मछली पालन कर बच्चों को संवार रही जिंदगी

Updated at : 01 Aug 2016 6:17 AM (IST)
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मछली पालन कर बच्चों को संवार रही जिंदगी

बिहारशरीफ : मछली हर कार्य में अमूमन तौर पर शुभ माना गया है. माना जाता है कि अगर कोई कार्य करने के दौरान यदि मछली पर नजर पड़ जाय तो वह काम सफल ही हो जाता है. एक महिला कृषक मछली पालन कर जीविकापार्जन तो कर ही रही हैं. साथ ही अपने बाल-बच्चों को जिंदगी […]

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बिहारशरीफ : मछली हर कार्य में अमूमन तौर पर शुभ माना गया है. माना जाता है कि अगर कोई कार्य करने के दौरान यदि मछली पर नजर पड़ जाय तो वह काम सफल ही हो जाता है. एक महिला कृषक मछली पालन कर जीविकापार्जन तो कर ही रही हैं. साथ ही अपने बाल-बच्चों को जिंदगी भी संवारने में लगी है. इस व्यवसाय अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देने का काम कर रही हैं. उच्च शिक्षा दिलाकर बच्चों को मुकाम दिलाने की कोशिश में है. महिला कृषक की इच्छा है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर उच्च ओहदे दिलाने की.

जिले के बिन्द प्रखंड की ताजनीपुर पंचायत के मिर्जापुर गांव की मंजु देवी जो खुद तो आठवीं क्लास ही पास है. लेकिन वह अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का दृढ़ संकल्प लिया है. इस पढ़ाई के खर्च वहन करने में पूर्वी भारत हरित क्रांति योजना मददगार साबित हो रही है.

यह योजना मंजु की जिंदगी में एक तरह से परिवर्तन ला दी है. इस योजना से जुड़कर आठवीं पास मंजु ने जिला भूमि संरक्षण विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रम के तहत तालाब का निर्माण अपने गांव में दो साल पहले कराया.दस कटटे जमीन में तालाब का निर्माण किया है. तालाब निर्माण में विभाग की ओर से पचास फीसदी अनुदान दिया गया था. इस तालाब में कई प्रजातियों की मछलियां पालन करने में लगी हैं. रेहु से लेकर कतला आदि प्रजाति की मछलियां पाल रखी है.

मंजु बताती हैं कि एक बार मछली पालन में करीब 25 से 30 हजार की पूंजी लगती है. मछली तैयार होने में चार से पांच माह का समय लग जाता है. मेहनत की मुताबिक आमदनी भी हो जाती है. इसी आमदनी से अपने बाल बच्चों को शिक्षा दीक्षा देने का काम करती हैं.

वह बताती हैं कि उनकी बेटी हैदराबाद में नर्सिग में नर्सिग टीचर की पढ़ाई करने में लगी हैं. साथ ही बच्चे स्नातक विज्ञान की पढ़ाई अपने ही जिले में कर रहे हैं. मंजु की उम्मीद है कि उनके बच्चे पढ़कर लिखकर अपने व परिवार का नाम रौशन करेंगे.

लोकल स्तर पर ही मछली की होती बिक्री

तालाब में मछली तैयार होने के बाद उसे बिक्री करने के लिए मार्केट का सहारा नहीं लेना पड़ रहा है. बल्कि उत्पादित मछलियां खरीदने के लिए तालाब पर ही पैकार पहुंच जाते हैं. इस तरह उत्पादित मछलियों की बिक्री भी सुलभ तरीके से हो जाती हैं.क्षेत्र में लोकल मछलियों की डिमांड भी अधिक है. तालाब में पल रहीं मछलियों को समय-समय पर पौष्टिक आहार भी देती हैं. ताकी मछली का उत्पादन अच्छी तरह से हो सके. इसके जीरा बिहारशरीफ से ही लाकर तालाब में डालते हैं. जीरा उच्च क्वालिटी की होती है. हर रोज समय पर मछलियों के लिए चारा डालती हैं. मछली पालन करने में काफी आनंद की अनुभूति होती है. वैसे भी मछली हर तरह से शुभ माना गया है.

इस संबंध में जिला संरक्षण के प्रधान सहायक अमित कुमार ने बताया कि किसानों के उत्थान के लिए विभाग की ओर से दो योजनाएं संचालित हो रही हैं. जिसमें से पूर्वी भारत हरित क्रांति योजना व राष्ट्रीय सम विकास योजना शामिल हैं. इन योजनाओं के तहत किसानों को तालाब निर्माण के लिए अनुदान उपलब्ध कराये जाते हैं. इन योजनाओं से जिले के किसान लाभांवित हो रहे हैं. कई महिला कृषक इन योजनाओं से जुड़कर भी लाभ उठा रही हैं.

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