प्रभात खबर एक्सक्लूसिव: वित्तरहित स्कूलों के लिए नजीर है चकिया हाईस्कूल, देखने के लिए आते हैं लोग

पंचदेवरी का स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामनंदन लाल उच्च विद्यालय गहनी-चकिया वित्तरहित विद्यालय है. वित्तरहित विद्यालयों को सरकारी अनुदान भी समय पर नहीं मिल पा रहा है. जो अनुदान मिलता है, वह भी परीक्षाफल पर आधारित होता है, जो सिर्फ शिक्षकों के मानदेय के लिए होता है.
अजीत द्विवेदी, पंचदेवरी
पंचदेवरी का स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामनंदन लाल उच्च विद्यालय गहनी-चकिया वित्तरहित विद्यालय है. वित्तरहित विद्यालयों को सरकारी अनुदान भी समय पर नहीं मिल पा रहा है. जो अनुदान मिलता है, वह भी परीक्षाफल पर आधारित होता है, जो सिर्फ शिक्षकों के मानदेय के लिए होता है. विकास के लिए सरकार की ओर से किसी तरह की राशि नहीं मिलती. इसके बावजूद इस विद्यालय ने मिसाल कायम की है. शिक्षण से संबंधित यहां की हाइटेक व्यवस्थाएं उन हाइस्कूलों से कम नहीं हैं, जहां विकास के लिए लाखों की राशि विभाग द्वारा भेजी जाती है. यहां का लैब, लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास सब हाइटेक है.
विद्यालय के कैंपस को भी बेहतर ढंग से डेकोरेट कराया गया है. सारी व्यवस्थाएं चकाचक हैं. क्लासरूम व कार्यालय को भी आकर्षक बनवाया गया है. शौचालय सहित अन्य सारी व्यवस्थाएं अपडेट हैं. विद्यालय के प्रधानाध्यापक रत्नेश कुमार श्रीवास्तव ने समर्पित होकर विद्यालय के विकास के लिए काम किया है. विद्यालय प्रबंधन, संस्थापक परिवार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा समाजसेवियों का भी इसमें काफी योगदान रहा है. 2021 तक इस विद्यालय में सिर्फ छात्राएं पढ़ती थीं. अक्तूबर 2021 में शिक्षा विभाग द्वारा यहां की बेहतर व्यवस्था को देखते हुए सह शिक्षा की मान्यता दी गयी. इसके बाद छात्रों का भी नामांकन यहां होने लगा है. नौवीं व 10वीं कक्षाओं में पांच सौ से अधिक छात्र-छात्राओं का नामांकन है. मनोवैज्ञानिक शिक्षण पद्धति से हाइटेक व्यवस्था में छात्र यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. जिले के वित्तरहित हाइस्कूलों के लिए यह विद्यालय नजीर बन चुका है.
स्वतंत्रता सेनानी स्व रामनंदन लाल की स्मृति में 23 अक्तूबर 1980 को उनके पुत्र स्व मदन मोहन प्रसाद श्रीवास्तव द्वारा इस विद्यालय की स्थापना की गयी थी. उसी समय से यह विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की ज्योति जला रहा है. 43 वर्षों में, जहां अन्य कई वित्तरहित विद्यालयों की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है, वहीं यह विद्यालय एक मिसाल बनकर उभरा है. 2015 से शिक्षकों को मिलने वाला अनुदान भी नहीं मिला है. लेकिन, इस विद्यालय की शिक्षण संबंधित व्यवस्था, कहीं से प्रभावित नहीं हुई है. प्रधानाध्यापक, शिक्षकों व विद्यालय प्रबंधन के सदस्यों ने समर्पित होकर अपना काम किया है.
बीते 25 नवंबर को विद्यालय के संस्थापक स्व मदन मोहन प्रसाद श्रीवास्तव की प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने भी विद्यालय की व्यवस्था की काफी सराहना की थी. उन्होंने कहा कि एक वित्तरहित विद्यालय की ऐसी व्यवस्था काबिले तारीफ है. सरकार द्वारा इन विद्यालयों को विकास के लिए कोई राशि नहीं दी जाती है, इसके बावजूद यहां की हाइटेक व्यवस्था प्रधानाध्यापक व शिक्षकों के शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है. स्कूल ने प्रधानाध्यापक ने बताया कि वित्तरहित होने के बावजूद राज्य स्तर पर इस विद्यालय को पहचान दिलाने का लक्ष्य है. विद्यालय की व्यवस्था और हाइटेक की जायेगी. इसके लिए स्थानीय स्तर पर सबका सहयोग मिल रहा है.
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