नालंदा में सैलानियों को बुनियादी सुविधाएं नदारद

Updated at : 28 Jul 2017 4:12 AM (IST)
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नालंदा में सैलानियों को बुनियादी सुविधाएं नदारद

नालंदा : विश्व विख्यात नालंदा में सैलानियों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात तो दूर सामान्य सुविधाएं भी मयस्कर नहीं है. दुनिया में जितनी ऊंची इसकी पहचान है, उससे अधिक उपेक्षा हो रही है. यह विकास से काफी दूर है. आजादी के सात दशक बाद भी नालंदा में पर्यटकीय सुविधाएं बहाल करने के लिए […]

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नालंदा : विश्व विख्यात नालंदा में सैलानियों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात तो दूर सामान्य सुविधाएं भी मयस्कर नहीं है. दुनिया में जितनी ऊंची इसकी पहचान है, उससे अधिक उपेक्षा हो रही है. यह विकास से काफी दूर है. आजादी के सात दशक बाद भी नालंदा में पर्यटकीय सुविधाएं बहाल करने के लिए सरकार की ओर से कुछ भी पहल नहीं किया गया है. एशिया समेत पूरी दुनिया के सैलानी भ्रमण के लिए नालंदा आते हैं, लेकिन यहां विश्राम के लिए एक होटल, सार्वजनिक शौचालय तक नहीं है.

यहां बड़े पार्क की बात तो दूर छोटा पार्क तक नसीब नहीं है. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के आसपास सफाई की उत्तम व्यवस्था नहीं है. नालंदा में देखने या भ्रमण के लिए केवल प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय, पुरातत्व संग्रहालय और हृवेनसांग मेमोरियल हॉल है. सरकार की इतनी उपेक्षा के बावजूद यूनेस्को ने नालंदा विश्वविद्यालय के इस भग्नावेष को विश्व धरोहर का दर्जा दिया है. विश्व बैंक की तीन सदस्यीय दल ने नालंदा में विकास की संभावनाओं को लेकर अध्ययन व सर्वेक्षण किया.

भ्रमण के दौरान विश्व बैंक की टीम को यह जान कर निराशा हुई कि दुनिया में विशेष पहचान रखने वाला नालंदा में विकास के लिए अबतक कुछ नहीं किया गया है. मालूम हो कि विश्व बैंक बौद्ध सर्किट में समेकित पर्यटन विकास के लिए केंद्र सरकार को वित्त संपोषित करता है. जेनीसीस के निदेशक और विश्व बैंक के कंसल्टेंसी अर्थशास्त्री रवि बंकर ने कहा कि नालंदा पर्यटन विकास की असीम संभावनाओं से भरा है. उनका मानना है कि होटल, मोटल और सार्वजनिक शौचालय तो जरूरी है ही इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतीकरण, व्याख्यान केंद्र, इंटरनेशल इंटरप्रटेशन सेंटर की भी आवश्यक है. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार के पुर्न संरचना की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि धरोहर के आस पास के फुटपाथ दुकानदारों के लिए अलग से सुव्यवस्थित वेंडर जोन का निर्माण होना चाहिए. नालंदा परंपरा को पुर्नजीवित करने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि चीन ने विश्वविद्यालय नालंदा परंपरा विभाग खोलकर पढ़ाई कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि जिस नालंदा परंपरा को शिकागो में पढ़ाया जा रहा है. वह अपनी धरती पर उपेक्षित है. नवनालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय के अंगरेजी विभागाध्यक्ष डाॅ श्रीकांत सिंह ने चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग और ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल के बारे में विस्तार से बताया.

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