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जिले में डीएपी खाद की भारी किल्लत को लेकर भटक रहे किसान

Updated at : 13 Dec 2024 7:29 PM (IST)
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जिले में डीएपी खाद की भारी किल्लत को लेकर भटक रहे किसान

पश्चिम चंपारण जिले रब्बी सीजन को लेकर डीएपी की सबसे अधिक मांग. क्योंकि जिले में लगभग 3.80 लाख हेक्टेयर में रब्बी फसलों की खेती होती है.

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बेतिया : पश्चिम चंपारण जिले रब्बी सीजन को लेकर डीएपी की सबसे अधिक मांग. क्योंकि जिले में लगभग 3.80 लाख हेक्टेयर में रब्बी फसलों की खेती होती है. इनमें गन्ना, मक्का, गेहूं, सब्जी, आलू समेत दलहनी-तेलहनी फसलों के साथ-साथ बागवानी की फसलें शामिल हैं. यहां की करीब 70 फ़ीसदी आबादी खेती पर निर्भर है, जिनके जीवन यापन का स्रोत कृषि ही हैं. ऐसे में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का अनुपालन करने के लिए अधिकारियों को समय-समय से उर्वरक की जांच और नमूना संग्रह का आदेश निर्गत करती है. खासकर सीमावर्ती जिला होने के कारण भी सरकार की नजर पश्चिम चंपारण पर रहती है. क्योंकि इसकी चार प्रखंडों की सीमा नेपाल से लगी हुई है. हालांकि तस्करी रोकने के लिए एसएसबी, कृषि विभाग और कस्टम विभाग के अधिकारी लगे हुए हैं. डीएपी की कमी के कारण पश्चिम चंपारण जिले के आधे दर्जन प्रखंडों में बायो डीएपी का कारोबार फल फूल रहा है. भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर डॉ रविंद्र यादव ने बताया कि बायो डीएपी नाम की कोई उर्वरक नहीं होती है. इससे किसान दूर रहें. यह पूर्ण रूप से नकली है.

संगठित गिरोह सक्रिय

संगठित गिरोह के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के कम पढ़े लिखे किसानों को डीएपी के नाम पर बायो डीएपी दिए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. पंजाब गुजरात महाराष्ट्र आदि राज्यों में छापेमारी अभियान चल रही है. लेकिन इधर सूचना मिल रही कि बिहार के पश्चिमी चंपारण में इसका कारोबार हो रहा है, जो गलत है. अगर कोई दुकानदार बायो डीएपी के नाम पर डीएपी की बिक्री करता है तो उर्वरक अधिनियम के अधीन यह गैर कानूनी है. पश्चिम चंपारण जिले में लौरिया समेत आधे दर्जन प्रखंडों में दो दर्जन से ज्यादा दुकानदारों के द्वारा बायो डीएपी की बिक्री की जा रही है. जिले में थोक और खुदरा उर्वरक विक्रेताओं के द्वारा डीएपी की कृत्रिम अभाव दिखाकर 1750 रुपए में डीएपी बेची जा रही है. जिसको लेकर किसान संघ के नेताओं समय आधे दर्जन किसानों ने लिखित शिकायत कृषि विभाग पटना में की है. किसान अवधेश प्रसाद ने बताया कि दुकानदारों के द्वारा डीएपी की किल्लत दिखाकर 1350 रुपए के बजाय 1750 रुपये में बेची जा रही है. वहीं बायो डीएपी डीएपी के नाम पर 1350 रुपये में बेची जा रही है.

डीएपी के वितरण में गड़बड़ी की जांच का आदेश

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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