एयर के बाद अब मुजफ्फरपुर में ध्वनि प्रदूषण का बढ़ा खतरा, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

Published at :15 Feb 2025 12:59 AM (IST)
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एयर के बाद अब मुजफ्फरपुर में ध्वनि प्रदूषण का बढ़ा खतरा, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

एयर के बाद अब मुजफ्फरपुर में ध्वनि प्रदूषण का बढ़ा खतरा, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

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::: शहरी क्षेत्र में नहीं लगा है ध्वनि प्रदूषण मापक यंत्र, डीएम ने बियाडा से लेकर रेसिडेंशियल एरिया तक में साइन बोर्ड व यंत्र लगाने का आदेश दिया

::: नगर निगम के साथ-साथ जिले के तीनों नगर परिषद कांटी, साहेबगंज व मोतीपुर को भी सख्ती से साउंड पॉल्यूशन पर कंट्रोल करने का मिला निर्देश

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर में एयर (वायु) के बाद अब साउंड पॉल्यूशन (ध्वनि प्रदूषण) का खतरा मंडराने लगा है. प्रशासनिक स्तर पर रात 10 बजे से सुबह 06 बजे तक किसी भी तरह के समारोह में डीजे एवं ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग वर्जित है. इससे रात्रि में आवासीय एरिया में 55 डेसीबल से ज्यादा का शोर नहीं हो. लेकिन मुजफ्फरपुर में इसका अनुपालन नहीं के बराबर ही होता है. शहर हो या गांव. हर जगह आधी रात तक डीजे व अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है. यही नहीं, रात्रि में बस, ट्रक व ट्रेन के हॉर्न भी तेज होने के कारण एनएच एवं रेलवे ट्रैक से सटे मोहल्ले में तय मानक का अनुपालन संभव नहीं है. इस कारण मुजफ्फरपुर में अब एयर के बाद साउंड पॉल्यूशन की गंभीर समस्या का खतरा मंडराने लगा है.

बता दें कि जनसंख्या और विकास के साथ ही यातायात और वाहनों की संख्या में भी वृद्धि होती है. इस कारण यातायात के दौरान होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ने लगता है. अत्यधिक शोर से सुनने की शक्ति भी चले जाने का खतरा होता है. ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए ध्वनि स्तर मीटर (एसएलएम), एकीकृत ध्वनि स्तर मीटर (आईएसएलएम), और शोर डोसीमीटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है.

बॉक्स ::: इस तरीके से ध्वनि प्रदूषण पर पाया जा सकता है कंट्रोल

– अपने आसपास के ध्वनि स्तर की निगरानी करें.

– अगर आपको किसी जगह से ज्यादा शोर आ रहा है, तो स्थानीय प्राधिकरण से संपर्क करें.

– रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच कानूनी डेसीबल सीमा से ज्यादा शोर हो रहा है, तो पुलिस को कॉल करें.

– पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 100 या 112 पर भी शिकायत दर्ज कराएं.

बॉक्स :: ध्वनि प्रदूषण के बारे में जरूरी बातें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, 65 डेसीबल से ज्यादा का शोर ध्वनि प्रदूषण है. 70 डेसीबल से ज्यादा शोर के स्तर में लंबे समय तक रहने से श्रवण हानि हो सकती है. यही नहीं, 85 डेसीबल से ज्यादा शोर का स्तर कुछ घंटों के संपर्क में रहने के बाद खतरनाक हो सकता है. वहीं, 100 डेसीबल से ज्यादा का शोर तेजी से सुनने की हानि पैदा कर सकता है.

बॉक्स ::: शहरी क्षेत्र में चार तरह का लगेगा साइन बोर्ड

इंडस्ट्रियल एरिया में सुबह छह से रात्रि दस बजे तक 75 और रात्रि में दस से सुबह छह बजे तक 70 डेसीबल तक का शोर रहना चाहिए. इसके अलावा कमर्शियल एरिया में दिन में 65 एवं रात्रि में 55, रेसिडेंशियल एरिया में दिन में 55 एवं रात्रि में 45 एवं पब्लिक एरिया में दिन व रात दोनों समय में 10 डेसीबल से कम शोरगुल होना चाहिए. डीएम ने इससे संबंधित साइन बोर्ड सभी जगहों पर लगाने का आदेश जारी किया है.

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