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मुजफ्फरपुर : एसकेएमसीएच : एक्सपर्ट डॉक्टर हैं नहीं, मरीज को वेंटिलेटर कौन लगाये

Updated at : 14 Feb 2019 5:26 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर :  एसकेएमसीएच : एक्सपर्ट डॉक्टर हैं नहीं, मरीज को वेंटिलेटर कौन लगाये

राजकुमार,मुजफ्फरपुर :उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल एसकेएमसीएच की इमरजेंसी या आइसीयू में भर्ती मरीज को यदि वेंटिलेटर मशीन की जरूरत पड़ जाये, तो उसे रेफर करना ही विकल्प है. कहने को तो यहां सात वेंटिलेटर मशीन हैं, लेकिन इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पाता. वजह यह है कि इसे ऑपरेट करने वाले विशेषज्ञ […]

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राजकुमार,मुजफ्फरपुर :उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल एसकेएमसीएच की इमरजेंसी या आइसीयू में भर्ती मरीज को यदि वेंटिलेटर मशीन की जरूरत पड़ जाये, तो उसे रेफर करना ही विकल्प है. कहने को तो यहां सात वेंटिलेटर मशीन हैं, लेकिन इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पाता. वजह यह है कि इसे ऑपरेट करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर और पारा मेडिकल स्टाफ नहीं हैं. वर्ष 2014 में एसकेएमसीएच में वेंटिलेटर मशीन मंगायी गयी थी.
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि किसी मरीज को वेंटिलेटर मशीन लगाने के लिए एक डॉक्टर के साथ तीन तकनीशियन की जरूरत होती है. तीन शिफ्ट के लिए तीन डॉक्टर व नौ तकनीशियन चाहिए. इनके अभाव में सभी सात वेंटिलेटर मशीन यूं ही पड़ी हुई हैं. आइसीयू और स्पेशल आइसीयू में एक-एक वेंटीलेटर है, जबकि पीआइसीयू में चार हैं. एसकेएमसीएच में किसी स्टाफ को याद नहीं कि पिछली बार वेंटिलेटर मशीन का इस्तेमाल कब किया गया था.
कभी-कभार सर्जरी के तुरंत बाद कुछ समय के लिए वेंटिलेटर का उपयोग तब किया जाता है, जब मरीज को जेनरल एनेस्थीसिया दिया गया हो. ऐसी स्थिति में भी एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर वेंटिलेटर को ऑपरेट करते हैं. सामान्य तौर पर जब किसी मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती और उसे वेंटिलेटर की जरूरत हो तो उसे एसकेएमसीएच से रेफर कर दिया जाता है. ऐसी स्थिति में किसी मरीज को पटना ले जाने की बजाये उसके परिजन शहर के किसी निजी अस्पताल में ले जाते हैं.
निजी अस्पताल में खर्च अधिक. निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर मरीज को रखने का खर्च 24 घंटे पर चार्ज किया जाता है. 24 घंटे में इसका चार्ज 10 से 15 हजार रुपये प्रतिदिन लिया जाता है. लेकिन कहीं-कहीं 20 से 25 हजार रुपये प्रतिदिन भी लिया जाता है. पांच साल पहले मंगाये गये थे सात वेंटिलेटर, िबना काम के पड़े हैं
वेंटिलेटर एक कृत्रिम मशीन है, जो रोगी को सांस लेने में मदद करती है. यदि सांस मरीज के फेफड़ों तक नहीं जा रही हो, फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया हो, ऑक्सीजन का सर्कुलेशन पूरी तरह से नहीं हो रहा हो, मरीज गंभीर अवस्था या मरणासन्न स्थिति में हो तो वेंटिलेटर लगाने की जरूरत होती है. आमतौर पर टिटनेस, हेड इंज्यूरी, दुर्घटना, दौरा पड़ने, बड़े ऑपरेशन व कोमा आदि की स्थिति में मरीज को इसकी जरूरत होती है.
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