जमीन खरीदना हो सकता है महंगा
Updated at : 19 Jun 2017 4:29 AM (IST)
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एमवीआर मूल्यांकन करेगा निबंधन विभाग बिहारशरीफ : जमीन खरीदना महंगा हो सकता है. इसका संकेत सरकारी महकमा दे रहा है. इसके लिये एमवीआर यानी मिनिमम वैल्यू एक बार फिर से तय की जायेगी. आमदनी बढ़ाये जाने के लिये निबंधन विभाग पर दबाव है. इस दबाव को कम करने के लिये ठोस निर्णय लिये जा सकते […]
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एमवीआर मूल्यांकन करेगा निबंधन विभाग
बिहारशरीफ : जमीन खरीदना महंगा हो सकता है. इसका संकेत सरकारी महकमा दे रहा है. इसके लिये एमवीआर यानी मिनिमम वैल्यू एक बार फिर से तय की जायेगी. आमदनी बढ़ाये जाने के लिये निबंधन विभाग पर दबाव है. इस दबाव को कम करने के लिये ठोस निर्णय लिये जा सकते हैं. कुछ दिन पहले कोर कमेटी की बैठक की गयी थी. कोर कमेटी से पास करके विभाग को भेजा गया है. विभाग से आदेश आने के बाद जमीनों का एक बार फिर से एमवीआर तय की जायेगी.
जीएसटी लागू होने बाद सबसे ज्यादा कमाई करके देने का विभाग निबंधन ही है. शराबबंदी होने के कारण राजस्व की भरपाई के लिये निबंधन विभाग के द्वारा जिले के राजस्व को बढ़ा दिया गया है. वर्ष 2017-18 के लिये 112 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया है. जबकि पिछले वित्तीय साल में यह लक्ष्य 91 करोड़ रुपये था.
माना जा रहा है कि लक्ष्य के अनुसार जिले के वैसे क्षेत्र जिसका तीन साल से कीमत नहीं बढ़ा है उसका पुन: मूल्यांकन की जाये. ऐसे क्षेत्रों में जिले के कई प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र है. जिसका मूल्यांकन कई साल से नहीं की गयी है. इसका फायदा ब्रोकर तो उठा रहा है पर विभाग को नुकसान हो रहा है. ऐसे क्षेत्रों के जमीनों का एमवीआर कोर कमेटी द्वारा तय किये जायेंगे. हालांकि एमवीआर तय होने का अर्थ सिर्फ जमीन की कीमतों का बढ़ाना ही नहीं है. जिस एरिया की कीमत ज्यादा होगा इसकी कमी भी की जायेगी. कुछ एरिया के जमीनों की कीमत ज्यादा होने के कारण खरीद-बिक्री प्रभावित हो रहा है. ऐसे क्षेत्र के जमीन की कीमतों में कमी की जायेगी. शहरी क्षेत्र के आसपास के जमीनों की कीमत में कमी होने की संभावना. शहर विस्तारित क्षेत्रों की जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी होने का संकेत है.
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