स्कूल में विषयवार शिक्षक नहीं, पढ़ाई पर असर
Updated at : 19 Jul 2017 11:32 AM (IST)
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बिहारशरीफ : बड़ी पहाड़ी राष्ट्रीय प्लस टू विद्यालय बिहारशरीफ में सोमवार से छात्र-छात्राओं की उपस्थिति से विद्यालय परिसर गुलजार होने लगा है. इसके पूर्व विद्यालय में चल रहे स्क्रुटनी कार्य के कारण विद्यालय को प्राप्त: कालिन कर दिया गया था. सोमवार से विद्यालय एक बार फिर अपने पुराने निर्धारित समय पर खुलने लगा है. हालांकि […]
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बिहारशरीफ : बड़ी पहाड़ी राष्ट्रीय प्लस टू विद्यालय बिहारशरीफ में सोमवार से छात्र-छात्राओं की उपस्थिति से विद्यालय परिसर गुलजार होने लगा है. इसके पूर्व विद्यालय में चल रहे स्क्रुटनी कार्य के कारण विद्यालय को प्राप्त: कालिन कर दिया गया था. सोमवार से विद्यालय एक बार फिर अपने पुराने निर्धारित समय पर खुलने लगा है.
हालांकि मंगलवार से ही विद्यालय में फर्स्ट टर्मिनल परीक्षाभी शुरू हो जायेगी. विद्यालय में प्रवेश करने पर एक तरफ विद्यार्थियों क कक्षाएं चल रही थी तो दूसरी ओर कार्यालय में परीक्षा की तैयारी की जा रही थी. विद्यालय का भवन काफी पुराना है. ईंटों से प्लास्टर झड़कर गिर रहे हैं तथा छतों से भी सीमेंट के टुकड़े गिरने लगे है. एक ही परिसर में माध्यमिक, उच्च माध्यमिक तथा मध्य विद्यालय संचालित होने के कारण पढ़ाई के समय विद्यालय में काफी चहल पहल रहती है.
हालांकि इंटरमीडिएट का भवन नया है, जबकि पुरान भवन की स्थिति जर्जर हो गई है. बाद के बने कुछ कमरों में बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था की गई है. विद्यालय में वर्षों से विद्यालय प्रबंध समिति का गठन नहीं होने के कारण विद्यालय के सभी विकास कार्य अवरुद्ध है. पेयजल की गंभीर समस्या: विद्यालय में वर्षों से पेयजल की कोई समुचित व्यस्था नहीं की जा सकी है. पहाड़ी से सटे होने के कारण विद्यालय परिसर से बोरिंग कराना संभव नहीं है. विद्यालय में पढ़ने वाले लगभग 1100 छात्र छात्राएं पानी के लिए इधर उधर भटकते हैं.
शिक्षकों को भी अपनी घर से बोतल में पानी लाना पड़ता है. पानी के अभाव में विद्यालय में मौजूद दो शौचालय बेकार पड़े हैं. इससे विद्यालय के छात्राओं तथा महिला शिक्षकों को सर्वाधिक कठिनाई होती है. कई छात्र छात्राओं ने बताया कि जलापूर्ति नल में पानी आने तक तो पानी मिलता है. लेकिन इससे हर समय प्यास नहीं बुझाई जा सकती है.जिले के प्रतिष्ठित व पुराने विद्यालयों में शामिल इस विद्यालय में शिक्षकों की कमी का प्रभाव विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण पर पड़ रहा है. माध्यमिक कक्षाओं में वर्तमान में महज सात शिक्षक नियुक्त है.
इनमें गणित तथा हिंदी के शिक्षक नहीं रहने के कारण विद्यालय में नामांकित लगभग एक हजार छात्र छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. विद्यालय के छात्र छात्राओं ने बताया कि शिक्षक की कमी के कारण उन्हें ट्यूशन तथा कोचिंग के माध्यम से अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ रही है. विद्यालय के इंटरमीडिएट सेक्शन में भी विषयवार शिक्षक नहीं है. इंटरमीडिएट कक्षाओं में बायलॉजी, फिजिक्श, ज्योग्राफी आदि विषयों के शिक्षक नहीं है.विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति साधारण है.
प्रयोगशाला में उपकरण हैं तो आवश्यक केमिकल तथा दूसरी जरूरी चीजों का अभाव से समस्या बनी है. इसी प्रकार पुस्तकालय में भी नई पुस्तकें कम बल्कि पुरानी पुस्तकों की ही भरमार है. कमरों तथा उपस्करों की कमी के बावजूद किसी प्रकार पठन पाठन को सुचारू रखा गया है. विद्यालय में महज एक आदेशपाल रहने से भी कठिनाई होती है.
नाइट गार्ड के रूप में नियुक्त कर्मी से आदेशपाल का कार्य लिया जा रहा है. इसी प्रकार विद्यालय में कंप्यूटर आदि का भी अभाव है. विद्यालय में अलग से खेल का मैदान नहीं रहने से विद्यार्थी विद्यालय परिसर में ही काम चलाते हैं.
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