292 की जगह महज 92 डॉक्टर तैनात
Updated at : 15 Jul 2017 12:21 PM (IST)
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92 डॉक्टरों पर है जिले की चिकित्सा की जिम्मेवारी बिहारशरीफ : नालंदा जिले की आबादी 28 लाख से अधिक है. इन आबादी के स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने के लिए महज 92 डॉक्टर ही इन दिनों अस्पतालों में कार्यरत हैं. 292 की जगह महज 92 डॉक्टर ही जिले में तैनात है. इस स्थिति में जिले के […]
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92 डॉक्टरों पर है जिले की चिकित्सा की जिम्मेवारी
बिहारशरीफ : नालंदा जिले की आबादी 28 लाख से अधिक है. इन आबादी के स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने के लिए महज 92 डॉक्टर ही इन दिनों अस्पतालों में कार्यरत हैं. 292 की जगह महज 92 डॉक्टर ही जिले में तैनात है. इस स्थिति में जिले के अस्पतालों में आने वाले रोगियों की बीमारी का समुचित रूप से इलाज कैसे संभव हो पायेगा. यह स्थिति जिले के सदर अस्पताल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों व प्रखंड मुख्यालयों में अवस्थित अस्पतालों की है. इस स्थिति में अनुमान ही लोग लगा सकते हैं कि रोगियों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सेवा कैसे मिल पायेगी.
विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी कमी : सदर अस्पताल से लेकर पीएचसी तक में विशेषज्ञ रोगों के चिकित्सकों की घोर कमी है.विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण इलाज पहुंचने वाले मरीजों को हर दिन फजीहत का सामना करना पड़ रहा है.स्थिति यह है कि पीएचसी को कौन कहे सदर अस्पताल में ह्रदय रोग ,किडनी व चर्म रोग आदि के विशेषज्ञ चिकित्सक पदस्थापित नहीं हैं.चर्म रोग के मरीज हर दिन अस्पताल में इलाज के लिए भटकते नजर आते हैं.
पर उनका इलाज इस अस्पताल में नहीं हो पा रहा है.चर्म रोग के रोगी लाचार होकर जिले के निजी चिकित्सकों का सहारा लेते हैं.लिहाजा उन्हें अधिक खर्च का वहन करना पड़ता है.गरीब चर्म को रोगी चाहकर भी शहर के चर्म रोग विशेषज्ञ के पास इलाज करा पाने में सक्षम नहीं होते.इसी तरह ह्रदय रोगियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है.इस रोग के मरीजों को भी निजी डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है.
ह्रदय रोगी इलाज को पटना जाने को विवश: जिले के सदर अस्पताल में भी चिकित्सकों की भारी कमी है.यहां कुल 32 पद सरकार की ओर से सृजित हैं.पर वर्तमान समय में यहां पर स्वीकृत पदों के मुताबिक चिकित्सक पदस्थापित नहीं हैं.की स्वीकृत पदों में से आधी सीटें चिकित्सकों के खाली पड़े हैं.
इस तरह अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को इलाज कराने में हर दिन परेशानी झेलनी पड़ती है.यहां पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं. जैसे ह्रदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं. लिहाजा इस बीमारी के रोगी इलाज के लिए आते हैं तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है. एेसे मरीज बीमारी का इलाज के लिए पटना की दौड़ लगाने को विवश हैं.गरीब गुरबों तबके के रोगियों को काफी परेशानी हो रही है.
जिले में हैं बीस पीएचसी :नालंदा जिले में सरकार की ओर से इलाज के लिए तो मुकम्मल व्यवस्था जरूर की गयी है.इलाज को जिले में 20 पीएचसी,45 एपीएचसी,चार रेफरल अस्पताल संचालित हैं.इसके अलावा अनुमंडल स्तर पर राजगीर व हिलसा में अनुमंडलीय अस्पताल संचालित हैं.साथ ही जिला मुख्यालय में सदर अस्पताल है.पर यहां भी चिकित्सा की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है.विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से लेकर सोनोग्राफी की कमी मरीजों को हर दिन खल रही है.हालांकि जिले के अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाइयां कमोबेश उपलब्ध हैं.जो रोगियों के लिए राहत की बात है.डॉक्टरों की ही कमी रोगियों को खल रही है.
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