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दस हजार से अधिक लोगों का फंसा चालान

Updated at : 18 Sep 2025 8:29 PM (IST)
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दस हजार से अधिक लोगों का फंसा चालान

Challans of more than ten thousand people are stuck

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दस हजार से अधिक लोगों का फंसा चालान- बीते बीस दिनों से अधिक से परिवहन विभाग में नहीं कट रहा चालान

– नये वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी हो रहा बाधित, राजस्व हो रहा प्रभावित

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर बीते बीस दिनों से अधिक समय से परिवहन विभाग का सॉफ्टवेयर काम नहीं कर रहा है. इसी कारण विभाग में चालान से जुड़े सभी कार्य ठप पड़े हैं. लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस, परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन ट्रांसफर, हाइपोथिकेशन, रिन्यूवल, निबंधन सहित अन्य कार्यों का चालान नहीं कट रहा है. करीब दस हजार से अधिक वाहन मालिकों के विभिन्न मदों में चालान फंसे हुए हैं. वहीं, एक सप्ताह से अधिक समय से नए वाहनों के निबंधन का काम भी ठप है. इससे वाहन मालिक परेशान हैं, क्योंकि वाहन खरीदने के बाद उन्हें हाथों-हाथ नंबर नहीं मिल पा रहा है. इसका असर विभाग के राजस्व पर भी पड़ रहा है.

वाहन मालिकों और चालकों को भारी परेशानी

यह समस्या किसी एक जिले की नहीं बल्कि पूरे बिहार की है. लोग किसी तरह खुद से या साइबर कैफे की मदद से ऑनलाइन आवेदन तो कर दे रहे हैं, लेकिन चालान नहीं कट पा रहा है. कई लोगों ने चालान काटने की कोशिश की तो उनका भुगतान फंस गया. भुगतान अटकने पर लोग जानकारी लेने डीटीओ कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि यह समस्या पूरे बिहार में है.

सूत्रों के अनुसार, सॉफ्टवेयर में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं, लेकिन अपडेट अब तक पूरा नहीं हो सका है. सॉफ्टवेयर चालू होने के बाद चालान में फंसा पैसा संबंधित लोगों के खातों में वापस कर दिया जाएगा.

साइबर कैफे संचालक भी प्रभावित

ऑनलाइन काम करने वाले साइबर कैफे संचालकों ने भी चालान काटना बंद कर दिया है. सामान्य दिनों में जिले में रोज़ाना औसतन करीब 200 लर्निंग और फाइनल लाइसेंस के चालान कटते थे. इसके अलावा अन्य कार्यों के लिए 300 से 400 चालान प्रतिदिन ऑनलाइन कटते थे.

बीच-बीच में कभी-कभी कुछ चालान कट भी जाते हैं, लेकिन जैसे ही अधिक संख्या में चालान काटे जाते हैं, सॉफ्टवेयर फिर से फेल हो जाता है और चालान फंस जाते हैं.

डीटीओ का बयान

इस मामले में डीटीओ कुमार सत्येंद्र यादव ने बताया कि यह समस्या पूरे बिहार की है. मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है और जल्द ही समाधान होने की संभावना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KUMAR GAURAV

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KUMAR GAURAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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