घुसपैठियों व शरणार्थियों का भेद समझे देश

Updated at : 30 Dec 2019 8:38 AM (IST)
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घुसपैठियों व शरणार्थियों का भेद समझे देश

मुजफ्फरपुर : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का चार दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन लंगट सिंह महाविद्यालय के मैदान में रविवार को समाप्त हाे गया. 61 वें प्रांतीय अधिवेशन के अंतिम दिन संगठन के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्रीनिवास ने कहा कि आज देश में सीएए पर बहस हो रही है. लेकिन पूरे देश को शरणार्थी और घुसपैठिये […]

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मुजफ्फरपुर : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का चार दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन लंगट सिंह महाविद्यालय के मैदान में रविवार को समाप्त हाे गया. 61 वें प्रांतीय अधिवेशन के अंतिम दिन संगठन के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्रीनिवास ने कहा कि आज देश में सीएए पर बहस हो रही है. लेकिन पूरे देश को शरणार्थी और घुसपैठिये के बीच के अंतर काे समझना होगा. यह कानून शरणार्थियों के लिए है. यह देश भारत से चलेगा न कि इटली से. उन्होंने कहा देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती टुकड़े टुकड़े गैंग है. कैंपस में कई लोग देश को तोड़ने में लगे हुए हैं.

एबीवीपी सभी कैंपस और पूरे देश में सीएए के बारे में जन जागरण अभियान चलायेगी. कुछ दल भाषा के नाम पर देश को तोड़ना चाहते हैं. आज कैंपस खड़ा होगा तो राष्ट्रवाद के नाम पर खड़ा होगा. संगठन ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आंदोलन चलाया जिसका नतीजा सीएए है. आज संविधान की शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री कहते है कि वह राष्ट्रपति द्वारा पारित सीएए कानून लागू नहीं करेंगे.
वामपंथी दलों पर निशाना साधते हुए श्रीनिवास ने कहा कि अफजल गुरू की फांसी के वक्त भी वामपंथी दलों ने सवाल उठाया था. भारतीय मुसलमानों को सीएए से कोई दिक्कत नहीं है. देश में शरणार्थी रहेंगे पर घुसपैठिये नहीं. घुसपैठ से देश के डेमोग्राफिक बदलाव की साजिश की जा रही है. आज जो सीएए लागू किया गया है. वह पं जवाहर लाल नेहरू और दूसरे बड़े नेताओं ने 1955 लागू किया था.
एबीवीपी ने डिटेक्ट, डिलिट और डिपोर्ट करने का नारा दिया है. देश में पांच करोड़ से भी अधिक घुसपैठिये हैं. जिन्होंने रेड कॉरिडोर का सपना देखा वह आज चूर चूर हो रहा है. उन्होंने कहा कि असम की संस्कृति और पहचान का एनआरसी से काेई खतरा है. असमियों को खतरा है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों से है.
इस मौके पर बिहार झारखंड क्षेत्रीय संगठन मंत्री निखिल रंजन, प्रो. अरुण कुमार भगत, डॉ मुकुल कुमार शर्मा, डॉ अभिषेक पांडेय, रामाशंकर सिन्हा, बसंत मिश्रा, अभिषेक राज सोनू, रामबाबू , राकेश नंदन, डॉ सुजीत चौधरी, रविनंदन, सह संगठन मंत्री अजीत उपाध्याय, श्रीनिवास, प्रभात मिश्रा, प्रशांत गौतम, आशुतोष कुमार, रोमिता श्रीवास्तव, केशरी नंदन शर्मा, पुरुषोत्तम कुमार, पुष्कर सिंह मौजूद रहे.
बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं : एबीवीपी ने सह संगठन मंत्री ने नीतीश सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं है. सरकार ने शिक्षा व्यवस्था चौपट कर दी है. उन्होंने कहा कि आज बिहार के गांवों में विकास नहीं पहुंचा है.
जब तक बिहार का विकास नहीं होगा देश का विकास नहीं हो सकता है. उन्होंने नयी शिक्षा नीति पर कहा कि यह बहुत पहले लागू हो जाना चाहिए था. देश के छात्रों को देश के महापुरुषों के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए. नयी शिक्षा नीति शिक्षा के व्यापारीकरण का विरोध करती है.
प्रांतीय कमेटी की हुई घोषणा : प्रांतीय अधिवेशन में संगठन की प्रदेश कमेटी की घोषणा की गयी. कमेटी में करीब 250 सदस्य बनाये गये हैं. इसके अलावा 11 उपाध्यक्ष छह प्रदेश सहमंत्री, एक प्रदेश अध्यक्ष एक प्रदेश मंत्री सभी विवि के संयोजक और पांच आयाम प्रमुख बनाये गये हैं.
प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ ममता कुमारी, विवि संयोजक केशरीनंदन शर्मा, जिला संगठन मंत्री पुरुषोत्तम कुमार, जिला संयोजक चंद्रभानु सिंह कमेटी में रखा गया है. इसके बाद नयी कार्यकारिणी के अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री ने बैठक की और उन्हें संगठन के कामों को बताया . राष्ट्रीय सह मंत्री ने कह कि सभी पदाधिकारियों को मिलजुल कर छात्र हित के लिए काम करना है.
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