Muzaffarpur News: बढ़ती गर्मी के साथ लौटा AES का खौफ: बुखार आते ही सहम रहीं माताएं, अब तक 31 बच्चे चपेट में

Published by : SUMIT KUMAR Updated At : 20 May 2026 4:43 PM

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बुखार आते ही सहम रहीं माताएं, अब तक 31 बच्चे चपेट में

Muzaffarpur News:उत्तर बिहार में गर्मी बढ़ते ही चमकी बुखार (AES) का खौफ लौट आया है. अब तक 31 बच्चे इसकी चपेट में आ चुके हैं. डॉक्टरों ने माताओं को पैनिक न होने और बच्चों को रात में खाली पेट न सुलाने की सलाह दी है.पढ़ें पूरी खबर…

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मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट

Muzaffarpur News: उत्तर बिहार में मौसम का पारा चढ़ने के साथ ही बच्चों की सेहत को लेकर माताएं बेहद चिंतित और डरी हुई हैं. जिले में बढ़ती गर्मी ने एक बार फिर एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एइएस) यानी चमकी बुखार का खौफ पैदा कर दिया है. स्थिति यह है कि बच्चों को सामान्य बुखार होने पर भी माताएं सहम जाती हैं. शिशु रोग विशेषज्ञों और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के मुताबिक, इन दिनों ओपीडी में आने वाली लगभग हर मां के चेहरे पर एइएस का अनजाना डर साफ देखा जा सकता है. बच्चा जैसे ही बुखार की चपेट में आता है, घबराए परिजन उसे लेकर तुरंत अस्पताल भाग रहे हैं. अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों से माताओं का पहला सवाल यही होता है, “डॉक्टर साहब, कहीं मेरे बच्चे को एइएस तो नहीं हो गया है.”

अब तक 31 बच्चे बीमारी की चपेट में

आंकड़ों पर बात करें तो माताओं का यह डर पूरी तरह निराधार भी नहीं है. इस सीजन में अब तक कुल 31 बच्चे एइएस की चपेट में आ चुके हैं. स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, इन कुल मामलों में से अकेले इसी जिले के 17 बच्चे शामिल हैं, जबकि बाकी 14 मरीज उत्तर बिहार के अन्य जिलों से इलाज के लिए यहां पहुंचे हैं. राहत की बात बस इतनी है कि समय पर इलाज मिलने से ज्यादातर बच्चे ठीक हो रहे हैं.

डॉक्टरों की सलाह: डरें नहीं, सतर्क रहें और बच्चों को खाली पेट न सुलाएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गोपाल शंकर सहनी का कहना है कि हर बुखार एइएस नहीं होता, इसलिए पैनिक होने की जरूरत नहीं है, बल्कि सतर्क रहने की आवश्यकता है. डॉक्टरों ने परिजनों को कुछ बेहद जरूरी हिदायतें दी हैं:

  • बच्चों को दोपहर के वक्त तेज धूप और चिलचिलाती गर्मी में बाहर बिल्कुल न खेलने दें.
  • रात में बच्चों को कभी भी खाली पेट न सुलाएं, उन्हें रात में मीठा भोजन या गुड़-शक्कर जरूर दें.
  • बच्चों को दिनभर में पर्याप्त पानी, नींबू-पानी या ओआरएस का घोल पिलाते रहें ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन और शुगर की कमी न हो.
  • अगर बच्चे को तेज बुखार के साथ चमकी (दौरे) आए या बच्चा बेहोश होने लगे, तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं.
  • डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि एइएस से बचाव का सबसे बड़ा हथियार सिर्फ और सिर्फ सजगता और सही समय पर इलाज है.
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SUMIT KUMAR

लेखक के बारे में

By SUMIT KUMAR

सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

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