मुखिया-सरपंच को हथियार लाइसेंस के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, सरकार ने तय की 60 दिन की डेडलाइन

सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: बिहार सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के लिए आर्म्स लाइसेंस की प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में अहम कदम उठाया है. गृह विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि मुखिया, सरपंच समेत पंचायत प्रतिनिधियों के हथियार लाइसेंस आवेदन का निपटारा 60 दिनों के भीतर किया जाए.
Bihar News: बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर नीतीश सरकार ने एक बेहद अहम और कड़ा कदम उठाया है. अब राज्य के मुखिया, सरपंच और अन्य त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को हथियार के लाइसेंस के लिए महीनों तक दफ्तरों की धूल नहीं फांकनी होगी.
गृह विभाग ने इस प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को सख्त समय सीमा में बांध दिया है. लंबे समय से पंचायत प्रतिनिधि अपनी सुरक्षा के लिए इसकी मांग कर रहे थे.
60 दिनों का ‘अल्टीमेटम’
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अब किसी भी पंचायत प्रतिनिधि के आर्म्स लाइसेंस आवेदन पर निर्णय लेने के लिए अधिकतम 60 दिनों का समय तय किया गया है.
थाना प्रभारी के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे पत्र मिलने के 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट भेजें. पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद अगले 60 दिनों के भीतर डीएम को उस आवेदन पर अंतिम निर्णय लेते हुए उसे जारी करना होगा.
रिपोर्ट कार्ड की होगी समीक्षा
लाइसेंस की प्रक्रिया की मॉनिटरिंग अब सीधे राज्य स्तर पर की जाएगी. सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे हर महीने की 7 तारीख तक गृह विभाग को यह जानकारी उपलब्ध कराएं कि उनके जिले में कितने जनप्रतिनिधियों ने आवेदन किया और कितनों का निपटारा समय सीमा के भीतर हुआ.
इस मासिक समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि की सुरक्षा का मामला प्रशासनिक लापरवाही या फाइलों के फेर में न फंसे.
सुरक्षा की चिंता और सरकार की सक्रियता
बिहार में बीते कुछ समय में पंचायत प्रतिनिधियों पर हुए हमलों की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी. जनप्रतिनिधि अक्सर यह शिकायत करते थे कि खतरा होने के बावजूद उन्हें अपनी आत्मरक्षा के लिए हथियार का लाइसेंस मिलने में काफी देरी होती है.
सरकार की इस पहल से जहां जनप्रतिनिधियों का मनोबल बढ़ेगा, वहीं ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले इन प्रतिनिधियों को सुरक्षित माहौल मिलने की उम्मीद भी जगी है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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