बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी से दहशत, यात्री घायल

Author Lalitansoo
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बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी से दहशत, यात्री घायल

Panic due to stone pelting on Kranti Express

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जनरल कोच पर सोनपुर-हाजीपुर रेलखंड के बीच हुआ पथराव, मुजफ्फरपुर में हुआ प्राथमिक उपचार

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

नयी दिल्ली से दरभंगा जा रही गाड़ी- 12566 बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के जनरल कोच पर सोनपुर-हाजीपुर रेलखंड के बीच एक बार फिर बदमाशों ने पथराव किया. पुल के पास हुई इस घटना में एक महिला और बच्चों सहित तीन से चार यात्री घायल हो गए. पत्थर खिड़की की रॉड से टकराते हुए बोगी के अंदर जा घुसा, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गयी. मिली जानकारी के अनुसार, सीतामढ़ी जिले के पुनौरा थाना क्षेत्र के खड़का निवासी तौसिफ रजा के कान के पास चोट लगी. जिससे उनका सिर भारी हो गया. यह घटना ट्रेन के गार्ड बोगी के आगे वाले जनरल कोच के दाहिनी ओर हुई. यात्रियों ने बताया कि सोनपुर से ट्रेन खुलने के बाद गंगा नदी पार करने से ठीक पहले रेलवे लाइन के किनारे खड़े चार-पांच लड़कों ने जनरल कोच पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया.

मुजफ्फरपुर में हुआ प्राथमिक उपचार

हाजीपुर में ट्रेन रुकने पर ट्रेन की एस्कॉर्ट पार्टी और ट्रेन मैनेजर यात्रियों को देखने पहुंचे. घटना की जानकारी तुरंत सोनपुर कंट्रोल को दी गयी. ट्रेन के मुजफ्फरपुर पहुंचने से पहले ही आरपीएफ, जीआरपी और रेलवे का चिकित्सकीय दल स्टेशन पर मौजूद था. मुजफ्फरपुर जंक्शन पर आरपीएफ ने घायल यात्री का बयान दर्ज किया, जबकि चिकित्सकों ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया. इस घटना के बाद से यात्री लगातार हो रही पत्थरबाजी को लेकर काफी सहमे हुए हैं. घायल हुए सभी यात्रियों के पास दिल्ली से मुजफ्फरपुर तक का टिकट था.

अब तक पत्थरबाजी की घटना

– 30 जून को मोतीपुर के पास पत्थर चलने से सी-5 कोच का शीशा टूटा था

– 13 जुलाई को मोतीपुर-मेहसी के बीच पत्थरबाजी में सी-6 कोच का शीशा क्षतिग्रस्त हुआ था

– 14 जुलाई को बीबीगंज पर पत्थरबाजी से सी-2 कोच का शीशा टूटा

– 15 जुलाई बिहार संपर्क क्रांति पर सोनपुर-हाजीपुर के बीच पथराव

सजा का प्रावधान

चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकना एक गंभीर अपराध है, और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है. इसे भारतीय रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 152 और 153 के तहत एक दंडनीय अपराध माना जाता है. रेलवे अधिनियम की धारा 153 में 5 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. यह तब लागू होता है जब पत्थर फेंकने से ट्रेन में बैठे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाए.

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ललितांशु

लेखक के बारे में

By ललितांशु

ललितांशु, पत्रकारिता के क्षेत्र में बीते 16 वर्षों से सक्रिय ललितांशु के लिए 'पॉजिटिव खबरों' को चुनना और उन्हें समाज के सामने लाना प्राथमिकता और जुनून रहा है. रेल और सोशल मीडिया से जुड़ी खबरों से इनका अधिक जुड़ाव है.

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