कई प्रदेशों के श्रद्धालुओं का हो रहा आगमन

Updated at : 25 Oct 2017 4:35 AM (IST)
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कई प्रदेशों के श्रद्धालुओं का हो रहा आगमन

बिहारशरीफ : सूर्योपासना के प्रमुख केंद्र के रूप में विख्यात जिले का बड़गांव सूर्यपीठ छठव्रतियों तथा श्रद्धालुओं से गुलजार हो रहा है. सूर्य तालाब के चारों तरफ दूर-दूर तक प्लास्टिक तथा साड़ियों से बने अस्थाई तंबुओं का गांव बस गया है. दूसरे जिलों तथा दूसरे प्रदेशों से आने वाले सैकड़ों श्रद्धालु इन्हीं तंबुओं में सपरिवार […]

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बिहारशरीफ : सूर्योपासना के प्रमुख केंद्र के रूप में विख्यात जिले का बड़गांव सूर्यपीठ छठव्रतियों तथा श्रद्धालुओं से गुलजार हो रहा है. सूर्य तालाब के चारों तरफ दूर-दूर तक प्लास्टिक तथा साड़ियों से बने अस्थाई तंबुओं का गांव बस गया है.

दूसरे जिलों तथा दूसरे प्रदेशों से आने वाले सैकड़ों श्रद्धालु इन्हीं तंबुओं में सपरिवार 5-6 दिनों तक रहकर सूर्य देव तथा छठी माता की पूजा-अर्चना संपन्न करेंगे. सैंकड़ों की संख्या में बने इन तम्बुओं में 5 से 10 की संख्या में स्त्री-पुरूष तथा बच्चे घास-फूस पर विस्तर लगाकर अपनी रातें काटते हैं. सुबह इसी सूर्य तालाब में पूजा-अर्चना तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं. बाहर से आने वाले छठ व्रतियों में झारखंड, बंगाल तथा उड़ीसा के भी श्रद्धालु सूर्यपीठ में आये हुए है.

हालांकि छठव्रतियों में सर्वाधिक संख्या जमुई, पटना, नवादा, बांका, बक्सर, शेखपुरा आदि जिलों की है. इक्के-दुक्के लोग दूसरे जिलों से भी अपने रिश्तेदारों के साथ छठव्रत करने के लिए आए हैं. पूरे बड़गांव क्षेत्र का दृश्य अभी से ही मेले में तब्दील हो चुका है. कई लोग पूर्व से ही गांव के विभिन्न मकानों में किराये पर कमरे ले रखे थे.

वे सभी अपने-अपने साजो-सामान के साथ बड़गांव पहुंच रहे हैं. ग्रामीण परिवेश होने के कारण तथा कमरों का किराया महंगा होने के कारण बड़ी संख्या में लोग कपड़ों तथा प्लास्टिक के तंबुओं में ही रहकर छठव्रत संपन्न करते हैं. तंबुओं में कम सुविधाओं के बावजूद लोगों का उत्साह परवान पर है. हर किसी की बस एक ही चिंता है कि अच्छी तरह से पर्व पार लग जाए. छठव्रतियों की आस्था भी कष्टों से डगमगाने वाला नहीं है.

मन्नतें लेकर आते हैं श्रद्धालु :
राज्य के विभिन्न जिलों तथा दूसरे राज्यों के बड़ी संख्या में लोग यहां छठव्रत के मौके पर अपनी मन्नतें लेकर आते हैं. श्रद्धालु अपनी मन्नतें रखने के लिए यहां रहकर छठव्रत करते हैं तथा मन्नतें पूरी होने पर भी लगातार कई वर्षों तक श्रद्धालु यहां आकर छठव्रत करना नहीं भूलते हैं. एक प्रकार से श्रद्धालुओं की कई पीढ़ियां यहां से जुड़ी है.
कोई सन्तान प्राप्ति की कामना से तो काई धन तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना से यहां छठ करने आते है. कई रोग सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना तथा तालाब में स्नान करने से ठीक हो जाता है. यहां तक कि सूर्य देव की कृपा से कुष्ठ जैसी भयानक व्याधि भी ठीक हो जाती है. संतान प्राप्ति होने पर श्रद्धालु यहां आकर छठव्रत के साथ-साथ बच्चों को मुंडन संस्कार भी कराते है. मनोकामनाऐं पूर्ण होने के साथ-साथ लोगों की आस्था और दृढ़ हो जाती है.
बड़गांव क्षेत्र में सुविधाओं का टोंटा:
छठपर्व जैसे महत्वपूर्ण मौके पर भी बड़गांव क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का भारी अभाव देखा जाता है. महीनों से बंद पड़े चापाकलों को छठ के मौके पर चालू करा दिया जाता है,
लेकिन उससे पीने लायक पानी नहीं गिरता है. श्रद्धालू बताते हैं कि जहां-तहां जलापूर्ति नल भी लगे हैं लेकिन इनसे भी पानी नहीं निकलता है. इसी प्रकार शाम ढलते ही इस क्षेत्र में अंधेरा छा जाता है. तालाब के किनारे लगे गिनती के बल्बों को रोशनी श्रद्धालुओं के तम्बुओं तक नहीं पहुंच पाती है. श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए भी जहां-तहां लोगों को नाजायज राशि देनी पड़ती है. आस-पास में रहने वाले लोग तालाब क्षेत्र की भूमि में भी तम्बू जोड़ने के पैसे लेते हैं.
पर्व पर श्रद्धालुओं ने बताया
हमलोग कई वर्षों से यहां छठव्रत करने आते हैं. कठिनाईयां तो होती ही है, लेकिन भगवान सूर्य देव तथा छठी मैया सब पार लगा देते हैं.
मेघनी देवी, छठव्रती, दानापुर, पटना
सूर्यमंदिर तालाब क्षेत्र में प्रशासन द्वारा ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. हमलोग पहनने वाली साड़ियों से ही खुंटे गाड़कर तम्बू बनाये हैं.
कुसुम देवी, छठव्रती, दिल्ली
तालाब के किनारे भी तम्बू लगाने की जगह नहीं मिल रही है. दूर-दराज में खेतों में तम्बू लगाकर बाल-बच्चों के साथ रहने में भय लगता है.
लालमुनि देवी, छठव्रती, कोलकाता
बड़गांव की महत्ता सुनकर अपने रिश्तेदारों के साथ उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद से आई हूं. इस वर्ष छठव्रत में भाग लेकर मन्नत रखुंगी.
शांति देवी, श्रद्धालु, उत्तरप्रदेश
बड़गांव छठपूजा के प्रति लोगों की भारी आस्था है. यहां श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुविधा नहीं मिलने से छठव्रतियों के कष्ठ और बढ़ जाते है.
प्रमिला देवी, छठव्रती, जमुई
मेरी मनोकामना सूर्य देव की कृपा से पूरी हो गई है. मैं तीन वर्षों से यहां छठ पूजा कर रही हूं. पहले रिश्तेदारों के साथ यहां आती थी.
मानो देवी, छठव्रती, जमुई
यहां से कोई निराश नहीं लौटता है. मैं भी सूर्य देव से मन्नत मांगी थी. मन्नत पूरी होने पर मैं पांच साल से यहां छठ करने आ रही हूं.
शांति देवी, छठव्रती, जमुई
यहां छठव्रतियों के लिए सुविधाओं में कुछ सुधार अवश्य हुआ है, लेकिन पीने का पानी तथा रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए.
नीरज देवी, छठव्रती, नवादा
भगवान सूर्य देव की कृपा से सभी मनोकामनाऐं पूर्ण हुई है. आगे भी उनकी कृपा से सब ठीक रहे. इसीलिए विगत छ: वर्षों से यहां छठव्रत करने आती हूं.
-साधना सिंह, छठव्रती, आसनसोल
बड़गांव सूर्यमंदिर की ख्याति सुनकर यहां पहली बार छठव्रत करने आयी हूं. मनोकामना पूर्ण होने पर आगे भी यहां छठव्रत करना जारी रखूंगी.
-शकुन्तला देवी, छठव्रती, झारखंड
मैं यहां चार साल से आकर छठव्रत कर रही हूं. सूर्य देव की कृपा से सपरिवार खुशहाल है. आगे भी छठव्रत में यहां आते रहूंगी.
– गणेशी देवी, छठव्रती, सूर्यगढ़ा
मेरी मनोकामना पूरी हुई है. हम अपने बच्चों को लेकर यहां मुंडन कराने के लिए आई हूं. छठ व्रत भी जारी रखुंगी.
– किरण देवी, छठव्रती, बक्सर,डुमरांव
पहले माताजी यहां आकर छठव्रत करती थी. अब मै स्वयं यहां सपरिवार आकार छठव्रत कर रहा हूं. हम सपिरवार खुश हैं.
– मुन्ना गुप्ता, छठव्रती, बक्सर
जिला प्रशासन तथा स्थानीय प्रतिनिधियों को सुविधाओं में विस्तार करना चाहिए. साफ पानी, बैंक तथा मोबाईल चार्ज आदि की सुविधा भी मिले.
– विजय कुमार राउत, छठव्रती ,बांका
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