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सहानुभूति ही समावेशी बदलाव की नींव

Updated at : 07 Jun 2025 7:41 PM (IST)
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सहानुभूति ही समावेशी बदलाव की नींव

सहानुभूति ही समावेशी बदलाव की नींव

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: जिले में राष्ट्रीय स्तर की तीन दिवसीय सीआरई कार्यशाला का आयोजन वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर रानी लक्ष्मीबाई महिला विकास समिति (सफल), मुजफ्फरपुर द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर तीन दिवसीय सीआरई कार्यशाला का आयोजन किया गया है. कार्यशाला का उद्देश्य पुनर्वास पेशेवरों को आइडीडी के क्षेत्र में व्यावहारिक और नैतिक रूप से दक्ष बनाना है, ताकि वे समाज में समावेशी दृष्टिकोण को सशक्त बना सकें. वक्ता पूर्व राज्य निशक्तता आयुक्त डॉ. शिवाजी कुमार ने कहा कि आइडीडी के प्रति सही समझ और सहानुभूति ही समाज में समावेशी बदलाव की नींव है. प्रोफेशनल्स सत्र में शिवानी कुमारी, डॉ. आलोक कुमार, राजेश कुमार, संतोष कुमार सिंह, लक्ष्मीकांत कुमार, लालू तुरहा, अजीत कुमार झा सहित कई विशेषज्ञों ने बौद्धिक दिव्यांगता के पहचान, वर्गीकरण, मूल्यांकन आदि पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की. इस कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों से 300 से अधिक आरसीआइ पंजीकृत विशेष शिक्षक, चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता मनोवैज्ञानिक भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम समन्वयक श्री लालू तुरहा ने कहा कि जिले में इस स्तर की कार्यशाला का आयोजन गर्व की बात है. सफल संस्था पुनर्वास क्षेत्र में लगातार सक्रिय है और यह मंच पेशेवरों को सीखने-सिखाने का अवसर प्रदान कर रहा है. कार्यशाला आठ जून को समाप्त होगी जिसमें सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे. प्रारंभिक पहचान और समय पर हस्तक्षेप आइडीडी से जुड़े व्यक्तियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते है. यह कार्यशाला इसी सोच को मजबूती दे रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KUMAR GAURAV

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KUMAR GAURAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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