम जुड़ गया है. भागलपुर पुलिस की जांच में इसका खुलासा हुआ है. साइबर क्राइम का सबसे बड़ा अड्डा झारखंड के जामताड़ा को माना जाता है. नालंदा के साइबर अपराधियों के लिंक जामताड़ा के साइबर अपराधियों से होने का भी खुलासा हुआ है. जामताड़ा गैंग एटीएम धारकों को फंसाने के लिए जिन सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं,
उनमें कुछ सिम कार्ड के ऑनर नालंदा के नूरसराय थाना क्षेत्र के हैं. भागलपुर पुलिस ने कुछ नंबरों की जांच की गई तो इसका खुलासा हुआ. मोबाइल नंबर 8298299675 की जांच की गई तो पता चला कि यह सिम कार्ड नूरसराय थाना के अजयपुर निवासी शिशुपाल कुमार के नाम से है. पुलिस जब उसके पत्ते पर उसे तलाश करने पहुंची तो न तो शिशुपाल मिला और नहीं वह रिटेलर मिला. जिसने यह नंबर दिया था.
इसके बाद कुछ और नंबर चेक किये गये तो सब के सब नूरसराय थाना क्षेत्र का ही निकला. बक्सरर के गोपाल नगर चकिया के रहने वाले बृजनंदन चौधरी का पत्नी के साथ ज्वाइंट एकाउंट एसबीआई की शाखा में है.
ठगों ने झांसा देकर अपने को मैनेजर बता कर उनकी पत्नी से एटीएम नंबर पूछ लिया था. इसके बाद उनके खाते से दस हजार रुपये उड़ा लिये. इसी प्रकार महाराष्ट्र के आर्मी मैन का उनकी पत्नी के साथ ज्वाइंट एकाउंट था. आर्मी मैन की पत्नी से ठगों ने एटीएम कार्ड का नंबर पूछ लिया. इसके बाद खाते से दस हजार रुपये की निकासी कर ली.
जामताड़ा गैंग एटीएम धारकों को फंसाने के लिए यूज कर रहे नालंदा के सिम
साइबर ठग इस्तेमाल कर हे हैं ई-वॉलेट: साइबर अपराधी फर्जीबाड़े को अंजाम देने के लिए ऑन लाइन ई-वॉलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ बड़े बैंक और निजी मोबाइल एप संचालक ऐसे ई-वॉलेट का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहकों को लुभा रहे हैं. इस ई-वॉलेट में दस हजार रुपये तक की राशि जा सकती है. साइबर गैंग इस सहूलियत का बेजा फायदा उठा रहे हैं. ई-वॉलेट प्रयोग करने के लिए केवल एटीएम नंबर एवं सीसीबी नंबर की जरूरत होती है.
साइबर ठग एटीएम धारकों को झांसा देकर अब पिन नंबर पूछने की जगह एटीएम नंबर और सीसीबी नंबर पूछ रहे हैं. जैसे ही यह नंबर मिल जाता है, वे अपने मन मुताबिक राशि को ई-वॉलेट में ट्रांसफर कर लेते हैं. इसके बाद उक्त राशि का इस्तेमाल शॉपिंग, रिचार्ज, मनी ट्रांसफर, होटल बुकिंग आदि में कर पैसा खर्च कर देते हैं.
क्या है ई-वॉलेट:-
जिस तरह से बैंक आपके पैसे को डेबिट कार्ड के जरिये खर्च करने की सहूलियत देता है, ठीक वैसे ही कुछ पेमेंट सर्विसेज मोबाइल एप या कंप्यूटर के जरिये पेमेंट की सुविधा देते है.
यह सुविधा ई-वॉलेट के जरिये दी जाती है. ई-वॉलेट में एक निश्िचत रकम रखी जा सकती है. जिसके जरिये जरूरत पड़ने पर पेमेंट किया जा सकता है.
पेमेंट करते वक्त आपको कार्ड डिटेल भरनी की जरूरत नहीं पड़ती है. सब कुछ एक क्लिक में हो जाता है. किसी ऑन लाइन शॉपिंग साइट या लिमिट सेल ऑफर, रेल या फ्लाइट टिकट बुक करते वक्त सतेजी से पेमेंट करने की जरूरत पड़ती है. वरना आप इस ऑफर या टिकट से वंचित हो सकते हैं. ऐसे में एक क्लिक से पेमेंट करने पर आप कार्ड से पेमेंट करने वालों से बाजी मार जाते हैं.
ई-वॉलेट तीन तरह के होते हैं:-
क्लोज्ड ई-वॉलेट:- इस तरह के ई-वॉलेट अक्सर ई कॉमर्स साइट्स या रेलवे जैसी सर्विस साइट्स में होते हैं. इसमें पैसे रखे जा सकते हैं. लेकिन इनका इस्तेमाल सिंह इन साइट्स पर खरीदारी करने में ही किया जा सकता है.
सेमी क्लोज्ड ई-वॉलेट:- इनके जरिये हर प्लेटफॉर्म पर पेमेंट किया जा सकता है और आरबीआई द्वारा एक निित रकम इनमें रखी जा सकती है. इनमें से कैश नहीं निकाला जा सकता है, पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं.
ओपन ई-वॉलेट या बैकिंग वॉलेट:- ये ई-वॉलेट बैंकों के होते हैं. ये आपके एकाउंट को ही एक वॉलेट की शक्ल दे सकते हैं, जो पैसा एकाउंट में होगा वहीं वॉलेट में मौजूद रहेगा. इसमें स्वाभाविक तरीके से एटीएम से पैसा विड्रॉल करने की भी सुविधा रहती है.
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