सिंथेटिक ड्रग्स का कहर: कूरियर से सफेद जहर मंगा रहे हाईप्रोफाइल घरों के लड़के
कूरियर से सफेद जहर मंगा रहे हाईप्रोफाइल घरों के लड़के
Muzaffarpur Synthetic Drugs: मुजफ्फरपुर में पैर पसार रहा सिंथेटिक ड्रग्स का काला कारोबार . थार और महंगी गाड़ियों वाले हाईप्रोफाइल युवा कूरियर से मंगा रहे सफेद जहर, स्कूल-कॉलेजों के पास पैडलर्स सक्रिय, पुलिस ने कसी कमर.पढ़े पूरी खबर....
Muzaffarpur Synthetic Drugs:लीची के शहर में इन दिनों एक ऐसी मिठास घुल रही है जो स्वाद नहीं, बल्कि सीधे मौत परोस रही है. हम बात कर रहे हैं सिंथेटिक ड्रग्स की. यह वो केमिकल लोचा है जिसने शहर की युवा पीढ़ी की नसों में जहर घोलना शुरू कर दिया है. महानगरों की तर्ज पर सूखा नशा का कारोबार शहर में धीरे- धीरे पांव पसारना शुरू कर दिया है. हाइप्रोफाइल परिवार के लड़के धीरे- धीरे इसकी गिरफ्त में जा रहे हैं. शहर की गलियों में नशे की पुड़िया और चमकीले पाउडर ने पांव पसार लिए हैं. थार व महंगी कार से चलने वाले लड़के कूरियर से सूखा नशा महानगरों से मंगवा कर करते हैं.जनवरी माह में नगर थाने की पुलिस ने शहर के बीचों- बीच शुक्ला रोड स्थित शितला गली में एक करोड़ से अधिक का नशीला और प्रतिबंधित सिगरेट, सिगार, हुक्का समेत अन्य सूखा नशा का सामान जब्त किया था.
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क्या है सिंथेटिक ड्रग्स का मायाजाल ?
सिंथेटिक ड्रग्स वो नशा है जो किसी पेड़ या पौधे (जैसे अफीम या गांजा) से नहीं, बल्कि लैब में रसायनों के मेल से तैयार किया जाता है. आसान भाषा में कहें तो यह शुद्ध जहर है. इसमें एमडीएमए (एक्सटसी), मेफेड्रोन (म्याऊ-म्याऊ), और सिंथेटिक कैनबिनोइड्स जैसे खतरनाक नाम शामिल हैं. प्रभात खबर की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि मुजफ्फरपुर के कई इलाकों में अब पारंपरिक नशे की जगह इन केमिकल पाउडर ने ले ली है.

युवाओं को कैसे खोखला कर रहा यह सफेद पाउडर
- मनोचिकित्सक का मानना है कि सिंथेटिक ड्रग्स सीधे दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स पर हमला करते हैं. इससे शरीर को जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई नामुमकिन है.
- मानसिक संतुलन बिगाड़ना : इसे लेने के बाद युवा डिप्रेशन, एंग्जायटी और कई बार मतिभ्रम ) का शिकार हो रहे हैं. उन्हें समझ ही नहीं आता कि असलियत क्या है और सपना क्या.
- शारीरिक तबाही: मात्र कुछ हफ्तों के सेवन से किडनी और लीवर फेल होने की नौबत आ जाती है. दिल की धड़कन इतनी तेज हो जाती है कि हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.
- अपराध की ओर कदम: यह नशा महंगा है. अपनी लत को पूरा करने के लिए शहर के छात्र और युवा मोबाइल छिनतई, चोरी और लूट जैसी वारदातों में शामिल हो रहे हैं. मिठनपुरा से लेकर ब्रह्मपुरा तक की गलियों में कई ऐसे मामले आए हैं जहां नशे के पैसे के लिए बेटों ने अपनों पर ही हाथ उठाया है.
लैब से स्कूल के गेट तक का सफर
हैरानी की बात यह है कि ये ड्रग्स देखने में किसी साधारण दवा या कैंडी की तरह लगते हैं. इसकी गंध नहीं होती, इसलिए घर वालों को भनक तक नहीं लगती. शहर के कुछ पैडलर इन्हें कूरियर और ऑनलाइन माध्यमों से मंगाकर शहर के बड़े प्लस टू लेबल के स्कूल-कॉलेज के आसपास खपा रहे हैं. पार्टी ड्रग के नाम पर शुरू हुआ यह शौक कब जानलेवा लत बन जाता है, पता ही नहीं चलता.
सदर पुलिस ने पकड़ा था 6300 पीस नशीला इंजेक्शन
हाल में ही सदर थाने की पुलिस ने डुमरी फोरलेन से 6300 पीस नशीली इंजेक्शन की खेप पकड़ी थी. यह खेप पटना से पूर्वी चंपारण जिला के रक्सौल तस्कर ले जा रहे थे. वहां से नेपाल में सप्लाई करना था. बताया जाता है कि यह नशीला इंजेक्शन शहर में भी सप्लाई हो रहा है. बूढ़ी गंडक नदी के दियारा इलाके में नशेड़ी खुद को इंजेक्ट करते हुए दिख जाते हैं.
अभिभावक क्या करें?
मनोचिकित्सक डॉ. अमर कुमार झा का कहना है कि अगर आपका बच्चा अचानक गुमसुम रहने लगा है, उसकी आंखों के नीचे काले घेरे हैं या वह बेवजह चिड़चिड़ा हो रहा है, तो संभल जाइए. यह वक्त डांटने का नहीं, बल्कि उससे बात करने और विशेषज्ञ की सलाह लेने का है.
बयान सिटी एसपी: मोहिबुल्लाह अंसारी
नशे के खिलाफ जिला पुलिस विशेष अभियान चला रही है. मादक पदार्थ के तस्करों के ठिकाने पर रेड की जा रही है. एएनटीएफ की टीम का गठन किया गया है. सूखा नशा के कारोबार का सूचना मिलेगा तो कार्रवाई होगी.
मुजफ्फरपुर से चंदन सिंह की रिपोर्ट
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By SUMIT KUMAR
सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।
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