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Muzaffarpur News: जन्म से है अंधा, लेकिन सटीक बताता है समय, हैरान कर देगी इस भिखारी की कहानी

Updated at : 03 Jan 2025 1:22 PM (IST)
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Muzaffarpur News

प्रतीकात्मक तस्वीर

Muzaffarpur News: जिले में एक ऐसा भिखारी है जो जन्म से अंधा है, लेकिन जब उससे कोई समय पूछता है तो वह एकदम सटीक समय बताता है. लोग उसके इस अंदाज से काफी दंग रह जाते हैं. जानिए इस भिखारी के बारे में…

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Muzaffarpur News: हम में से सभी को समय का पता करने के लिए घड़ी देखनी पड़ती है. कोई अगर किसी से समय पूछे तो वे बिना घड़ी या मोबाइल देखे समय नहीं बता सकता, लेकिन मुजफ्फरपुर में एक ऐसा शख्स है, जो जन्म से अंधा होने के बावजूद सटीक समय बताता है. शख्स ने आज तक कभी घड़ी नहीं देखी, लेकिन समय का अंदाजा इतना परफेक्ट है कि लोग उनसे समय पूछ कर अपनी घड़ी मिलाते हैं. 

सेकेंड तक का अंदाजा लगा लेते हैं लखेंद्र

उसका समय बताने का अंदाज इतना सटीक है कि वह घंटा व मिनट ही नहीं बल्कि सेकेंड भी ठीक-ठीक बता लेता है. व्यक्ति की इस प्रतिभा के पूरे शहर के लोग कायल हैं. अक्सर लोग उनसे समय पूछ कर अपनी घड़ी देखते हैं और उन्हें बख्शीश देते हैं. इन्हें भिक्षा मांगने के लिए किसी को कुछ कहना नहीं पड़ता, लोग खुद से ही उसे पैसे दे देते हैं. इस भिक्षुक का नाम लखेंद्र पासवान है. इनकी उम्र करीब 70 साल है.

मन की आंखों से देखता हूं समय: लखेंद्र 

लखेंद्र पासवान किसी भी सीजन में चप्पल नहीं पहनते. ये भगवानपुर चौक से रोज बिना चप्पल व हाथ में घंटी वाली छड़ी लेकर निकलते हैं. जिधर पैर बढ़ जाए, उधर चल पड़ते हैं. सुबह से शाम तक बाजार में घूमते हुए जो रकम जमा होती है, उसी से गुजारा करते हैं. लखेंद्र ने बताया कि उनके दो बेटे हैं, एक मैकेनिक है दूसरा ड्राइवर है. पत्नी की मौत दो साल पहले हो गयी थी. नेत्रहीन होने के कारण वह कुछ कर नहीं पाते, इसलिए कोई उनकी देखरेख नहीं करता. भगवानपुर में ही एक घर के बाहर सोते हैं. समय बताने की बात पर वे कहते हैं कि मैं मन की आँखों से देखता हूं. नहीं पता कि घड़ी कैसी होती है. 

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जिले में 15 हजार 732 दिव्यांगों को मिल रही पेंशन 

रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 15 हजार 732 दिव्यांग हैं. इनका यूडीआइडी कार्ड भी बन चुका है. इनमें 7225 लोकमोटर यानी पैर से दिव्यांग, 500 दृष्टि बाधित व अन्य पैर सहित दूसरी तरह के अस्थि रोग से दिव्यांग हैं. सभी का यूडीआइडी कार्ड जारी हो चुका है और इन्हें सामाजिक सुरक्षा कोषांग से प्रति महीने 400 रुपये पेंशन भी मिल रही है. इसके अलावा अन्य सरकारी सुविधाओं का भी लाभ दिया जा रहा है.

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Aniket Kumar

लेखक के बारे में

By Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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