बंदूक के बल पर शांति के प्रयास में जुटा है चीन - दलाई लामा

By Prabhat Khabar Digital Desk
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बोधगया (गया) : 14वें दलाई लामा ने महात्मा बुद्ध की ज्ञानस्थली महाबोधि मंदिर से विश्व बिरादरी को करुणा का मार्ग दिखाते हुए चीन को भी शांति की सीख दी है. बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने यहां बुद्ध के समक्ष दंडवत कर पूजा-अर्चना की और दुनिया के लोगों के लिए सुख और शांति की कामना की.

उन्होंने कहा कि चीन पारंपरिक रूप से बौद्ध धर्म मानने वाला देश है. आज बौद्ध धर्म मानने वालों की सबसे ज्यादा आबादी चीन में बसती है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से ही बुद्ध के अनुयायी रहा बड़ी आबादी वाला देश चीन भी अब गन के बल पर शांति की कोशिश में जुटा है, जबकि हम शांति व विश्वास पर भरोसा करनेवाले लोग हैं.
यह लंबा जरूर है, पर दीर्घकालिक रूप से सही है. दलाई लामा ने कहा कि नालंदा में नागार्जुन सहित अन्य कई बौद्ध विद्वानों ने बौद्ध अध्ययन के साथ ही मनोविज्ञान, भौतिकी व अन्य विषयों की शिक्षा दी है. इस कारण नालंदा को प्राचीन शैक्षणिक संस्थान के रूप में देखने की जरूरत है.
मानवीय मूल्यों को तवज्जो देने की अपील
धर्म के आधार पर हिंसा की निंदा करते हुए दलाई लामा ने कहा कि मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए करुणा व सहिष्णुता के साथ ही विश्व बिरादरी को शांति व
सुकून मिल सकती है. इससे ही िवश्व का कल्याण होगा. बौद्ध धर्मगुरु ने कहा कि विश्व में सहिष्णुता का बड़ा व प्रत्यक्ष उदाहरण भारत है, जहां वर्षों से एक साथ कई धर्मों की बड़ी आबादी रहती आ रही हैं. दलाई लामा ने भारत में भी आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारत की प्राचीन संस्कृति व संस्कार की जानकारी ताजा करने वाली शिक्षा के समावेश पर बल दिया.
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