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क्या है घेघा रोग जिससे पशुओं की लगातार हो रही है मौत?, जानें लक्षण और उपाय

जिले में लीवर फ्लूक बीमारी (घेघा रोग) से गाय, बकरी व भैंस के बच्चों की मौत हो रही है. इस बीमारी का प्रभाव पश्चिमी क्षेत्र में अधिक हो रहा है. मोतीपुर, साहेबगंज, पारू, सरैया, कांटी प्रखंड के बाढ़ ग्रस्त व नदी किनारे वाले इलाकों में यह बीमारी सबसे अधिक फैल रही है. अबतक करीब दो हजार से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है. वहीं सैकड़ों पशु बीमार हैं. मरने वाले पशुओं में सबसे अधिक संख्या गाय की है. इसके बाद बकरी और 15 माह से कम उम्र के भैंस के बच्चे को यह बीमारी ग्रसित कर रही है.

जिले में लीवर फ्लूक बीमारी (घेघा रोग) से गाय, बकरी व भैंस के बच्चों की मौत हो रही है. इस बीमारी का प्रभाव पश्चिमी क्षेत्र में अधिक हो रहा है. मोतीपुर, साहेबगंज, पारू, सरैया, कांटी प्रखंड के बाढ़ ग्रस्त व नदी किनारे वाले इलाकों में यह बीमारी सबसे अधिक फैल रही है. अबतक करीब दो हजार से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है. वहीं सैकड़ों पशु बीमार हैं. मरने वाले पशुओं में सबसे अधिक संख्या गाय की है. इसके बाद बकरी और 15 माह से कम उम्र के भैंस के बच्चे को यह बीमारी ग्रसित कर रही है.

बाढ़ के बाद हरा चारा खाने से यह रोग फैल रहा

मोतीपुर प्रखंड की हरपुर पंचायत में यह बीमारी काफी विकराल हो चुकी है. मुखिया प्रतिनिधि शिव शंकर पंडित ने बताया कि पिछले दो माह में 40 से अधिक गाय की मौत हो चुकी है. ग्रामीण पशु चिकित्सक राज किशोर सिंह ने बताया कि इस बीमारी का प्रकोप बाढ़ग्रस्त और नदी किनारे वाले इलाके में है. बाढ़ के बाद हरा चारा खाने से यह रोग फैल रहा है. हरपुर पंचायत निवासी राज मंगल सहनी की गाय पिछले चार दिनों से बीमार है. इधर, पशुपालकों का कहना है कि बाढ़ का पानी कम होने और बारिश थमने के बाद बीमारी में कुछ कमी आयी है.

ऐसा लक्षण दिखे तो बरतें सतर्कता

पशुओं में भूख में कमी, पशुओं का कमजोर होना, गर्दन का फूलना, कुछ दिन बाद फिर कम होना, फिर फूलना, शौच पतला होना, दूध देना बंद कर देना.

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एक माह में हो जाती है मौत

पशुपालकों की मानें तो यह बीमारी काफी घातक है. पहले गर्दन फूलता है. इसे गंभीरता से नहीं लेने पर 15 से 20 दिन में पशु काफी कमजोर हो जाता है. उसका लीवर कमजोर होने लगता है. पशु सुस्त और कमजोर होता है. सही इलाज नहीं होने पर उसकी मौत हो जाती है.

जिला पशुपालन पदाधिकारी की सलाह

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र व नदी किनारे वाले इलाके में लीवर फ्लूक (घेघा रोग) से मौत होने की जानकारी मिली है. इसकी मुफ्त दवा दी जा रही है. अंतिम समय में पशु अस्पताल जाने पर पशुओं की मौत हो जाती है. शुरुआती लक्षण दिखने पर ही पशुपालक को पशु चिकित्सालय पहुंच कर डॉक्टर से उचित सलाह लेना चाहिए.

डॉ सुनील रंजन सिंह, जिला पशुपालन पदाधिकारी

Prabhat Khabar News Desk
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