जिले में एक साल में 1600 एचआइवी के मरीज मिले

Updated at : 31 Aug 2018 5:16 AM (IST)
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जिले में एक साल में 1600 एचआइवी के मरीज मिले

मुजफ्फरपुर : जिले में एचआइवी मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है. पिछले एक साल में करीब 1600 नये मरीज मिले हैं. इन दिनों एसकेएमसीएच के एआरटी विभाग में जिले के दस हजार 128 मरीज निबंधित हैं. हर महीने 100 से 150 नये मरीजों का निबंधन किया जा रहा है. एचआइवी मरीजों […]

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मुजफ्फरपुर : जिले में एचआइवी मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है. पिछले एक साल में करीब 1600 नये मरीज मिले हैं. इन दिनों एसकेएमसीएच के एआरटी विभाग में जिले के दस हजार 128 मरीज निबंधित हैं. हर महीने 100 से 150 नये मरीजों का निबंधन किया जा रहा है. एचआइवी मरीजों की बढ़ती संख्या जिले के लिए चिंता का विषय है. डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या का कारण सिर्फ यौन संबंध नहीं है. संक्रमित सूई, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट व ब्लड से यह रोग फैल रहा है. जिला स्तर पर एचआइवी की रोकथाम के लिए नियमित योजना नहीं चलाये जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जागरूक नहीं हाे रहे हैं.

एआरटी सेंटर में दवा के लिए आने वाले अधिकतर लोग यह बताते हैं कि उन्हें यह रोग कैसे हुआ, इसकी जानकारी नहीं है. एक महीने तक लगातार बुखार व कमजोरी होने पर डॉक्टर ने एचआइवी टेस्ट कराने की सलाह दी थी.
एड्स कंट्रोल कमेटी बंद होने के बाद बढ़े मरीज: सदर अस्पताल में चल रहे एड्स कंट्रोल कमेटी का प्रोजेक्ट बंद होने के बाद से जिले में जागरूकता अभियान भी समाप्त हो गया. रेड लाइट एरिया से लेकर अन्य जगहों पर अब एचआइवी की जागरूकता नहीं दी जाती. स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला व पीएचसी स्तर पर इसके लिए कार्ययोजना भी नहीं है. मरीजों की पहचान तभी हो पाती है जब वह लंबे समय से बीमार हो व डॉक्टर ने उसका एचआइवी टेस्ट कराया हो.
प्रति महीने 100 से 150 नये मरीजों का किया
जा रहा निबंधन
एसकेएमसीएच के एआरटी सेंटर में लग रहा मरीजों का तांता
जिले में 10 हजार 128 मरीज एसकेएमसीएच
में निबंधित
एचआइवी मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है. हमलोगों ने मरीजों की बेहतरी के लिए एक संगठन भी बनाया है. सरकार से मांग कर रहे हैं कि मरीजों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाये. जिले में अभी तक हमलोगों ने 600 मरीजों को निबंधित किया है. अन्य लोगों को भी जोड़ने की तैयारी चल रही है.
प्रेम कुमार, संस्थापक, लिव विद एचआइवी संगठन
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