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पांच करोड़ का रोजाना कारोबार, पर ढंग की सुविधाएं एक भी नहीं

Updated at : 21 Jan 2025 8:56 PM (IST)
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पांच करोड़ का रोजाना कारोबार, पर ढंग की सुविधाएं एक भी नहीं

सर्राफा मंडी में 600 दुकानें हैं. पर यहां न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही पार्किंग के इंतजाम हैं. यह तब है जबकि सर्राफा संघ में 250 दुकानदार शुमार हैं और हर साल कारोबार में 10 फीसदी की ग्रोथ हो रही है.

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उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर

पांच करोड़ का रोजाना कारोबार करने वाली सर्राफा मंडी में ढंग की सुविधाएं एक भी नहीं हैं. कपड़े के बाद सर्राफा शहर की दूसरी सबसे बड़ी मंडी है. सर्राफा मंडी में 600 दुकानें हैं. पर यहां न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही पार्किंग के इंतजाम हैं. यह तब है जबकि सर्राफा संघ में 250 दुकानदार शुमार हैं और हर साल कारोबार में 10 फीसदी की ग्रोथ हो रही है.

दिवाली और लग्न के समय यहां खरीदारों की भीड़ उमड़ती है. हालांकि पूरे वर्ष भर यहां से ज्वेलरी का अच्छा कारोबार होता है. सर्राफा मंडी में खुदरा के अलावा सोने-चांदी की कई होलसेल दुकानें भी हैं. शहर के अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लोग यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. जब से यहां बीएसआइ हॉलमार्क की ज्वेलरी का प्रचलन बढ़ा है, तबसे यहां ग्रामीण क्षेत्रों के खरीदारों की भीड़ बढ़ी है. विभिन्न ब्रांडेड ज्वेलरी के शोरूम के बावजूद सर्राफा बाजार के कारोबार का विस्तार हो रहा है.

सर्राफा बाजार में बढ़ रहीं दुकानें

सर्राफा बाजार का विस्तार हुआ है. दुकानों की संख्या भी बढ़ रही है. सर्राफा संघ से अधिक संख्या में दुकानदार जुड़े, इसके लिए पहल की जा रही है.ज्वेलरी का मुख्य बाजार होने के कारण यहां ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग खरीदारी करने पहुंच रहे हैं. यहां हॉलमार्क की ज्वेलरी का कारोबार होने के कारण ग्राहक के मन में किसी तरह की शंका नहीं रहती. वह अपने सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी करते हैं.-

विश्वजीत कुमार, महामंत्री, सर्राफा संघ

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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