पीएचसी प्रभारियों को दिया टास्क

Updated at : 23 Jul 2017 3:33 AM (IST)
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पीएचसी प्रभारियों को दिया टास्क

पहल. एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन का मामला, सिविल सर्जन ने की समीक्षा बिहारशरीफ/नालंदा : तपेदिक रोग पर काबू पाने के लिए जिले में इन दिनों एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन चलाया जा रहा है. यह कंपेन गत 17 जुलाई से शुरू हुआ है. इस बीच अब तक जिले के पीएचसी की उपलब्धियों की शनिवार को समीक्षा […]

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पहल. एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन का मामला, सिविल सर्जन ने की समीक्षा

बिहारशरीफ/नालंदा : तपेदिक रोग पर काबू पाने के लिए जिले में इन दिनों एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन चलाया जा रहा है. यह कंपेन गत 17 जुलाई से शुरू हुआ है. इस बीच अब तक जिले के पीएचसी की उपलब्धियों की शनिवार को समीक्षा की गयी. समीक्षा सिविल सर्जन ने जिले के हरेक पीएचसीवार की. इस दौरान जिले के कई पीएचसी की एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन में उपलब्धि संतोषजनक नहीं पायी गयी. जिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धि संतोषजनक नहीं रही है,
वैसे पीएचसी प्रभारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि कार्य में बेहतरी कर उपलब्धि को बढ़ायें.सिविल सर्जन डॉ सुबोध प्रसाद सिंह ने एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन के दौरान यक्ष्मा के नये रोगियों की खोज में लगे दलों पर हमेशा निगरानी रखें. यह हिदायत जिले के सभी पीएचसी व रेफरल और अनुमंडलीय अस्पतालों के क्रमश: प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों व उपाधीक्षकों को दिया गया है. सीएस ने निर्देश दिया है कि एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन का जायजा लेने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों का भी समय-समय पर दौरा करें, ताकि पता चल सके कि खोजी दल के सदस्य फील्ड में कार्य पर तैनात हैं और यक्ष्मा के नये मरीजों की पहचान कर रहे हैं. साथ ही कहा गया है कि जरूरत के मुताबिक टीम के सदस्यों को आवश्यक निर्देश दें. इतना ही नहीं क्षेत्र परिभ्रमण के दौरान खोजी दलों के कार्यों से संबंधित रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य कार्यालय के साथ-साथ जिला यक्ष्मा कार्यालय को भी उपलब्ध करायें. कार्य में शिथिलता बरतने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई की जायेगी.
जांच रिपोर्ट के आधार पर तुरंत करें इलाज :एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन के दौरान चिह्नित होने वाले नये रोगियों का बलगम जांच रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सीय इलाज सुनिश्चित किया जाये. यदि किसी के बलगम जांच रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि चिकित्सीय तौर पर हो जाती है तो अविलंब संबंधित मरीज का पंजीयन कर चिकित्सा सेवा प्रदान की जाये. डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार जीवनरक्षक दवा उपलब्ध करा दी जाये. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रविंद्र कुमार ने बताया कि जिले के सभी एसटीएस, एसटीएलएस, लैब तकनीशियनों को निर्देश दिया कि संग्रहित बलगम की जांच समय पर करें. क्षेत्रों का परिभ्रमण हर दिन करें. कार्य में कोताही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जायेगी. डीटीओ डॉ कुमार ने कहा कि नूरसराय, नगरनौसा, सिलाव व रहुई की उपलब्धि संतोषजनक नहीं है. संबंधित प्रभारियों से कहा गया है कि एक्टिव केस फाइंडिंग कंपेन पर पूरी तरह से निगरानी रखें और उपलब्धि को बेहतर बनायें.
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