पर्चा मिलने के 26 साल बाद भी नहीं मिला दखल-कब्जा

नालंदा : अनुसूचित जाति के 30 भूमिहीनों को 26 साल पहले वासगीत पर्चा दिया गया था. पर्चा देने के 26 साल बाद भी आवंटित भूमि की सरकार द्वारा न तो नापी करायी गयी है और न ही उस पर दखल कब्जा दिलाया गया है. अधिकारियों के दफ्तर आते-जाते पर्चाधारी परेशान हैं. फिर भी उनकी सुध […]
नालंदा : अनुसूचित जाति के 30 भूमिहीनों को 26 साल पहले वासगीत पर्चा दिया गया था. पर्चा देने के 26 साल बाद भी आवंटित भूमि की सरकार द्वारा न तो नापी करायी गयी है और न ही उस पर दखल कब्जा दिलाया गया है. अधिकारियों के दफ्तर आते-जाते पर्चाधारी परेशान हैं. फिर भी उनकी सुध कोई नहीं ले रहा है. यह मामला राजगीर अनुमंडलीय कार्यालय के पास साइड पर का है. राजगीर के अंचलाधिकारी द्वारा वित्तीय वर्ष 1991-92 में गृह स्थल अभिलेख संख्या एक द्वारा यह पर्चा दिया गया है.
राजगीर प्रखंड के मौजा-पंडितपुर, थाना संख्या 475, खाता संख्या-186, खसरा संख्या 924 पर कुल 30 भूमिहीन महादलितों को प्रति व्यक्ति 2.42 डिसमिल जमीन आवंटित किया गया था. यह पर्चा गृह स्थल योजना के तहत दी गयी है. अंचल अभिलेख के अनुसार इसी प्लॉट पर वर्ष 1957-58 में हरिजन कॉलोनी बनाकर 24 परिवार को बसाया गया था. पुन: उसी प्लॉट के उपलब्ध जमीन पर अनुसूचित जाति (रजवार) के 30 परिवारों को बसाने के लिए बासगीत पर्चा दिया गया था.
सीपीएम के राज्य कमेटी सदस्य परेश्वर प्रसाद ने बताया कि भूमिहीन 30 अनुसूचित जाति (रजवार) परिवार को बासगीत पर्चा दिया है. पर्चा मिलने के समय लाभार्थियों में काफी खुशी थी कि उन्हें सिर छिपाने की जगह मिल गयी, लेकिन दुर्भाग्य है कि पर्चा देने के 26 साल बाद भी उन लोगों को आवंटित जमीन की नापी नहीं करायी गयी है और न ही जमीन पर दखल कब्जा दिलाया गया है. स्थानीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी, नालंदा, प्रमंडलीय आयुक्त पटना और प्रधान सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को ज्ञापन भेजकर पर्चाधारियों ने आवंटित भूमि पर दखल कब्जा दिलाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि पर्चाधारकों को शीघ्र दखल कब्जा नहीं दिलाया गया, तो संबंधित परिवार आंदोलन के लिए मजबूर होंगे.
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