Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में बढ़ रही पार्कों की संख्या, लोगों की जुट रही भीड़, पढ़िए विशेष रिपोर्ट

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 04 Jan 2025 9:30 PM

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Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पार्कों को भरपूर सुविधाओं से लैस किया जा रहा है. सभी उम्र के लोग इन दिनों यहां के सभी पार्कों में खूब समय बीता रहे हैं.

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Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर शहर में अब घूमने और फुर्सत का पल बिताने के लिए जगह की कमी नहीं है. शहर के चार पार्कों के खुलने से न केवल बच्चों के घूमने और खेलने की सुविधा मिल रही है, बल्कि कई परिवारों और बुजुर्गों के लिए शहर के कोलाहल से दूर पेड़-पौधों के बीच फुर्सत का समय बिताने का जगह भी मिला है. इन पार्कों से सबसे बड़ा फायदा सुबह में योग और व्यायाम करने वाले लोगों को हो रहा है. स्कूल-कॉलेजों के धूल भरे मैदानों से अलग इन पार्कों में लोग सुबह में दौड़ लगा रहे हैं और कसरत कर रहे हैं. शहर के क्लब रोड स्थित जुब्बा सहनी पार्क, कंपनी बाग के सिटी पार्क और प्रियदर्शिनी पार्क और समाहरणालय का सहारा भारत माता पार्क में अब लोगों की भीड़ जुट रही है. शहर के तीन पार्कों में प्रवेश के लिए नगर निगम की ओर से दस रुपए का शुल्क रखा गया है, लेकिन सुबह नौ बजे तक इन पार्कों में प्रवेश फ्री है. यहां लोग आकर व्यायाम करते हैं और प्रकृति का आनंद लेते हैं. अब कई स्कूल भी बच्चों को घुमाने के लिए इन पार्कों में ला रहे हैं. यहां लगे विभिन्न झूले, म्युजिकल फाउंटेन, पहाड़, खरगोश और हंस बच्चों को लुभाते हैं. इन दिनों जब धूप खिलने पर इन पार्कों की रौनक बढ़ रही है. लोग छुट्टियों में परिवार के साथ यहां आकर आनंद उठाते हैं. शहर में पार्कों के होने से लोगों की जीवन-शैली बदली है. अब उनके लिए घूमने के विकल्प में ये पार्क शामिल हो गए हैं. इससे नगर निगम की आमदनी भी काफी बढ़ गयी है. पार्कों की विशेषताओं पर पढ़िए एक रिपोर्ट –

जुब्बा सहनी पार्क, क्लब रोड

खासियत : इस पार्क में बच्चों के साथ बड़े भी घूमने आते हैं. यहां की हरियाली उन्हें आनंद देती है. पार्क में बने बेंच और गार्डन में बैठकर कोलाहल से दूर अपना समय व्यतीत करते हैं. अभी के मौसम में दोपहर से लोगों का आना शुरू हो जाता है. वैसे तो शाम सात बजे तक पार्क खुला रहता है, लेकिन ठंड होने के कारण शाम छह बजे तक लोगों की भीड़ रहती है.

सुविधा : इस पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला, पहाड़, म्युजिकल फाउंटेन है. यहां बच्चे खूब मस्ती करते हैं. कई स्कूल अपने बच्चों को लेकर यहां आते हैं और दो-तीन घंटे तक बच्चे यहां पहाड़ और झूले का आनंद लेते हैं. यहां का म्यूजिकल फाउंटेन भी लोगों को काफी आकर्षित करता है.

यह पार्क पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है. अमर शहीद जुब्बा सहनी के नाम पर बना यह पार्क स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल है. इस कारण इसका विकास किया गया है. यह स्थानीय लोगों और आगंतुकों दोनों के लिए शांत वातावरण में एकत्र होने का केंद्र है. इसकी हरियाली, सुलभता और शहर के ऐतिहासिक महत्व के प्रतीक के रूप में इसे लोकप्रियता मिली है.

सिटी पार्क, कंपनी बाग

खासियत : कंपनी बाग स्थित सिटी पार्क मनोरंजन का मुख्य साधन है. यहां लोग सैर-सपाटे के लिए आते हैं. इस पार्क को बड़ी खूबसूरती से डिजाइन किया गया है. शहर के मुख्य बाजार के समीप होते हुए भी यह कोलाहल से दूर है. अभी के मौसम में यहां दोपहर में लोगों की भीड़ जुट रही है. गर्मी के मौसम में यहां शाम चार बजे के बाद लोग घूमने आते हैं

सुविधा : इस पार्क को बच्चों के लिए विशेष तौर पर तैयार किया गया है. यहां लगे फूल मन मोहते हैं तो बच्चों के लिए कई तरह के झूले लगे हैं. यहां वॉकिंग ट्रैक, वॉटर फाउंटेन और कसरत के लिए मशीनें लगी है. लोग यहां टहलने के अलावा कसरत करने के लिए भी आते हैं.

78 लाख से हुआ पार्क का जीर्णोद्धार

सिटी पार्क 12 साल पहने बना है, लेकिन पिछले वर्ष 78 लाख की लागत से इसका जीर्णोद्धार कराया गया है. जिसमें कई तरह के झूले भी इंस्टॉल किये गये हैं. इस पार्क को पिछले साल खोला गया था. पार्क में बच्चों के लिए खेलने के साधन भी उपलब्ध हैं पार्क परिसर में अच्छी लाइटिंग की भी व्यवस्था की गयी है. यह पार्क शाम सात बजे तक खुला रहता है. ठंड के मौसम में भी लोग लाइटिंग देखने के लिए इस पार्क में आते हैं. शहर के मध्य होने के कारण इस पार्क में लोगों की अच्छी भीड़ हो रही है.

प्रियदर्शिनी पार्क, कंपनी बाग

खासियत : यह पार्क में लगे रंग-बिरंगे फूल लोगों को आकर्षित करते हैं. यहां की लाइटिंग भी खूबसूरत है. सिटी पार्क के समीप होने के कारण इस पार्क में रौनक बनी रहती है. बच्चों को यह पार्क बहुत पसंद है

सुविधा : इस पार्क को भी बच्चों के लिए डिजाइन किया गया है. यहां झूले लगाए गए हैं और बच्चों को खेलने की भी व्यवस्था है. पार्क में लगे पेड़ लोगों का मन मोहते हैं. यह पार्क वर्ष 2010 में ही बनकर तैयार हो गया था. इसके बाद 1.25 करोड़ की लागत से इसका जीर्णोद्धार कराया गया है.

यह पार्क रात में रोशनी से जगमग करता है. यहां की सुदरता देखने लायक बनती है. इंदिरा गांधी के नाम पर बना यह प्रियदर्शिनी पार्क शहर के लोगों की मांग भी रही है और इस पार्क को खुलवाने के लिए शहर के लोगों ने धरना भी दिया था. शहर के मध्य यह पार्क होने के कारण शहर में खरीदारी करने निकले लोग भी कुछ देर इस पार्क में सुकून से बैठते हैं. अभी के मौसम में दिन भी इस पार्क में अच्छी भीड़ रहती है. ठंड में जिस दिन धूप खिलती है, उस दिन पार्क की रौनक ही कुछ और रहती है

सहारा भारत माता पार्क, समाहरणालय

खासियत : यह पार्क व्यायाम और योग के लिए मशहूर है. यहां रोज सुबह विभिन्न संस्थाओं की ओर से लोगों को योग और व्यायाम का अभ्यास कराया जाता है. सुबह पांच बजे से सुबह 9 बजे तक यहां सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटती है. महिला और पुरुष योग का अभ्यास करते हैं

सुविधा : यहां आने वाले लोगों को योग की विभिन्न क्रियाओं को सीखने में परेशानी नहीं होती. वे यहां किसी भी संस्था के शिविर में शामिल हो सकते हैं. यहां लगे भारत माता की तस्वीर आकर्षक है. पार्क की साफ-सफाई भी अच्छी रहती है. यहां लगे विभिन्न फूलों के पौधे लोगों को लुभाते हैं. शाम में फुर्सत के समय लोग यहां बैठ कर प्रकृति का आनंद लेते हैं. समाहरणालय के मुख्य द्वार पर स्थित यह पार्क शांति से बैठने के लिए सबसे अच्छी जगह है.

इस पार्क की खूबसूरती लोगों को आकर्षित करती है. चाहे कोई भी मौसम हो, यहां सुबह में लोगों की भीड़ रहती है. एक्सरसाइज और योग करने के लिए यहां शहर के विभिन्न जगहों से लोग पहुंचते हैं. शहर के मध्य होने के कारण इस पार्क में आना लोगों के लिए सुगम है. अपनी सुंदरता के लिए यह पार्क मशहूर है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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