श्रावणी मेला शुरू होने में 23 दिन बाकी, मुंगेर के कांवरिया पथ पर अब भी हैं कटीली झाड़ियां

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कांवरिया पथ के किनारे कटीली झाड़ियों का नहीं हो रहा सफाई

कांवरिया पथ के किनारे कटीली झाड़ियों का नहीं हो रहा सफाई

Shravani Mela: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, लेकिन मुंगेर के असरगंज प्रखंड में कांवरिया पथ पर अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं. कटीली झाड़ियां, टूटे बेंच और अधूरे शौचालय श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं.

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मुंगेर (असरगंज) से हिमांशु कुमार सिंह की रिपोर्ट

Shravani Mela: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. बाबा भोलेनाथ के जयकारों के बीच लाखों कांवरियों के आगमन की तैयारी चल रही है, लेकिन मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड से गुजरने वाले कांवरिया पथ पर व्यवस्थाएं अभी अधूरी हैं. मेला शुरू होने में केवल 23 दिन बचे हैं, फिर भी कई जरूरी कार्य पूरे नहीं हो सके हैं.

कांवरिया पथ पर नहीं हुई झाड़ियों की सफाई

असरगंज क्षेत्र के करीब पांच किलोमीटर लंबे कांवरिया पथ के किनारे अब भी कटीली झाड़ियां उगी हुई हैं. श्रद्धालुओं के सुरक्षित आवागमन के लिए इनकी सफाई जरूरी मानी जाती है, लेकिन अब तक इस दिशा में काम नहीं हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द सफाई नहीं हुई तो कांवरियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

टूटे पड़े हैं बेंच और कांवर स्टैंड

पर्यटन विभाग की ओर से कांवरियों के विश्राम के लिए लगाए गए कई बेंच क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. कांवर रखने के लिए बनाए गए स्टैंड भी कई जगह टूटे हुए हैं. इनकी मरम्मत अब तक शुरू नहीं होने से श्रद्धालुओं की सुविधा प्रभावित होने की आशंका है.

शौचालय निर्माण शुरू नहीं, पीएचईडी मरम्मत में जुटा

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने और चापाकलों की मरम्मत में जुटा हुआ है. वहीं शाहकुंड मोड़ के पास प्रस्तावित नए शौचालय का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो सका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शौचालय तैयार नहीं हुआ तो मेले के दौरान श्रद्धालुओं को काफी कठिनाई होगी.

घर लौटने लगे प्रवासी, दुकानों की तैयारी तेज

Shravani Mela: श्रावणी मेले को लेकर बाहर राज्यों में काम करने वाले लोग भी अपने गांव लौटने लगे हैं. मसुदनपुर निवासी अमरजीत बिंद ने बताया कि हर वर्ष सावन में वे घर लौटकर कांवरियों की सेवा के लिए दुकान लगाते हैं. इससे श्रद्धालुओं की सेवा भी होती है और परिवार को अतिरिक्त आय भी मिल जाती है. क्षेत्र के अन्य दुकानदार भी मेला शुरू होने से पहले अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.

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