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सैकड़ों शक्षिकों का नहीं हो सका वेतन नर्धिारण

17 Jan, 2016 6:47 pm
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सैकड़ों शक्षिकों का नहीं हो सका वेतन नर्धिारण

सैकड़ों शिक्षकों का नहीं हो सका वेतन निर्धारण -शिक्षकों ने बीइओ पर लगाया मनमानी का आरोप -शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों को भी छोड़ दिया संवाददाता, मुजफ्फरपुर सरैया प्रखंड के एक स्कूल में तैनात पंकज कुमार बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के सक्रिय पदाधिकारी है. शिक्षकों की समस्याओं को लेकर अक्सर होने वाले आंदोलनों में भी […]

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सैकड़ों शिक्षकों का नहीं हो सका वेतन निर्धारण -शिक्षकों ने बीइओ पर लगाया मनमानी का आरोप -शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों को भी छोड़ दिया संवाददाता, मुजफ्फरपुर सरैया प्रखंड के एक स्कूल में तैनात पंकज कुमार बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के सक्रिय पदाधिकारी है. शिक्षकों की समस्याओं को लेकर अक्सर होने वाले आंदोलनों में भी आगे रहे. पिछले साल जब नियोजित शिक्षकों का वेतन निर्धारण शुरू हुआ, तो संघ के वरीय पदाधिकारियों के साथ सभी शिक्षकों का निर्धारण समय से कराने में ये भी लगे रहे. इन्हें हैरानी तब हुई जब ये खुद ही वेतन निर्धारण से वंचित रह गये. हैरान करने वाली बात है कि इनके स्कूल में तैनात अन्य 22 शिक्षकों का वेतन निर्धारण हो गया है. वेतन निर्धारण में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों की मनमानी की यह बानगी भर है. सरैया व कांटी प्रखंड में 27 शिक्षकों का वेतन निर्धारण नहीं हुआ है, जिसकी लिखित सूचना संघ ने डीइओ गणेश दत्त झा व डीपीओ स्थापना नीता कुमारी पांडेय को दी है. हालांकि, जिले के अन्य प्रखंडों में भी सैकड़ों शिक्षकों का वेतन निर्धारण नहीं हो सका है, जिसके चलते नया वेतनमान मिलना मुश्किल है. डीइओ गणेश दत्त झा का कहना है कि सभी नियोजित शिक्षकों का वेतन निर्धारण पूरा कराएंगे. अभी इसकी जांच चल रही है कि किस प्रखंड में कितने शिक्षकों का वेतन निर्धारण नहीं हो सका है. कहा कि शिक्षकों को समय से वेतन भुगतान कराने के लिए प्रयास चल रहा है. सरकार ने नियोजन शिक्षकों के लिए वेतनमान तय किया, तो इसके साथ ही शिक्षकों का शोषण भी शुरू हो गया. वेतन निर्धारण व शिक्षकों की सेवा पुस्तिका अपडेट करने के नाम पर प्रखंड स्तर से ही धन-उगाही शुरू हो गयी. जिन शिक्षकों ने जुगाड़ लगा लिया, उनकी सेवा पुस्तिका भी अपडेट हुई व निर्धारण भी पहले हो गया. खास बात यह है कि इस सौदेबाजी में कुछ शिक्षकों ने ही बिचौलिये की भूमिका निभाई. जब शिक्षक संगठनों ने धन-उगाही के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की, तब विभागीय पदाधिकारियों की नींद खुली. ऊपर से सरकार का भी दबाव बढ़ने लगा. तब जाकर प्रखंडवार कैंप लगाकर वेतन निर्धारण कराया गया. हालांकि इसमें भी कई बीइओ ने अपनी मनमानी कर दी.

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