मुजफ्फरपुर: जीवन में दो चीजें सत्संग व कुसंग हैं. सत्संग मुक्ति का मार्ग बताता है, कुसंग नर्क की ओर ले जाता है. पुनजर्न्म के पाप से मन सत्संग में नहीं लगता है. मन को हमेशा सत्संग में लगाना चाहिए. भक्ति को बढ़ाना है तो सत्संग में जाना चाहिए. कुसंग से बचने के लिए सत्संग करें. उक्त बातें अयोध्या से आये श्री छोटे बापू ने गुरुवार को नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन कही. रेलवे कॉलोनी स्थित मनोरंजन गृह में आयोजित कथा में उन्होंने कहा कि आचरण से ही मनुष्य बनता है.
समस्त बुराइयों को दूर किया जा सकता है. सबहीं नचावत राम गोसाईं नाचत नर मट के नहीं. सभी देवता माया के अधीन हैं. माया से छुटता है. भगवान की कृपा से ही जीव को माया से छुटकारा मिलता है.
भगवान की कृपा से ही माया से मनुष्य का छुटकारा मिल सकता है. छोट बापू ने कहा कि भगवान श्रीराम के भाग्याभिषेक से वार्ता का प्रसंग भी सुनाया. उन्होंने कहा कि भाग्याभिषेक ने भगवान से कहा आप हमारे प्रश्नों का जवाब दीजिये. भगवान ने कहा कि ऐसा वरदान है कि इन प्रश्नों का उत्तर देने वाला राममय हो जायेगा. इस मौके पर कथा के मुख्य यजमान सुग्गा मंदिर के पूर्व सचिव मुरारी प्रसाद सिंह मुख्य रूप से मौजूद थे.
