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पांच साल में 70 करोड़ का हुआ काम : मेयर

मुजफ्फरपुर : नगर निगम में पिछले पांच साल में रिकॉर्ड विकास के कार्य हुए. इस दौरान छोटी बड़ी सभी को मिलाकर करीब एक हजार योजनाओं पर काम हुआ. इसमें सड़क, नाला, पुलिया निर्माण, पेयजल आदि शामिल है. ये सभी काम बीआरजीएफ, नगर निगम, चतुर्थ, पंचम वित्त आदि के तहत किये गये. निगम के राजस्व में […]

मुजफ्फरपुर : नगर निगम में पिछले पांच साल में रिकॉर्ड विकास के कार्य हुए. इस दौरान छोटी बड़ी सभी को मिलाकर करीब एक हजार योजनाओं पर काम हुआ. इसमें सड़क, नाला, पुलिया निर्माण, पेयजल आदि शामिल है. ये सभी काम बीआरजीएफ, नगर निगम, चतुर्थ, पंचम वित्त आदि के तहत किये गये. निगम के राजस्व में बढ़ोत्तरी हुई और सफाई कर्मी व संसाधन की संख्या बढ़ी. उक्त बातें मंगलवार को मेयर के आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में मेयर वर्षा सिंह व पूर्व विधायक विजेंद्र चौधरी ने संयुक्त रूप से आयोजित प्रेसवार्ता में कही.

विकास कार्य हुआ, लेकिन बुडको की गलती के कारण पेयजल संकट से निजात नहीं मिल सकी. 98 करोड़ की पेयजल योजना बुडको की लापरवाही के कारण अधर में लटक गयी. इस कारण शहरवासियों को पेयजल संकट से निजात नहीं मिल सकी. लेकिन विभाग की ओर से इस योजना पर पुन काम का आदेश हो चुका है. विकास की उपलब्धियों को बताने के साथ जनता से अपील की गयी कि वह चुनाव में काम करने वाले प्रत्याशी को वोट दें. जो कमी पूरी रह गयी उसे नया बोर्ड पूरा करेगा. अब पूरा ध्यान पेयजल व जल निकासी पर केंद्रित होगा.

बीते पांच साल में सबसे अधिक हुआ विकास. जब से निगम से बना तब से अब तक में सबसे अच्छा यही पांच साल रहा. पहले 17 ट्रैक्टर थे, अब 55 है. पहले प्रत्येक वार्ड में 7 सफाई कर्मी थे और आज 12 है. इस पांच में हड़ताल ना के बराबर हुई, जबकि पहले हर तीन चार माह पर हड़ताल होती थी.
सरकार ने अभी छठा वेतन दिया, निगम ने इससे पूर्व ही दे दिया. 30-40 साल से काम कर रहे कर्मियों की सेवा संपुष्टि हुई, जो शेष बचे है उसे निगम बोर्ड ने पास कर दिया है, नियमानुसार उस पर कार्रवाई जारी है. सात सौ अधिक मकान का नक्शा पास हुआ, हर वार्ड में दर्जनों शौचालय का निर्माण कराया गया. 3250 एलइडी लाइट लगी. बिना टैक्स बढ़ाये निगम का राजस्व (केवल होल्डिंग टैक्स) 3.35 करोड़ से बढ़कर 12 से 14 करोड़ हो गया. जन्म मृत्यु, होल्डिंग टैक्स ऑन लाइन हुआ. अमृत योजना में शहर का चयन हुआ. कूड़ा से जैविक खाद बनाने की शुरुआत पहले पूरे बिहार में इसी निगम से हुई.
49 वार्ड में डोर टू डोर कूड़ा उठाव के लिए कूड़ेदान वितरण की शुरुआत हो चुकी है. दैनिक मजदूर का पारिश्रमिक 198 से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन किया गया. फॉगिंग मशीन की खरीद हुई, नाला उड़ाही के लिए सुपर शकर मशीन बहुत जल्द आने वाली है. जो सड़क, नाले नहीं बन सके है तथा जहां पाइप लाइन नहीं बिछी है. उन सभी जगहों का पाइप लाइन विस्तार को लेकर योजनाओं का चयन मुख्यमंत्री सात निश्चय के तहत हो चुका है. इन सभी योजनाओं पर सिलसिलेवार तरीके से कार्रवाई चल रही है. वहीं पूर्व विधायक ने कहा कि नगर आयुक्त व मेयर के बीच कोई विवाद नहीं है, वर्तमान नगर आयुक्त के समय बहुत तेजी से विकास हुआ है. प्रेसवार्ता के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता संजीव चौहान भी मौजूद थे.
स्मार्ट सिटी में पिछड़ने का अफसोस
प्रेसवार्ता के दौरान इन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के दो राउंड की प्रतियोगिता में पिछड़ने का अफसोस है. इसके लिए एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया. सही से रिपोर्ट तैयार नहीं होने के कारण ऐसा हुआ. साथ ही कहा कि 100 शहर में अपने शहर का चयन इसी कार्यकाल में निगम के अपने कार्य के कारण हुआ. शहर स्मार्ट सिटी के तीसरे राउंड की प्रतियोगिता में शामिल हो इसकी पूरी कोशिश की गयी है.
बोर्ड की बैठक क्यों नहीं उठाया भ्रष्टाचार का मामला : विजेंद्र
प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व विधायक विजेंद्र चौधरी ने विरोधियों पर जमकर प्रहार किया. कहा कि नगर विधायक सुरेश शर्मा नगर निगम बोर्ड के सदस्य है, कई बैठक में भाग भी लिये. लेकिन उस बैठक में भ्रष्टाचार का मामला क्यों नहीं उठाया. अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच हो और दाेषी पर कार्रवाई होनी चाहिए. बाहर रहकर केवल कहते है ये गड़बड़ी वो गड़बड़ी, अगर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच करवाये. पांच साल के विकास से विधायक व सांसद घबराएं हुए है.
चूंकि उनके फंड से कुछ लाख का काम होता है. जबकि हर वार्ड में पार्षद छोटा प्रतिनिधि होने के बावजूद एक करोड़ से अधिक का काम करवा रहे है. हर वार्ड में 1.5 से तीन करोड़ की योजना पर काम चल रहा है. जिससे इन जन प्रतिनिधियों को जलन हो रही है. बाहर कहते है कि इतना पैसा मंगवा दिये है तो कहां गया पैसा. आये हुए पैसे पर काम क्यों नहीं शुरू हुआ. पूर्व विधायक सीधे तौर पर कहा कि जो खुद भ्रष्ट होता है वही भ्रष्टाचार का हंगामा करता है. नगर निगम में जो लोग है उन्होंने ही काम किया और बेहतर किया.
छोटी बड़ी को मिलाकर एक हजार से अधिक योजनाओं पर हुआ काम

Prabhat Khabar Digital Desk
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