डॉक्टर व नर्स के कमरे में हीटर बेड पर ठंड से ठिठुर रहे मरीज
Updated at : 28 Dec 2019 5:59 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : रात के नौ बज रहे हैं. पछुआ हवा चल रही है, ठंड ऐसी कि हाड़-मांस मानो सुन्न हो रहे. सदर अस्पताल में उपचार के लिए वार्ड में भर्ती मरीज एक पतली कंबल में ठिठुर कर बेड पर सो रहा है. वार्ड की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं, जिससे शीतलहर के कारण मरीज […]
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मुजफ्फरपुर : रात के नौ बज रहे हैं. पछुआ हवा चल रही है, ठंड ऐसी कि हाड़-मांस मानो सुन्न हो रहे. सदर अस्पताल में उपचार के लिए वार्ड में भर्ती मरीज एक पतली कंबल में ठिठुर कर बेड पर सो रहा है. वार्ड की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं, जिससे शीतलहर के कारण मरीज कंपकंपा रहे हैं. ठंड से निबटने के लिए अस्पताल में कोई हीटर नहीं है. मरीजों को ठंड से बचाने के लिए सिर्फ एक पतला कंबल अस्पताल प्रशासन की ओर से दिया गया है.
कैमरे की फ्लैश जैसे ही चमकती है, मरीज व उनके परिजन उठ कर बैठ जाते हैं. प्रसूता शिवानी, प्रियंका, लक्ष्मी, काजल ने बताया कि वे रविवार से यहां भर्ती हैं. गेट बंद कर लें तो अंदर सर्दी कम लगती है. खुला होने पर सीधी हवा अंदर आती है. प्रसूताओं के परिजनों ने बताया कि अस्पताल से सिर्फ एक पतला कंबल मिला है. इससे ठंड नहीं जाती. घर से रजाई लाना पड़ा है.
अस्पताल में प्रसूताओं को गर्म पानी देने के आदेश है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. उनसे पूछने पर पता चलता है कि वह इस कंपकंपाती ठंड में एक पतले कंबल के सहारे रात काट रहे हैं. अस्पताल के एक कक्ष में डॉक्टर बैठे थे. उनके पास गर्म हवा देनी वाला हीटर रखा हुआ है. इस कक्ष के ठीक बगल में नर्स का कक्ष है, उनके भी कक्ष में हिटर लगे हुए हैं.
अस्पताल से मरीजों को जो कंबल मिले हैं, वह ठंड बचाने के लिए कारगर है. इसलिए मरीजों को घरों से या अपने रिश्तेदारों के यहां से रजाई व अन्य गर्म कपड़े लाना पड़ रहा है. चूंकि रूम हीटर व अन्य उपाय बिना अस्पताल प्रबंधन की अनुमति के मरीज कर नहीं सकते, इसलिए उन्हें ठंड से ठिठुरते रहना पड़ता है. ठंड पूरे चरम पर है, लेकिन अस्पतालों के पास वार्डों में मरीजों को ठंड से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं है.
महिला वार्ड, पुरुष सर्जिकल वार्ड, शिशु वार्ड की बात करें, तो यहां की स्थिति बेहद दयनीय है. वार्ड में लगी खिड़की के शीशे टूटे हैं, जिससे दिन-रात इससे ठंडी हवा आती है. इससे वार्ड में भर्ती मरीज ठिठुरते रहते हैं.
ठंड का मौसम आने से पहले अस्पताल प्रबंधन वार्डों की खिड़की व दरवाजों की मरम्मत कराता है, जिससे ठंडी हवा न आ सके. लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने ऐसा कुछ नहीं किया है. न तो टूटी हुई खिड़कियों की मरम्मत करायी है और न ही ठंडी हवा के प्रवेश को रोकने के लिए कोई इंतजाम किये हैं.
अस्पताल के कई वार्डों में पानी टपक रहा है, लेकिन प्रबंधन ने इस लीकेज को भी ठीक नहीं कराया है. इससे भी वार्डों में ठंड बढ़ रही है.
ठंड में वायरल इंफेक्शन की शिकायत बढ़ी : ठंड को लेकर खांसी, जुकाम के साथ-साथ वायरल इंफेक्शन की शिकायत बढ़ जाती है. दिन में ठंड का अहसास तो शाम को ठंडी हवा से रूबरू होना पड़ रहा है. इस कारण बच्चों में सर्दी, जुकाम, एलर्जी, वायरल बुखार, गले की खराबी और स्किन की एलर्जी के रोग पनपने लगे हैं.
शीत लहर व ठंड से बच्चों को बचाएं
- ज्यादा से ज्यादा शरीर ढका रहे ऐसे वस्त्र पहना कर बच्चों को रखें.
- वायरल इंफेक्शन से बचने के लिए बच्चों के खान पान का विशेष ध्यान रखें. बच्चों को ठंड से बाहर न निकालें.
- बच्चों को गुनगुने पानी से नहलाएं. यदि ठंड से बच्चों का शरीर या होठ नीला पड़ने लगे तो फौरन डाक्टर को दिखाएं.
- पांच-छह बार दस्त होने पर बच्चे को नमक, पानी का घोल पिलाएं.
- हालत ज्यादा खराब होने पर डाक्टर को दिखाएं.
डॉ रंजन, शिशु रोग विशेषज्ञ, सदर अस्पताल
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