चीत्कार से दहल रहा था परिसर, हे भगवान... अब हम केकरा सहारे जिंदा रहबई

मुजफ्फरपुर : हमरा छोड़ के कहां चल गेला हो हमर बिरजू, अब हम केकरा सहारे जिंदा रहबई… हो बाबू साहेब सब कोई त हमर लाल के चेहरा दिखा द… हम अब कौन बेटा के स्कूल जाये लेल सुबह-सुबह तैयार करबई… कौन हमरा से रोज स्कूल जाये के लेल 20 रुपइया मंगतई… हे भगवान ई कौन […]
मुजफ्फरपुर : हमरा छोड़ के कहां चल गेला हो हमर बिरजू, अब हम केकरा सहारे जिंदा रहबई… हो बाबू साहेब सब कोई त हमर लाल के चेहरा दिखा द… हम अब कौन बेटा के स्कूल जाये लेल सुबह-सुबह तैयार करबई… कौन हमरा से रोज स्कूल जाये के लेल 20 रुपइया मंगतई… हे भगवान ई कौन जुल्म हमरा परिवार पर ढाह देला… अब केना जिंदगी कटतई… बेटे बिरजू की मौत की खबर सुनने के बाद एसकेएसमीएच पहुंची जानकी देवी बदहवास थी. वह इमरजेंसी के बाहर अपने कलेजे के टुकड़े की एक झलक पाने के लिए तड़प रही थी. परिवार के लोग उसकी स्थिति देख उसे इमरजेंसी में अंदर नहीं जाने दे रहे थे. दोपहर करीब तीन बजे जब उसे पता लगा कि उसके बेटे को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.
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