पुरानी कार या बाइक को खरीदने से पहले जांचें कागज

Updated at : 11 Sep 2024 12:13 AM (IST)
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पुरानी कार या बाइक को खरीदने से पहले जांचें कागज

पुरानी कार या बाइक को खरीदने से पहले जांचें कागज

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-पेपर ऑनलाइन नहीं हुआ तो गाड़ियां नहीं हाेंगी ट्रांसफर

-पहले ऑनलाइन इंट्री, उसके बाद ही हो सकेगा ट्रांसफर

मुजफ्फरपुर.

ऑफलाइन में पुरानी गाड़ी को खरीदने में वाहन मालिक सावधानी बरतें. क्योंकि जिन वाहनों का पेपर ऑनलाइन नहीं है, उन गाड़ियों का ट्रांसफर नहीं हाे सकता. कुछ वाहन मालिकों ने जिनकी गाड़ी के निबंधन के 15 साल पूरे होने में कुछ महीने शेष हैं, उन्होंने इसे दूसरे के हाथों में बेच दी है. लेकिन अब खरीदार को उस गाड़ी का ट्रांसफर कराने में परेशानी हाे रही है. क्योंकि ऑफलाइन इस गाड़ी की पहले ऑनलाइन इंट्री होगी, तब जाकर उसका ट्रांसफर हो सकेगा. ऐसे लोग जो गाड़ी को बेचकर ये सोचते हैं कि उनका अब काेई वास्ता नहीं, वे भूल करते हैं. आपकी गाड़ी ऑनलाइन होकर खरीदार के नाम पर जब तक रजिस्टर्ड नहीं हो जाती, वह पहले ही मालिक के नाम पर रहेगी. ऐसे में खरीदार व बेचने वाले दोनों वाहन मालिकों को इसमें सतर्क रहने की आवश्यकता है. डीटीओ कुमार सत्येंद्र यादव ने बताया कि ऑफ लाइन गाड़ियों की पहले ऑनलाइन करने के लिए इंट्री होती है. उसके बाद ही उसका ट्रांसफर व री-रजिस्ट्रेशन होता है. ऑनलाइन इंट्री के लिए गाड़ी मालिक को गाड़ी लेकर डीटीओ ऑफिस आवेदन करने के बाद जांच करानी होगी. इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होती है.

चेचिस प्रिंट व गाड़ी के साथ एमवीआइ और डीटीओ की संयुक्त फोटो

अगर आपने सकेंड हैंड गाड़ी खरीदी जिसका पेपर ऑनलाइन नहीं है. तो पहले उस गाड़ी की ऑनलाइन इंट्री के लिए डीटीओ ऑफिस में आवेदन देना होगा, आवेदन वहीं देंगे जिनके नाम पर ऑफिस के रिकॉर्ड में गाड़ी दर्ज है. आवेदक को आवेदन, गाड़ी संबंधित कागजात, फॉर्म 21 व 22, फर्स्ट इंश्योरेंस की कॉपी, गाड़ी मालिक का आधार कार्ड के साथ आवेदन देना होता है. इसके बाद डीटीओ ऑफिस में गाड़ी के चेचिस प्रिंट व गाड़ी के साथ एमवीआइ व डीटीओ की संयुक्त फोटो खींची जाती है. इसके बाद आवेदन पटना मुख्यालय जाता, जहां से जांच के बाद उसके इंट्री की अनुमति मिलती है. इसमें अभी कई महीने लग रहे हैं. अगर इस बीच गाड़ी का निबंधन समाप्त होता है, तो इंट्री कराते समय दोबारा निबंधन का शुल्क जमा करना होगा. उसके बाद गाड़ी का मालिकाना हक दूसरे के नाम पर ट्रांसफर करने के लिए आवेदन दिया जायेगा. इस पूरी प्रक्रिया तक गाड़ी पहले ऑनर के नाम पर ही रहती है. इस बीच उस गाड़ी से कोई दुर्घटना, किसी प्रकार का जुर्माना होता है तो उसकी सूचना पहले गाड़ी मालिक को ही जायेगी.

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