निचले और मध्यम खेतों में लगाये धान का बिचड़ा, ऊंची जमीन पर अरहर

Updated at : 08 Jul 2024 7:09 PM (IST)
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निचले और मध्यम खेतों में लगाये धान का बिचड़ा, ऊंची जमीन पर अरहर

निचले और मध्यम खेतों में लगाये धान का बिचड़ा, ऊंची जमीन पर अरहर

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मिट्टी जांच करा कर ही खेतों में डाले उर्वरक उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर पिछले दिनों उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में अच्छी वर्षा होने से धान का बिचड़ा तैयार हो गया है. किसान इसकी रोपनी कर रहे हैं. ऐसे समय में डॉ राजेंद्र कृषि केंद्रीय विश्वविद्यालय ने किसानों के लिये गाइडलाइन जारी कर उन्हें नीची व मध्यम जमीन में धान रोपने का सुझाव दिया है. कृषि वैज्ञानिक डॉ गुलाब सिंह ने कहा है कि किसान मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरक डालें. यदि मिट्टी जांच नहीं करायी गयी है तो मध्यम और लंबी किस्म के धान के लिये प्रति हेक्टेयर 30 किलो नेत्रजन, 60 किलो स्फुर और 30 किलो पोटाश के साथ 25 किलो जिंक सल्फेट या 15 किलो प्रति हेक्टेयर चिलेटेड जिंक का व्यवहार करें. ऊंचे जगह पर करें अरहर की बुआई अरहर बोने वाले किसानों को सलाह दी गयी है कि वे ऊंची जमीन पर अरहर लगाये. बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 20 किलो नेत्रजन, 45 किलो स्फुर, 20 किलो पोटाश व 20 किलो सल्फर का प्रयोग करें. बहार, पूसा 9, नरेंद्र अरहर, मालवीय-13, राजेंद्र अरहर किस्में बुआई के लिये अनुशंसित है. प्रति हेक्टेयर 18-20 किलो बीज की बुआई करें. बुआई के 24 घंटे पहले 2.5 ग्राम थीरम दवा से प्रति किलो बीज की दर से उपचार करें. बुआई के ठीक पहले उपचारित बीज को उचि तराइजोबियम कल्चर से उपचारित करें.

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