फर्जी उपस्थिति बना कर निकाले रुपये

Updated at : 06 Jun 2018 4:35 AM (IST)
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फर्जी उपस्थिति बना कर निकाले रुपये

एक माह में नगर निगम को दो लाख रुपये की हुई बचत 550 सफाईकर्मियों के मानदेय पर 38 की जगह अब खर्च हो रहे 36 लाख बिहारशरीफ : फर्जी तरीके से उपस्थिति बना कर सरकारी राशि का घोटाला किया जा रहा था़ इसका खुलासा बायोमैट्रिक मशीन से उपस्थिति बनने के बाद हुआ. मामला नगर निगम […]

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एक माह में नगर निगम को दो लाख रुपये की हुई बचत

550 सफाईकर्मियों के मानदेय पर 38 की जगह अब खर्च हो रहे 36 लाख
बिहारशरीफ : फर्जी तरीके से उपस्थिति बना कर सरकारी राशि का घोटाला किया जा रहा था़ इसका खुलासा बायोमैट्रिक मशीन से उपस्थिति बनने के बाद हुआ. मामला नगर निगम से जुड़ा हुआ है. नगर निगम में पिछले माह में बायोमैट्रिक मशीन लगायी गयी है. मशीन में दर्ज उपस्थिति के आधार पर मई माह का भुगतान किये जाने पर नगर निगम को दो लाख रुपये की बचत हुई है. 550 सफाईकर्मियों के मानदेय के लिए पहले करीब 38 लाख रुपये भुगतान करना पड़ता था. बॉयोमैट्रिक मशीन से बनी उपस्थिति के आधार पर मई में उतने ही कर्मचारियों के मानदेय के लिए 36 लाख रुपये का भुगतान किया गया. इससे साफ है कि वर्षों से फर्जी उपस्थिति दिखाकर हर माह लाखों रुपये का बंदरवाट जा रहा था. इस तरह के कार्यों में कर्मियों की मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता है.
हर वार्ड में पांच से छह कर्मियों की तैनाती है. खास बात यह है कि कर्मी व स्थानीय पार्षद के द्वारा उपस्थिति पर अनुशंसा के बाद ही मानदेय भुगतान का प्रावधान है. नगर आयुक्त सौरभ जोरवाल ने बताया कि बायोमैट्रिक के कारण निगम को पिछले माह में दो लाख रुपये कम भुगतान करने पड़े हैं. इससे पहले मैनुअल उपस्थिति सफाईकर्मी का बनता था. इसमें शिकायत मिलती रहती थी कि समय पर कर्मी नहीं आते हैं. इसमें सुधार करने के लिए मशीन का सहारा लेना पड़ा. इसके लिए सभी कर्मी का अंगूठे का निशान लेकर बायोमैट्रिक में दर्ज करायी गयी. नगर निगम को स्टाफ से लेकर तेल भुगतान पर हर महीने करीब एक करोड़ से अधिक रुपये भुगतान करना पड़ता है.
वाहनों में जीपीएस लगाने से रुकी तेल की चोरी : इसी तरह नगर निगम के वाहनों में जीपीएस लगाये जाने से तेल की चोरी पकड़ी गयी. पूर्व के नगर आयुक्त कौशल कुमार के समय में वाहनों में जीपीएस लगाये जाने से तेल की चोरी पकड़ी गयी थी. तेल के लिए भुगतान की जानेवाली राशि में कमी आयी थी. यह अपनाये जाने से भी निगम को हर महीने में लाखों रुपये की बचत होने लगी है.
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