16 मिलरों पर सर्टिफिकेट केस

Updated at : 12 Nov 2017 6:55 AM (IST)
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16 मिलरों पर सर्टिफिकेट केस

बिहारशरीफ : बकायेदार मिलरों से रुपये रिकवरी करने में प्रशासन का दम फूल रहा है. बकायेदार मिलर सरकार का करीब 40 करोड़ रुपये से अधिक का चावल गटके है. ऐसे मिलरों पर नीलाम पत्र से लेकर एफआईआर तक की जा चुकी है. जिले के सोलह मिलरों पर तो सर्टिफिकेट केस चल रहा है. जबकि 35 […]

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बिहारशरीफ : बकायेदार मिलरों से रुपये रिकवरी करने में प्रशासन का दम फूल रहा है. बकायेदार मिलर सरकार का करीब 40 करोड़ रुपये से अधिक का चावल गटके है. ऐसे मिलरों पर नीलाम पत्र से लेकर एफआईआर तक की जा चुकी है. जिले के सोलह मिलरों पर तो सर्टिफिकेट केस चल रहा है.

जबकि 35 मिलरों पर अब तक एफआईआर की जा चुकी हैं. कार्रवाई की जद में आने वाले कई मिलर तो 2012 से ही रकम हड़पे हैं. और तो और इन मिलरों का साथ देने के आरोप अनाज गोदाम प्रभारी पर लग चुके हैं. इससे पहले के जिला खाद्य निगम के मैनेजर पर एफआईआर भी हो चुकी है. इन पर गंभीर आरोप लगे है. कार्रवाई की जद में बिहारशरीफ के अनाज गोदाम प्रभारी सह बीएओ भी आ चुके है. सदर एसडीओ सुधीर कुमार के द्वारा गोदाम के चावल जांच के क्रम में कार्रवाई की गयी है.
अनाज गोदाम प्रबंधक को सस्पेंड करने की अनुशंसा एसडीओ के द्वारा की गयी है. वही घटिया चावल देने वाले थरथरी के मिलर पर थाने में एफआईआर करायी गयी है. डीएम के आदेश पर इन दिनों चावल की क्वालिटी की जांच की जा रही है. घटिया चावल देने वाले मिलरों को मौका दिया गया था कि उक्त चावल को बदलकर बढ़िया चावल गोदामों में जमा करावें.
जब जागा तब सवेरा वाली बात प्रशासन पर लागू हो रहा है. बकायेदार मिलर से पैसा वसूल करने में प्रशासन का तो दम फुल ही रहा था. ऐसे में अब घटिया चावल देने वाले मिलर भी जिले का नाम बदनाम कर रहे है. बकायेदार मिलरों पर रकम बकाया पुरानी बात हो गयी है. नयी बात यह सामने आयी है कि नालंदा से जो चावल दूसरे जिले में भेजा गया उसकी गुणवत्ता एकदम से खराब है. वह खाने योग्य नहीं है. इसकी जानकारी जब जिला प्रशासन को मिली तो चावल की जांच करनी शुरू की.
जांच के क्रम में घटिया चावल देने वाले मिलरों को एक मौका दिया गया था कि घटिया चावल के स्थान पर गुणवत्ता वाले चावल गोदामों में जमा करायें. लेकिन कई मिलरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है. नालंदा से सिवान,गोपालगंज, कैमूर चावल भेजा जा चुका है. कुछ दिन आपूर्ति की बैठक में भी आदेश दिया गया था कि चावल की गुणवत्ता की जांच करें
. घटिया चावल देने वाले मिलरों पर कार्रवाई करें. आदेश के बाद अधिकारियों के द्वारा चावल की जांच की जा रही है. राइस मिलों के चावल की जांच से मिलरों में हड़कंप मचा है. चावल सही नहीं देने वाले मिलरों पर कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी गयी है. जिले के करीब 52 मिलरों को अनुबंधित किया गया था. इसमें से कई मिलरों द्वारा टूटा हुआ चावल दे दिया गया है. अफसरों को भी चेतावनी दी गयी है कि गुणवत्ता देखकर ही चावल जमा लें.
चावल जमा लेने की अवधि जुलाई में ही समाप्त
इस साल के जुलाई में ही चावल जमा लेने का समय सीमा समाप्त हो गया था. जब जुलाई में मिलर चावल जमा कर रहे थे उस समय गुणवत्ता देखकर चावल क्यों नहीं जमा ली गयी. उस समय संबंधित कर्मी व अफसरों का ध्यान क्यों नहीं इस पर गया. वित्तीय साल 2016-17 में डेढ़ लाख टन धान की अधिप्राप्ति की गयी थी.
दो मिलरों पर अपराध इकाई में चल रहा मामला
जिले के दो मिलरों पर आर्थिक अपराध इकाई में मामला चल रहा है. कई मिलरों पर तो पांच से दस करोड़ रुपये का बकाया है. 2012 से ही मिलरों पर 40 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. कई ने तो कोर्ट की शरण ले ली है. चर्चा यहां तक कि एक मिलर जो आवासीय पता दिया है वह भी गलत है.
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