बदहाली : सदर अस्पताल में नही है शव वाहन, परिजनों का हो रहा है आर्थिक दोहन

Updated at : 13 Feb 2025 7:25 PM (IST)
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बदहाली :  सदर अस्पताल में नही है शव वाहन, परिजनों का हो रहा है आर्थिक दोहन

सदर अस्पताल से अपनों के शव को ले जाने के लिए खर्च करने पड़ते है रुपये

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– सदर अस्पताल से अपनों के शव को ले जाने के लिए खर्च करने पड़ते है रुपये

– प्राइवेट एंबुलेंस ले रहे तीन से चार हजार रुपये

मुंगेर. मुंगेर मुख्यालय को भले ही पांच फरवरी को 100 बेड का मॉडल अस्पताल मिल गया. लेकिन गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा के दावों के बीच लोगों को अपनों का शव अस्पताल से घर लेकर जाने के लिए भी पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. हाल यह है कि सदर अस्पताल सहित दोनों अनुमंडल अस्पतालों में भी इलाज के दौरान मरने वालों के शवों को घर तक पहुंचाने के लिए शव वाहन नहीं है. जिसके कारण प्राइवेट एंबुलेंस द्वारा मोटी राशि ली जाती है.

सदर अस्पताल में नहीं है एक भी शव वाहन

सरकार द्वारा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के साथ एंबुलेंस की व्यवस्था सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर दी गयी है. जिले में कुल 24 एंबुलेंस हैं. जिसमें पांच एंबुलेंस सदर अस्पताल में हैं. साथ ही वैसे मरीज, जिनकी इलाज के दौरान सदर अस्पताल या जिले के अनुमंडल अस्पतालों में मृत्यु हो जाती है. वैसे मरीज के शवों को घर तक ले जाने के लिए शव वाहन की सुविधा भी दी जाती थी. लेकिन सदर अस्पताल मुंगेर में लंबे समय से शवों को लेकर जाने के लिए शव वाहन नहीं है.

प्राइवेट एंबुलेंस ले रहे तीन से चार हजार रुपये

सदर अस्पताल में शव वाहन नहीं होने के कारण लोगों को या तो निजी वाहन या निजी एंबुलेंस से शव को लेकर अपने घर तक ले जाना होता है. ऐसे में अपनों को खोने के गम के बाद शव को लेकर जाने के लिये मोटी राशि खर्च करना किसी के लिए भी कितना कष्टप्रद हो सकता है, इसका केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है. हाल यह है कि अस्पताल के बाहर खड़े निजी एंबुलेंस शवों को लेकर जाने के लिये तीन से चार हजार रुपये तक लेते हैं. सदर अस्पताल में जनवरी माह में ही 44 मरीजों की मौत विभिन्न कारणों से इलाज के दौरान हुयी है. अब ऐसे में मरीजों के परिजनों को अपनों का शव लेकर जाने में कितनी परेशानी हुई होगी. इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डाॅ विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि एक नवंबर 2024 को ही सरकार द्वारा एंबुलेंस सेवा देने वाली एजेंसी को बदला गया है. नयी एजेंसी द्वारा अबतक शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया है. जिले में एक भी शव वाहन नहीं होने को लेकर विभाग को पत्र भेजा गया है.

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