बिहार की महान शैक्षिक परंपरा से देश-दुनिया को दिशा दें शिक्षाविद् : दत्तात्रेय

बिहार की महान शैक्षिक परंपरा से देश-दुनिया को दिशा दें शिक्षाविद् : दत्तात्रेय
:: आरएसएस के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने शिक्षाविदों से किया संवाद :: संघ शताब्दी वर्ष पर आरडीएस कॉलेज में संवाद का आयोजन उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर संघ शताब्दी वर्ष पर शहर पहुंचे आरएसएस के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को आरडीएस कॉलेज में शिक्षाविदों के साथ संवाद किया. उन्होंने कहा कि टीम वर्क से बेहतर सफलता मिलती है. समाज के सभी वर्ग के लोगों को टीम भावना से काम करना चाहिये. परस्पर सहयोग से भी सभी को लाभ होता है. इसलिए सभी लोगों में एक दूसरे के प्रति परस्पर सहयोग का स्वभाव होना चाहिये. उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र के लोग अपने काम से देश-दुनिया को दिशा दें. उदाहरण देते हुए सर कार्यवाह ने कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी पंचायत विकास के उस मुकाम तक नहीं पहुंच सका, जहां पहुंचना चाहिए. यह स्थिति दर्शाती है कि यदि टीम भावना से काम होता तो समाज और बलवान होता है. उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत दरभंगा महाराज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी के निधन पर शोक संवेदना से की. उन्होंने कहा कि देश में जब संकट था तब महारानी ने 600 किलो सोना दान किया था. आज दरभंगा का विवि, एयरपोर्ट उनकी ही दान की हुईं जमीन पर है. समाज में अच्छा काम करने वाले लोगों से समय-समय पर मिलते जुलते रहना चाहिए, जिससे सकारात्मक कार्यों में वृद्धि हो सके. उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष पर जो कार्य किये जा रहे हैं. उसका उद्देश्य संघ की सदस्यता बढ़ाना नहीं है, बल्कि प्राचीन भारत से विरासत में हमें जो संस्कार, संस्कृति मिले हैं. उसे आगे बढ़ाने के साथ कमियों को दूर करते हुए समाज को और सशक्त और समृद्ध बनाना है. प्राचीन काल से ही बिहार में शिक्षा का विशेष महत्व और लंबी परंपरा रही है. इसलिये शिक्षा क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. कार्यक्रम का विषय प्रवेश संघ के क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह ने कराया. इस मौके पर क्षेत्र प्रचारक रामनवमी, प्रांत संघचालक गौरी शंकर प्रसाद, प्रांत प्रचारक रविशंकर मौजूद रहे. संचालन विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना ने किया. धन्यवाद ज्ञापन प्रांत संपर्क प्रमुख मोहिनीश ने किया. धर्म और नैतिकता से राष्ट्रधर्म निभाएं तो देश बनेगा सशक्त दूसरे सत्र में यंग प्रोफेशनल के साथ आयोजित संगोष्ठी में सर कार्यवाह ने कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड की दिशा में प्रयत्न हो रहे हैं, लेकिन इसे लेकर पहले सही नीति बनाने की जरूरत है. इसमें कई तरह की चुनौतियां हैं. देश के अंदर अलग-अलग क्षेत्र में कई भिन्न परंपरा है. इसलिये यूनिफार्म सिविल कोड को सीधे लागू करने में समस्या आ सकती है. राज्य अपने स्तर से अपनी नीति बनाकर राज्य में इसे लागू कर सकती है. उत्तराखंड और गुजरात में इस दिशा में प्रयास हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश को बचाना है तो हिंदू समाज को एकजुट होना होगा. सारा विश्व एक परिवार है. अकेले में भय भी है, जबकि साथ चलने में प्रतिभा का विकास होता है. अहंकार नहीं आता और एक दूसरे से प्रेरणा भी मिलती है. धर्म, अध्यात्म, शील, नैतिकता की दृष्टि से राष्ट्र धर्म को निभायेंगे तो देश और सशक्त बनेगा. संवाद के दौरान पूछे गये सवाल के जवाब में सर कार्यवाह ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चुनौतियां हैं. जनसंख्या असंतुलन सही नहीं है. इस पर सोचने की जरूरत है. संघ का इसमें राष्ट्र के विकास व हित के नाते अपना विचार है. इसमें क़ोई राजनीति नहीं है. उन्होंने कहा कि जाति और वोट बैंक की राजनीति भी सही नहीं है.
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By Vinay Kumar
I am working as a deputy chief reporter at Prabhat Khabar muzaffarpur. My writing focuses on political, social, and current topics.
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